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कर्मचारी हुए कम, काम का बोझ हुआ दोगुना
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बैंक कर्मचारी नेता संजय शर्मा
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। निजीकरण की आहट के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने सरकार के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। यूपी बैंक यूनियंस के जिलाध्यक्ष का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में बैंकों में करीब 30 फीसदी कर्मचारी कम हुए हैं, जबकि इस दौरान काम दोगुना हुआ है। बैंक कर्मचारियों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की आशंका है। उनका मानना है कि यदि बैंकों का निजीकरण हुआ तो न सिर्फ कर्मचारियों की संख्या और कम होगी बल्कि काम का लोड भी बढ़ेगा।
जनपद में बैंकों की 321 शाखाएं हैं। इनमें इस समय करीब 2500 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि पांच वर्ष पहले बैंक कर्मचारियों की संख्या लगभग चार हजार होती थी। इस दौरान बैंक कर्मचारियों का काम काफी बढ़ गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाए हुए हैं। निजीकरण के प्रयासों का विरोध किया जाएगा। - राजीव जैन, जिलाध्यक्ष यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन।
सरकार वर्तमान सत्र में बैंकिंग संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है। यदि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण हुआ तो नुकसानदेह साबित होगा। बैंकों का राष्ट्रीयकरण होने के बाद से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। बैंकों के निजीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। - संजय शर्मा, संयोजक, यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस।
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जनपद में बैंकों की 321 शाखाएं हैं। इनमें इस समय करीब 2500 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि पांच वर्ष पहले बैंक कर्मचारियों की संख्या लगभग चार हजार होती थी। इस दौरान बैंक कर्मचारियों का काम काफी बढ़ गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाए हुए हैं। निजीकरण के प्रयासों का विरोध किया जाएगा। - राजीव जैन, जिलाध्यक्ष यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन।
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सरकार वर्तमान सत्र में बैंकिंग संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है। यदि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण हुआ तो नुकसानदेह साबित होगा। बैंकों का राष्ट्रीयकरण होने के बाद से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। बैंकों के निजीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। - संजय शर्मा, संयोजक, यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस।

बैंक कर्मचारी नेता राजीव जैन- फोटो : SAHARANPUR
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