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अभिरक्षा में ली गांगनौली शुगर मिल की चीनी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:36 AM IST
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suger mill
- फोटो : amar ujala
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सहारनपुर में समय पर गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए विभागीय कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए बुधवार को जिला गन्ना अधिकारी, गन्ना विकास समिति के सचिव और मिल के अध्यासी की संयुक्त अभिरक्षा में गांगनौली मिल की चीनी दे दी गई है।
मिल द्वारा अपने बैंकर्स से अनुबंध नहीं करने के चलते डीएम शफक्कत कमाल के आदेश पर ऐसा किया गया है। पेराई सीजन में शुरू में ही किसानों को समय पर गन्ना मूल्य देने के लिए शुगर मिलें अपने बैंकर्स से अनुबंध करती हैं।
जिससे मिल में चीनी बनने के बाद गोदाम में पहुंचते ही बैंक एक निर्धारित धनराशि को मिल के खाते में डाल देता है। जिसके 85 प्रतिशत धनराशि का प्रयोग गन्ना मूल्य भुगतान के लिए किया जाता है।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि जिले में तीन मिलों ने बैंकों के साथ अनुबंध कर लिया है। गांगनौली और शेरमऊ चीनी मिलों ने अपने बैंकों से अभी तक अनुबंध नहीं किया है।
इसलिए जिलाधिकारी के आदेश पर बुधवार देर शाम गांगनौली शुगर मिल की चीनी को संयुक्त अभिरक्षा में ले लिया गया है। अब शेरमऊ की चीनी को भी संयुक्त अभिरक्षा में लिया जाएगा।
मिल इस चीनी को जिला गन्ना अधिकारी से अनुमति लेकर ही बेचा जाएगा। इस बिक्री से प्राप्त धनराशि के 85 प्रतिशत का उपयोग किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए किया जाएगा।
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मिल द्वारा अपने बैंकर्स से अनुबंध नहीं करने के चलते डीएम शफक्कत कमाल के आदेश पर ऐसा किया गया है। पेराई सीजन में शुरू में ही किसानों को समय पर गन्ना मूल्य देने के लिए शुगर मिलें अपने बैंकर्स से अनुबंध करती हैं।
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जिससे मिल में चीनी बनने के बाद गोदाम में पहुंचते ही बैंक एक निर्धारित धनराशि को मिल के खाते में डाल देता है। जिसके 85 प्रतिशत धनराशि का प्रयोग गन्ना मूल्य भुगतान के लिए किया जाता है।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि जिले में तीन मिलों ने बैंकों के साथ अनुबंध कर लिया है। गांगनौली और शेरमऊ चीनी मिलों ने अपने बैंकों से अभी तक अनुबंध नहीं किया है।
इसलिए जिलाधिकारी के आदेश पर बुधवार देर शाम गांगनौली शुगर मिल की चीनी को संयुक्त अभिरक्षा में ले लिया गया है। अब शेरमऊ की चीनी को भी संयुक्त अभिरक्षा में लिया जाएगा।
मिल इस चीनी को जिला गन्ना अधिकारी से अनुमति लेकर ही बेचा जाएगा। इस बिक्री से प्राप्त धनराशि के 85 प्रतिशत का उपयोग किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए किया जाएगा।