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अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस:-

Sun, 12 Feb 2023 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Feb 2023 11:30 PM IST
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Don't get caught in the upper air, treatment will cure epilepsy
जिला अस्पताल का गेट
संवाद न्यूज एजेंसी
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सहारनपुर। मिर्गी एक ऐसा रोग है, जिसका समय पर इलाज न हो तो यह खतरनाक रूप भी ले सकती है। समय से इलाज मिलने पर पीड़ित ठीक हो सकता है। ऊपरी हवा और झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़े। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में हर महीने 400 से 500 मरीज पहुंचते हैं। इनमें कई लोग तो ऐसे आते हैं जो बाबाओं और झाड़-फूंक के चक्कर में हजारों रुपये खर्च कर चुके होते हैं।

सेठ बलदेव दास बाजोरिया जिला चिकित्सालय में मानसिक रोग की ओपीडी सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलती है। इसमें हर दिन 30 से 35 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से चार से पांच ऐसे मरीज होते हैं, जो मिर्गी से पीड़ित रहते हैं। इन मरीजों को झाड़ फूंक से बचने के साथ इलाज कराने की सलाह दी जाती है, साथ ही बताया जा रहा है कि यह बीमारी लाइलाज नहीं है। एसबीडी जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ख्वाजा खयाम ने बताया कि मिर्गी की दवा सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलती हैं। इसका इलाज निरंतर कराना पड़ता है। यदि व्यक्ति एक समय की भी दवा छोड़ देता है तो दौरा पड़ने का खतरा रहता है।
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केस-1

देवबंद क्षेत्र में एक 45 साल की महिला को आवाजें सुनाई देती थीं, वह रातों को उठकर चीखती-चिल्लाती थी। अकेले में बातें करती थी। परिजन उसे ऊपरी चक्कर समझकर बाबा के यहां लेकर जाकर झाड़-फूंक करा रहे थे। किसी के कहने पर परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि महिला मिर्गी की मरीज है। इलाज मिलने से अब वह अब ठीक हो रही है।
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केस-2

तीतरों में 25 साल की एक युवती का पूरा शरीर अकड़ जाता था। घरवाले इसे ऊपरी चक्कर समझकर महीनों झाड़-फूंक के फेर में फंसे रहे। एक दिन हालत बिगड़ने पर लड़की को जिला अस्पताल में लाया गया। इलाज शुरू हुआ तो वह अब ठीक होने लगी। अभी दवा चल रही है।

--इन बातों का रखें ध्यान

-मिर्गी के रोगियों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए।

-पर्याप्त व्यायाम, स्वस्थ आहार का ध्यान रख पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।

-गंभीर स्थिति या ज्यादा अवधि के दौरे पर ही रोगी को अस्पताल में दिखाना चाहिए।

-परिवार में कोई मिर्गी रोगी है तो उसके दौरे की अवधि देखना जरूरी है।

-मिर्गी आने पर मरीज को जमीन पर या समतल स्थान पर करवट से लिटा दें

-गर्दन एक ओर मोड़ दें, ताकि मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाएं।

-मानसिक रोगी झाड़-फूंक से सही नहीं होता, उसका मनोचिकित्सक से इलाज कराएं।
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