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दो राज्यों की सरकार वसूलेगी हाजी महमूद से 50 करोड़ रुपये
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सहारनपुर। अवैध खनन करने और आसपास क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में एनजीटी ने तीन साल पहले भी हाजी इकबाल के भाई बसपा एमएलसी हाजी महमूद आदि से मुआवजे के रुप में 50 करोड़ रुपये की वसूली के आदेश दिए थे। अब फिर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल दिल्ली ने राज्य सरकार उत्तर प्रदेश और प्रमुख सचिव हरियाणा को निर्देश देते हुए बसपा एमएलसी महमूद अली, खनन व्यवसायी अमित जैन और मोहम्मद इनाम से खनन कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर 50 करोड़ रुपये के मुआवजे की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।
अवैध खनन के मामले में एनजीटी ने वर्ष 2016 में गुरप्रीत सिंह बग्गा की अपील पर खनन के क्षेत्र में 13 पार्टनरशिप फर्म, जिसके सह भागीदार अमित जैन, मोहम्मद इनाम, एमएलसी महमूद अली, विकास अग्रवाल और वाजिद अली थे, को पर्यावरण के नुकसान पहुंचाने पर 50 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। अपील के बाद 2019 में एनजीटी ने प्रधान स्टोन क्रेशर जिसके सह भागीदार विकास अग्रवाल, दिलशाद और वाजिद अली थे, इस जुर्माने की राशि से अलग करते हुए अमित जैन, मोहम्मद इनाम और एमएलसी महमूद अली को 50 करोड़ का जुर्माना राज्य सरकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भुगतान करने को कहा था। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था, साथ ही कहा कि अगर वह जुर्माना अदा नहीं करते तो उनके परमिट कैंसिल कर दिए जाएं। उन्होंने वह जुर्माना अदा नहीं किया। इसके बाद 19 मार्च 2020 को एनजीटी ने फिर से प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर जुर्माने की रकम और पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली भू-राजस्व की भांति करने और रकम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खाते में जमा कराने को कहा था। मगर वसूली नहीं हुुई। जिस के क्रियान्वयन के लिए रणवीर सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) दिल्ली में याचिका दायर की गई। जिस पर दस मार्च को सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की चार सदस्य आदेश कुमार गोयल, सुधीर अग्रवाल, ए सैनीथल और विजय कुलकर्णी की खंड पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, मुख्य सचिव हरियाणा और दोनों राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उपरोक्त तीनों से 50 करोड़ रुपये की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।
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अवैध खनन के मामले में एनजीटी ने वर्ष 2016 में गुरप्रीत सिंह बग्गा की अपील पर खनन के क्षेत्र में 13 पार्टनरशिप फर्म, जिसके सह भागीदार अमित जैन, मोहम्मद इनाम, एमएलसी महमूद अली, विकास अग्रवाल और वाजिद अली थे, को पर्यावरण के नुकसान पहुंचाने पर 50 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। अपील के बाद 2019 में एनजीटी ने प्रधान स्टोन क्रेशर जिसके सह भागीदार विकास अग्रवाल, दिलशाद और वाजिद अली थे, इस जुर्माने की राशि से अलग करते हुए अमित जैन, मोहम्मद इनाम और एमएलसी महमूद अली को 50 करोड़ का जुर्माना राज्य सरकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भुगतान करने को कहा था। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था, साथ ही कहा कि अगर वह जुर्माना अदा नहीं करते तो उनके परमिट कैंसिल कर दिए जाएं। उन्होंने वह जुर्माना अदा नहीं किया। इसके बाद 19 मार्च 2020 को एनजीटी ने फिर से प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर जुर्माने की रकम और पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली भू-राजस्व की भांति करने और रकम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खाते में जमा कराने को कहा था। मगर वसूली नहीं हुुई। जिस के क्रियान्वयन के लिए रणवीर सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) दिल्ली में याचिका दायर की गई। जिस पर दस मार्च को सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की चार सदस्य आदेश कुमार गोयल, सुधीर अग्रवाल, ए सैनीथल और विजय कुलकर्णी की खंड पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, मुख्य सचिव हरियाणा और दोनों राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उपरोक्त तीनों से 50 करोड़ रुपये की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।
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