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अच्छे भाव से मिली फूल उत्पादकों को राहत
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सहारनपुर। कोविड संक्रमण के दौर में आर्थिक नुकसान झेल चुके फूल उत्पादकों को अब जाकर राहत मिलनी शुरू हो गई है। दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में इस समय जरबेरा, ग्लोडियोलस और कारनेशन आदि फूलों के बढ़िया भाव चल रहे हैं। इससे फूल उत्पादकों में कोरोना काल में हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की उम्मीद जग गई है।
जनपद में करीब डेढ़ दर्जन पॉलीहाउस मेें फूलों की खेती होती है। इसमें जरबेरा, कारनेशन एवं गुलाब शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 80 हेक्टेयर रकबे में रजनीगंधा, ग्लोडियोलस और गेंदा आदि फूलों की खेती भी हो रही है। मांग की अपेक्षा इस बार उत्पादन कम होने से उत्पादकों को फूलों के अच्छे भाव मिल रहे हैं। इसका बड़ा कारण लॉकडाउन के चलते प्रदेश की सीमा से लगे उत्तराखंड के काफी पॉलीहाउस वालों ने फूलों की बजाए सब्जियों की खेती को प्राथमिकता देना बताया जा रहा है। इससे फूल उत्पादकों को अच्छे भाव मिल रहे हैं।
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बोले किसान ---
अब दाम सही मिल रहे
कोरोना के बाद अब जाकर मंडी में फूलों के भाव ठीक हुए हैं। दस फूलों वाले जरबेरा का एक बंडल का भाव 55 से 60 रुपये चल रहा है। कारनेशन के 20 फूलों के बंडल का भाव भी 300 के आसपास तक प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा अन्य फूलों के रेट भी अपेक्षाकृत अच्छे चल रहे हैं। --- अश्विनी, फूल उत्पादक।
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फूल उत्पादकों को होगा फायदा
कोविड संक्रमण के चलते करीब दो वर्षों में फूल उत्पादकों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन से शादी विवाह के साथ ही कार्यक्रम भी स्थगित हो गए थे। जिससे फूलों को परिसर में ही डंप करना पड़ा था। अब फूलों का अच्छा भाव चल रहा है। इससे पुराना घाटा दूर करने में मदद मिलेगी। ---- राजेश पंवार, फूल उत्पादक।
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एक नजर में जिले में फूलों की खेती
फूल ------------------ रकबा
गेंदा ------------------ 50 हेक्टेयर
ग्लेडियोलस ---------- 25 हेक्टेयर
रजनीगंधा ------------ 05 हेक्टेयर
पॉली हाउस में जरबेरा -- 114720 वर्ग मीटर
पॉली हाउस में गुलाब ---- 27000 वर्ग मीटर
पॉली हाउस में कारनेशन -- 8000 वर्ग मीटर
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नोट: उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार।
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जनपद में करीब डेढ़ दर्जन पॉलीहाउस मेें फूलों की खेती होती है। इसमें जरबेरा, कारनेशन एवं गुलाब शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 80 हेक्टेयर रकबे में रजनीगंधा, ग्लोडियोलस और गेंदा आदि फूलों की खेती भी हो रही है। मांग की अपेक्षा इस बार उत्पादन कम होने से उत्पादकों को फूलों के अच्छे भाव मिल रहे हैं। इसका बड़ा कारण लॉकडाउन के चलते प्रदेश की सीमा से लगे उत्तराखंड के काफी पॉलीहाउस वालों ने फूलों की बजाए सब्जियों की खेती को प्राथमिकता देना बताया जा रहा है। इससे फूल उत्पादकों को अच्छे भाव मिल रहे हैं।
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बोले किसान ---
अब दाम सही मिल रहे
कोरोना के बाद अब जाकर मंडी में फूलों के भाव ठीक हुए हैं। दस फूलों वाले जरबेरा का एक बंडल का भाव 55 से 60 रुपये चल रहा है। कारनेशन के 20 फूलों के बंडल का भाव भी 300 के आसपास तक प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा अन्य फूलों के रेट भी अपेक्षाकृत अच्छे चल रहे हैं। --- अश्विनी, फूल उत्पादक।
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फूल उत्पादकों को होगा फायदा
कोविड संक्रमण के चलते करीब दो वर्षों में फूल उत्पादकों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन से शादी विवाह के साथ ही कार्यक्रम भी स्थगित हो गए थे। जिससे फूलों को परिसर में ही डंप करना पड़ा था। अब फूलों का अच्छा भाव चल रहा है। इससे पुराना घाटा दूर करने में मदद मिलेगी। ---- राजेश पंवार, फूल उत्पादक।
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एक नजर में जिले में फूलों की खेती
फूल ------------------ रकबा
गेंदा ------------------ 50 हेक्टेयर
ग्लेडियोलस ---------- 25 हेक्टेयर
रजनीगंधा ------------ 05 हेक्टेयर
पॉली हाउस में जरबेरा -- 114720 वर्ग मीटर
पॉली हाउस में गुलाब ---- 27000 वर्ग मीटर
पॉली हाउस में कारनेशन -- 8000 वर्ग मीटर
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नोट: उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार।