{"_id":"633f1bddbbc2492fa16be93a","slug":"do-not-rely-on-ns-one-card-test-to-be-dengue-saharanpur-news-mrt6084729200","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनएस-वन कार्ड जांच पर न करें डेंगू होने का भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनएस-वन कार्ड जांच पर न करें डेंगू होने का भरोसा
विज्ञापन
सहारनपुर। डेंगू के बढ़ते मरीजों के बीच कुछ अस्पताल एनएस-वन एंटीजन रैपिड कार्ड से जांच कर रहे हैं। मरीज इस कार्ड पर ज्यादा भरोसा न करें। नेगेटिव के बाद भी डेंगू हो सकता है। सीएमओ ने साफ किया कि डेंगू की जांच एलाइजा से ही करानी चाहिए। क्योंकि यह 99 फीसदी सही है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जनपद में अभी तक 30 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। विभाग का दावा है कि जिन लोगों में डेंगू के लक्षण मिले, वह स्वस्थ हैं। इस बीच कुछ निजी अस्पतालों ने डेंगू की जांच के नाम पर कमाने में जुट गए हैं। यह अस्पताल डेंगू की जांच एनएस वन एंटीजन रैपिड कार्ड से कर रहे हैं, जिसे स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता है। यही नहीं डेंगू के मरीजों की जानकारी विभाग को भी नहीं दी जा रही है। ऐसे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक ने सख्त निर्देश दिए कि एलाइजा जांच करें। क्योंकि, एंटीजन रैपिड कार्ड ज्यादा भरोसा करने लायक नहीं है और इसे हम मानते भी नहीं है। अगर कोई अस्पताल कार्ड से डेंगू की जांच कर रहा है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यह है एनएस-वन कार्ड
एनएस-वन कार्ड रैपिड किट की तरह काम करता है। सैंपल डालने पर करीब आधे घंटे के भीतर यह रिपोर्ट बताती है। नेगेटिव रिपोर्ट के आधार पर डेंगू की पुष्टि हो जाती है, जबकि इस पर ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
एलाइजा जांच
एलाइजा जांच प्रमाणिक है। इसकी जांच मशीन से होती है। जांच में लगभग छह घंटे का समय लगता है। एलाइजा जांच एसबीडी जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में होती है। विभाग भी मशीन के जरिए होनी वाली जांच को मानता है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जनपद में अभी तक 30 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। विभाग का दावा है कि जिन लोगों में डेंगू के लक्षण मिले, वह स्वस्थ हैं। इस बीच कुछ निजी अस्पतालों ने डेंगू की जांच के नाम पर कमाने में जुट गए हैं। यह अस्पताल डेंगू की जांच एनएस वन एंटीजन रैपिड कार्ड से कर रहे हैं, जिसे स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता है। यही नहीं डेंगू के मरीजों की जानकारी विभाग को भी नहीं दी जा रही है। ऐसे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक ने सख्त निर्देश दिए कि एलाइजा जांच करें। क्योंकि, एंटीजन रैपिड कार्ड ज्यादा भरोसा करने लायक नहीं है और इसे हम मानते भी नहीं है। अगर कोई अस्पताल कार्ड से डेंगू की जांच कर रहा है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
यह है एनएस-वन कार्ड
एनएस-वन कार्ड रैपिड किट की तरह काम करता है। सैंपल डालने पर करीब आधे घंटे के भीतर यह रिपोर्ट बताती है। नेगेटिव रिपोर्ट के आधार पर डेंगू की पुष्टि हो जाती है, जबकि इस पर ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
एलाइजा जांच
एलाइजा जांच प्रमाणिक है। इसकी जांच मशीन से होती है। जांच में लगभग छह घंटे का समय लगता है। एलाइजा जांच एसबीडी जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में होती है। विभाग भी मशीन के जरिए होनी वाली जांच को मानता है।