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एकमुश्त समाधान योजना से घरेलू विद्युत उपभोक्ता बाहर
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सहारनपुर। विद्युत निगम बिजली बिल के बकाएदारों को 100 प्रतिशत सरचार्ज से राहत देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) चला रहा है, लेकिन कोरोना संक्रमण काल होने के बावजूद इस बार घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को योजना से ही बाहर कर दिया गया है। निगम की ओर से जारी निर्देशों में औद्योगिक और वाणिज्यिक संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों को ही योजना में शामिल किया गया है। यह स्थिति तब है जब कुल विद्युत उपभोक्ताओं में 65 फीसदी संख्या घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की है।
जिले में इस समय करीब साढ़े छह लाख विद्युत उपभोक्ता हैं। इनमें करीब चार लाख से अधिक उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के ही हैं। अन्य उपभोक्ता औद्योगिक और वाणिज्यिक श्रेणी के हैं। ऐसे में एकमुश्त समाधान योजना का लाभ उद्यमियों, दुकानदारों, व्यापारियों और निजी संस्थानों को ही मिल सकेगा। कोरोना काल में उद्यमियों और व्यापारियों के साथ ही आम लोगों को भी खराब आर्थिक स्थिति से गुजरना पड़ा है। हाल ही में लगाए गए समाधान शिविरों में भी अधिकतर आम उपभोक्ता ही ऐसे पहुंचे जो मीटर जंपिंग सहित अन्य तकनीकी कारणों से अधिक बिजली बिल से परेशान थे। इसके बावजूद ऐसे उपभोक्ता योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता पीके सिंह के मुताबिक अभी तक मिले निर्देशों में औद्योगिक और वाणिज्यिक संस्थानों के बारे में ही निर्देश हैं। बाकी के बारे में कुछ दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
31 जनवरी तक चलेगी योजना
- विद्युत निगम की ओर से राजस्व वसूली बढ़ाने और बिजली बिलों में राहत के लिए एकमुश्त समाधान योजना 15 दिसंबर से 31 जनवरी तक चलाई जा रही है। इस अवधि में नवंबर माह तक के बिजली बिलों पर 100 प्रतिशत सरचार्ज माफी के साथ बिल जमा कराए जा सकेंगे। यदि किसी का बकाया बिल 30 हजार रुपये के आसपास है तो सरचार्ज माफी के बाद तीन से चार हजार रुपये तक की राहत मिलती रही है।
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गरीब लोगों के बड़े बिलों पर हो चुके हंगामे
- पिछले दिनों गरीबों के अधिक बिजली बिलों को लेकर काफी हंगामे हुए। मंडी समिति रोड, जनक नगर, हुसैन बस्ती, हकीकत नगर सहित अन्य इलाकों में ऐसे मामले आए थे। नगर निगम के पार्षदों और ग्राम प्रधानों ने भी आरोप लगाए थे, कि एक बल्ब और दो पंखे वाले उपभोक्ताओं के घर भी 7000 से 25 हजार रुपये तक के बिल भिजवा दिए गए। निगम के पार्षद मंसूर बदर और चंद्रजीत सिंह का कहना है कि आम और घरेलू उपभोक्ताओं को भी योजना का लाभ दिया जाना चाहिए।
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जिले में इस समय करीब साढ़े छह लाख विद्युत उपभोक्ता हैं। इनमें करीब चार लाख से अधिक उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के ही हैं। अन्य उपभोक्ता औद्योगिक और वाणिज्यिक श्रेणी के हैं। ऐसे में एकमुश्त समाधान योजना का लाभ उद्यमियों, दुकानदारों, व्यापारियों और निजी संस्थानों को ही मिल सकेगा। कोरोना काल में उद्यमियों और व्यापारियों के साथ ही आम लोगों को भी खराब आर्थिक स्थिति से गुजरना पड़ा है। हाल ही में लगाए गए समाधान शिविरों में भी अधिकतर आम उपभोक्ता ही ऐसे पहुंचे जो मीटर जंपिंग सहित अन्य तकनीकी कारणों से अधिक बिजली बिल से परेशान थे। इसके बावजूद ऐसे उपभोक्ता योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता पीके सिंह के मुताबिक अभी तक मिले निर्देशों में औद्योगिक और वाणिज्यिक संस्थानों के बारे में ही निर्देश हैं। बाकी के बारे में कुछ दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
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31 जनवरी तक चलेगी योजना
- विद्युत निगम की ओर से राजस्व वसूली बढ़ाने और बिजली बिलों में राहत के लिए एकमुश्त समाधान योजना 15 दिसंबर से 31 जनवरी तक चलाई जा रही है। इस अवधि में नवंबर माह तक के बिजली बिलों पर 100 प्रतिशत सरचार्ज माफी के साथ बिल जमा कराए जा सकेंगे। यदि किसी का बकाया बिल 30 हजार रुपये के आसपास है तो सरचार्ज माफी के बाद तीन से चार हजार रुपये तक की राहत मिलती रही है।
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गरीब लोगों के बड़े बिलों पर हो चुके हंगामे
- पिछले दिनों गरीबों के अधिक बिजली बिलों को लेकर काफी हंगामे हुए। मंडी समिति रोड, जनक नगर, हुसैन बस्ती, हकीकत नगर सहित अन्य इलाकों में ऐसे मामले आए थे। नगर निगम के पार्षदों और ग्राम प्रधानों ने भी आरोप लगाए थे, कि एक बल्ब और दो पंखे वाले उपभोक्ताओं के घर भी 7000 से 25 हजार रुपये तक के बिल भिजवा दिए गए। निगम के पार्षद मंसूर बदर और चंद्रजीत सिंह का कहना है कि आम और घरेलू उपभोक्ताओं को भी योजना का लाभ दिया जाना चाहिए।