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Saharanpur News: यहां हर बीमारी दूर करने की मन्नत मांगते हैं श्रद्धालु
Tue, 30 Jul 2024 02:37 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 30 Jul 2024 02:37 AM IST
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बड़गांव। धूमगढ़ के जंगल में स्थित नाग देवता के मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी है। मान्यता है कि यहां हर मुराद पूरी होती है। खास बात यह है कि इंसानों के साथ ही पशुओं में फैलने वाली बीमारियों को दूर करने के लिए भी श्रद्धालु मन्नत मांगते हैं और वह पूरी होती है।
किवदंती है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व शिमलाना गांव निवासी एक वैश्य परिवार के बुजुर्ग को स्वप्न में नाग देवता ने दर्शन देकर स्वयं बताया था कि शिमलाना के मजरे धूमगढ़ के जंगल के बीच घनी झाड़ियों के बीच एक थान बना है। तुम वहां जाकर साफ सफाई करने के बाद रोजाना उस थान पर दीपक जलाओ। तुम्हारी हर मनोकामना पूर्ण होगी। उन्होंने उस स्थान पर देशी घी का दीपक जलाकर दूध से बने खाद्य पदार्थ का चढ़ावा चढ़ाया था। तब से आज तक इस मंदिर में दूध व उससे बनी सामग्री का प्रसाद चढ़ावे के रूप में चढ़ाई जाती है। मान्यता है कि मंदिर में मांगी गई इंसान की हर मुराद पूरी होती है। यहां का मुख्य प्रसाद दूध, मावा, खीर इत्यादि चढ़ाए जाते हैं। हर रविवार को श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन को हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली ही नहीं अप्रवासी भारतीय श्रद्धालु तक भारी संख्या में यहां हर साल पहुंचते हैं।
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बीमारियों को भी ठीक करते है बाबा नागदेवता
मंदिर समिति अध्यक्ष मांगेराम ने बताया कि श्रद्धालु अपने पशुओं की बीमारी ठीक होने के बाद यहां पर दूध या उससे बनी सामग्री जैसे खीर, पेड़ा आदि लेकर पहुंचते हैं। सावन के महीने में शिवरात्रि के दिन आसपास के गांव से श्रद्धालु गंगाजल चढ़ाने पहुंचते हैं। बताया कि मेले के दौरान हर रविवार को यहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे का दूध 10 से 20 क्विंटल तक हो जाता है। जिसे समिति बिक्री करने के बाद मंदिर परिसर में ही खर्च कर देती है।
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किवदंती है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व शिमलाना गांव निवासी एक वैश्य परिवार के बुजुर्ग को स्वप्न में नाग देवता ने दर्शन देकर स्वयं बताया था कि शिमलाना के मजरे धूमगढ़ के जंगल के बीच घनी झाड़ियों के बीच एक थान बना है। तुम वहां जाकर साफ सफाई करने के बाद रोजाना उस थान पर दीपक जलाओ। तुम्हारी हर मनोकामना पूर्ण होगी। उन्होंने उस स्थान पर देशी घी का दीपक जलाकर दूध से बने खाद्य पदार्थ का चढ़ावा चढ़ाया था। तब से आज तक इस मंदिर में दूध व उससे बनी सामग्री का प्रसाद चढ़ावे के रूप में चढ़ाई जाती है। मान्यता है कि मंदिर में मांगी गई इंसान की हर मुराद पूरी होती है। यहां का मुख्य प्रसाद दूध, मावा, खीर इत्यादि चढ़ाए जाते हैं। हर रविवार को श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन को हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली ही नहीं अप्रवासी भारतीय श्रद्धालु तक भारी संख्या में यहां हर साल पहुंचते हैं।
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बीमारियों को भी ठीक करते है बाबा नागदेवता
मंदिर समिति अध्यक्ष मांगेराम ने बताया कि श्रद्धालु अपने पशुओं की बीमारी ठीक होने के बाद यहां पर दूध या उससे बनी सामग्री जैसे खीर, पेड़ा आदि लेकर पहुंचते हैं। सावन के महीने में शिवरात्रि के दिन आसपास के गांव से श्रद्धालु गंगाजल चढ़ाने पहुंचते हैं। बताया कि मेले के दौरान हर रविवार को यहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे का दूध 10 से 20 क्विंटल तक हो जाता है। जिसे समिति बिक्री करने के बाद मंदिर परिसर में ही खर्च कर देती है।
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