{"_id":"6ade57380b83c5aec30203b7","slug":"financial-irregularity-of-rs-110-crore-at-nanauta-sugar-mill-saharanpur-news-c-30-1-sha1002-186631-2026-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: नानौता चीनी मिल में 1.10 करोड़ की वित्तीय अनियमितता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: नानौता चीनी मिल में 1.10 करोड़ की वित्तीय अनियमितता
विज्ञापन
नानौता सहकारी चीनी मिल। संवाद
- प्रशासन की जांच में खुलासा, फर्जी प्रविष्टियां और लेजर में मिली ओवरराइटिंग
- मंडलायुक्त ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को भेजा पत्र
- पुराने रिकॉर्ड का शासन स्तर या एसआईटी से विशेष ऑडिट कराने की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। नानौता किसान सहकारी चीनी मिल में ठेकेदारों के भुगतान से जुड़े लेखा अभिलेखों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रशासनिक जांच समिति को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक के उपलब्ध रिकॉर्ड के परीक्षण में कॉन्ट्रैक्टर लेजर में 70.95 लाख रुपये और अर्नेस्ट मनी लेजर में 39.33 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता मिली है। यह आंकड़ा करीब 1.10 करोड़ रुपये है। जांच समिति ने पाया कि लेजर में ओवरराइटिंग, गलत प्रारंभिक अवशेष और फर्जी प्रविष्टियों के जरिये भुगतान किया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है।
दरअसल, चीनी मिल में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), उप गन्ना आयुक्त और मुख्य लेखाधिकारी की तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ट्रेक्टर और ईएमडी लेजर की प्रविष्टियों की नियमित निगरानी नहीं हुई। लेखा प्रविष्टियों के बाद सक्षम अधिकारियों से परीक्षण नहीं कराया गया। लेजर में प्रत्येक प्रविष्टि के बाद शेष धनराशि दर्ज करने जैसे जरूरी कार्य की अनदेखी हुई। कई जगह कटिंग और ओवरराइटिंग मिली। क्रेडिट नोट बनाने के बाद भी संबंधित लेजर से मिलान नहीं हुआ। जनरल में प्रविष्टि करते समय प्रभावित पक्षों के नाम तक दर्ज नहीं किए गए।
समिति ने यह भी पाया कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर ठेकेदारों के खातों में ऋणात्मक अवशेष की समीक्षा और समायोजन नहीं किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तरह की कार्यप्रणाली से दोहरे भुगतान, वित्तीय अनियमितता और गबन की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
- वसूली के दावों और रिकॉर्ड पर भी सवाल
समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्ट्रेक्टर लेजर में दर्ज 70.95 लाख रुपये के डेबिट अवशेष के सापेक्ष जांच से पहले 31.10 लाख रुपये की वसूली या समायोजन दर्शाया गया। मिल प्रबंधन ने बाद में 24.74 लाख रुपये का अतिरिक्त समायोजन अथवा वसूली किए जाने की जानकारी दी। इसके बावजूद रिपोर्ट में 24.01 लाख रुपये की धनराशि समायोजन या वसूली के लिए शेष बताई गई। इसमें एक ठेकेदार को दिया गया 15.50 लाख रुपये का अग्रिम और पुराने निष्क्रिय खातों के 8.50 लाख रुपये के डेबिट अवशेष भी शामिल हैं। अलग-अलग माध्यमों से किए गए समायोजन की बैंक रिकॉर्ड से पूरी पुष्टि भी नहीं हो सकी।
- पूर्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
प्रशासनिक जांच शुरू होने से पहले मिल के पूर्व प्रधान प्रबंधक द्वारा मिल की तीन सदस्यीय आंतरिक समिति की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में कॉन्ट्रेक्टर लेजर में 31.53 लाख और अर्नेस्ट मनी लेजर में 39.44 लाख रुपये की अनियमित प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया था। संयुक्त जांच में लेखा अनुभाग के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताई गई। समिति ने पूर्व में तैनात मुख्य लेखाकारों की संलिप्तता की भी आशंका जताई है।
वर्जन
