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नहीं बनवाया गोल्डन कार्ड, बीमार होने पर भटक रहे मरीज
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सहारनपुर। पहले से गोल्डन कार्ड नहीं बनवाने वाले मरीजों को अब कार्ड बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। एसबीडी जिला अस्पताल परिसर में बने आयुष्मान भारत योजना के कार्यालय में प्रतिदिन दर्जन भर बिना कार्ड बनवाए लौट रहे हैं।
जिले में आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के पात्र परिवारों की संख्या 137110 (एक लाख 37 हजार 110) है। जिनमें 685000 पात्र व्यक्ति हैं। योजना को शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, मगर अभी तक मुश्किल से दो लाख लोग ही गोल्डन कार्ड बनवा सके हैं। बता दें कि योजना में शामिल होने के बावजूद यदि आपने गोल्डन कार्ड नहीं बनवाया है तो योजना के तहत सरकारी या गैर सरकारी अस्पताल में इलाज मिलने में मुश्किल रहती है। जनपद में शुरू से ही लोग गोल्डन कार्ड बनवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। बीते दिनों शासन के आदेश पर गोल्डन कार्ड बनाने के लिए विशेष कैंप लगाए गए थे, मगर इसके बावजूद 70 फीसदी से अधिक पात्रों ने अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बनवाए हैं। अब कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाने में जुटे कर्मचारियों की ड्यूूटी कोविड में लगाई गई है। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य बंद है। ऐसी स्थिति में अचानक जरूरत पड़ने पर मरीज कार्ड बनवाने के लिए भटक रहे हैं।
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ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में तैनात आयुष्मान मित्रों की ड्यूटी कोविड में लगी है। इसकी वजह से सरकारी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य बंद है। मगर जिस किसी व्यक्ति को जरूरत है वह जनसेवा केंद्र से कार्ड बनवा सकता है।
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डॉ. सुशील गुप्ता, जिला कार्यक्रम समन्वयक, आयुष्मान भारत योजना।
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जिले में आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के पात्र परिवारों की संख्या 137110 (एक लाख 37 हजार 110) है। जिनमें 685000 पात्र व्यक्ति हैं। योजना को शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, मगर अभी तक मुश्किल से दो लाख लोग ही गोल्डन कार्ड बनवा सके हैं। बता दें कि योजना में शामिल होने के बावजूद यदि आपने गोल्डन कार्ड नहीं बनवाया है तो योजना के तहत सरकारी या गैर सरकारी अस्पताल में इलाज मिलने में मुश्किल रहती है। जनपद में शुरू से ही लोग गोल्डन कार्ड बनवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। बीते दिनों शासन के आदेश पर गोल्डन कार्ड बनाने के लिए विशेष कैंप लगाए गए थे, मगर इसके बावजूद 70 फीसदी से अधिक पात्रों ने अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बनवाए हैं। अब कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाने में जुटे कर्मचारियों की ड्यूूटी कोविड में लगाई गई है। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य बंद है। ऐसी स्थिति में अचानक जरूरत पड़ने पर मरीज कार्ड बनवाने के लिए भटक रहे हैं।
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ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में तैनात आयुष्मान मित्रों की ड्यूटी कोविड में लगी है। इसकी वजह से सरकारी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य बंद है। मगर जिस किसी व्यक्ति को जरूरत है वह जनसेवा केंद्र से कार्ड बनवा सकता है।
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डॉ. सुशील गुप्ता, जिला कार्यक्रम समन्वयक, आयुष्मान भारत योजना।