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जिला अस्पताल लाइव- बेड पर कुत्ते, फर्श पर मरीज के तिमारदार

Wed, 08 Jan 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 11:39 PM IST
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Dog on bed, patient on the floor
जिला अस्पताल में पर्ची काउंटर के बाहर फर्श पर रात बिताते लोग। - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल में सर्दियों की रात तीमारदारों पर भारी पड़ रही हैं। इसकी प्रमुख वजह रैन बसेरे की हालत खराब होना है। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार की रात में बरसात और ठंड के बीच जिला अस्पताल का दौरा कर ठंड में तीमारदारों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया, तो हकीकत अधिकारियों के दावों से उलट नजर आई। कहीं रैन बसेरे में अंधेरा छाया मिला और बेड बिना गद्दों के पड़े मिले तो कहीं रैन बसेरे के बेड पर एक नहीं, तीन-तीन कुत्ते आराम करते मिले। मरीज के तिमारदार फर्श पर खुले में रात बिताते नजर आए, जिन्हें हमने अपने कैमरे में कैद करने का प्रयास किया।
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अमर उजाला की टीम मंगलवार की रात में करीब साढ़े दस बजे जिला अस्पताल में पहुंची। वहां की सर्जिकल वार्ड के ठीक सामने बने रैन बसेरे में अंधेरा मिला। रैन बसेरे के साथ ही सामने का पूरा परिसर अंधकार में डूबा मिला। रैन बसेरे के भीतर लोहे के चार बेड पड़े मिले, जिन से गद्दे और चादरें नदारद रहीं। रैन बसेरे पर टीनशेड की छत तो है, मगर वह चारों ओर से खुला होने से ठंड पूरा असर कर रही थी। साथ ही बारिश से अंदर का पूरा फर्श पानी-पानी नजर आया। किसी भी तीमारदार खासकर महिलाओं के लिए अंधेरे से भरे ऐसे रैन बसेरे में रात तो दूर की बात दिन भी गुजाना मुमकिन नहीं हो सकता। सर्जिकल वार्ड के तीमारदार बरामदे में फर्श पर लेटे नजर आए, इनमें पुरुष और महिलाओं के साथ ही कुछ बच्चे भी रहे।
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हड्डी वार्ड के सामने खाली पड़े परिसर में एक छोटा रैन बसेरा बनाया, जो टीनशेड डालकर बनाया है। उक्त रैन बसेरे भी चारों ओर से खुला है, इसमें तीन बेड मिले, इनमें से एक पर गद्दा बिछा मिला, जबकि दो बिना गद्दे के मिले। यहां कुछ तीमारदार कचरा जलाकर ठंड दूर करते मिले। इसके बाद अमर उजाला की टीम इमरजेंसी के बाहर बना रैन बसेरा देखने पहुंची। रैन बसेरे में ठंड को घुसने से रोकने के लिए पॉलीथिन लटकाई गई है। अंदर करीब 15 बेड डाले हैं, इन पर गद्दे और चादरें बिछी मिलीं। अंदर का नजारा हैरान करने वाला था। यहां गद्दों पर इंसान की बजाय कुत्ते आराम फरमाते नजर आए। इतना ही नहीं, पर्ची के लिए बने काउंटर के सामने डली टीनशेड में भी कई तीमारदार फर्श पर रात बिताते दिखे।
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कैमरे के सामने नहीं आए तीमारदार
अमर उजाला की टीम ने बेहाली पर तीमारदारों से बात करने का प्रयास किया, मगर वह कैमरे के सामने नहीं आए। उनका कहना था कि उनके मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। यदि वह कैमरे के सामने आएंगे या अखबार में नाम प्रकाशित कराएंगे तो मरीज को परेशानी हो सकती है। उन्होंने यह जरूर बताया कि अस्पताल का स्टाफ वार्ड में लेटने के लिए मना करता है, मगर रैन बसेरों में सुविधाएं मिलती नहीं हैं। अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था भी नहीं है, जिसके सहारे रात गुजारी जा सके।
तीमारदारों के लिए अस्पताल में तीन रैन बसेरे हैं, जो इमरजेंसी, सर्जिकल वार्ड और हड्डी वार्ड के सामने हैं। रैन बसेरों में तीमारदारों को पर्याप्त सुविधाएं दी जा रही हैं। मरीजों के लिए बेड डाले हैं। सर्दी से बचने को अलाव की भी व्यवस्था की गई है।

डॉ. एसके वार्ष्णेय, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।

सर्जिकल वार्ड के बरामदे में फर्श पर लगा बिस्तरा।

सर्जिकल वार्ड के बरामदे में फर्श पर लगा बिस्तरा।- फोटो : SAHARANPUR

इमरजेंसी के बाहर बने रैन बसेरे में बिस्तरों पर आराम फरमाते कुत्ते।

इमरजेंसी के बाहर बने रैन बसेरे में बिस्तरों पर आराम फरमाते कुत्ते।- फोटो : SAHARANPUR

सर्जिकल वार्ड के बाहर बने रैन बसेरे में पसरा अंधेरा और बिना गद्दों के डाले गए बेड।

सर्जिकल वार्ड के बाहर बने रैन बसेरे में पसरा अंधेरा और बिना गद्दों के डाले गए बेड।- फोटो : SAHARANPUR

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