जांच के दौरान काफी अनियमितताएं मिली हैं। शासन को पत्र लिखा गया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके अलावा पुराने रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट और एसआईटी से भी जांच के लिए लिखा गया है। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त
विज्ञापन
- मंडलायुक्त ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को भेजा पत्र
- पुराने रिकॉर्ड का शासन स्तर या एसआईटी से विशेष ऑडिट कराने की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। नानौता किसान सहकारी चीनी मिल में ठेकेदारों के भुगतान से जुड़े लेखा अभिलेखों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रशासनिक जांच समिति को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक के उपलब्ध रिकॉर्ड के परीक्षण में कॉन्ट्रैक्टर लेजर में 70.95 लाख रुपये और अर्नेस्ट मनी लेजर में 39.33 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता मिली है। यह आंकड़ा करीब 1.10 करोड़ रुपये है। जांच समिति ने पाया कि लेजर में ओवरराइटिंग, गलत प्रारंभिक अवशेष और फर्जी प्रविष्टियों के जरिये भुगतान किया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है।
दरअसल, चीनी मिल में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), उप गन्ना आयुक्त और मुख्य लेखाधिकारी की तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ट्रेक्टर और ईएमडी लेजर की प्रविष्टियों की नियमित निगरानी नहीं हुई। लेखा प्रविष्टियों के बाद सक्षम अधिकारियों से परीक्षण नहीं कराया गया। लेजर में प्रत्येक प्रविष्टि के बाद शेष धनराशि दर्ज करने जैसे जरूरी कार्य की अनदेखी हुई। कई जगह कटिंग और ओवरराइटिंग मिली। क्रेडिट नोट बनाने के बाद भी संबंधित लेजर से मिलान नहीं हुआ। जनरल में प्रविष्टि करते समय प्रभावित पक्षों के नाम तक दर्ज नहीं किए गए।
विज्ञापन
समिति ने यह भी पाया कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर ठेकेदारों के खातों में ऋणात्मक अवशेष की समीक्षा और समायोजन नहीं किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तरह की कार्यप्रणाली से दोहरे भुगतान, वित्तीय अनियमितता और गबन की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
- वसूली के दावों और रिकॉर्ड पर भी सवाल
समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्ट्रेक्टर लेजर में दर्ज 70.95 लाख रुपये के डेबिट अवशेष के सापेक्ष जांच से पहले 31.10 लाख रुपये की वसूली या समायोजन दर्शाया गया। मिल प्रबंधन ने बाद में 24.74 लाख रुपये का अतिरिक्त समायोजन अथवा वसूली किए जाने की जानकारी दी। इसके बावजूद रिपोर्ट में 24.01 लाख रुपये की धनराशि समायोजन या वसूली के लिए शेष बताई गई। इसमें एक ठेकेदार को दिया गया 15.50 लाख रुपये का अग्रिम और पुराने निष्क्रिय खातों के 8.50 लाख रुपये के डेबिट अवशेष भी शामिल हैं। अलग-अलग माध्यमों से किए गए समायोजन की बैंक रिकॉर्ड से पूरी पुष्टि भी नहीं हो सकी।
- पूर्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
प्रशासनिक जांच शुरू होने से पहले मिल के पूर्व प्रधान प्रबंधक द्वारा मिल की तीन सदस्यीय आंतरिक समिति की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में कॉन्ट्रेक्टर लेजर में 31.53 लाख और अर्नेस्ट मनी लेजर में 39.44 लाख रुपये की अनियमित प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया था। संयुक्त जांच में लेखा अनुभाग के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताई गई। समिति ने पूर्व में तैनात मुख्य लेखाकारों की संलिप्तता की भी आशंका जताई है।
वर्जन
जांच के दौरान काफी अनियमितताएं मिली हैं। शासन को पत्र लिखा गया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके अलावा पुराने रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट और एसआईटी से भी जांच के लिए लिखा गया है। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त

नानौता सहकारी चीनी मिल। संवाद