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Saharanpur News: बर्खास्त सिपाही और इलेक्ट्रीशियन ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
Fri, 13 Dec 2024 12:29 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 13 Dec 2024 12:29 AM IST
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सहारनपुर। मुजफ्फरनगर के फुगाना निवासी बर्खास्त सिपाही और रुड़की निवासी इलेक्ट्रीशियन ने गैंगस्टर के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। दोनों को पिछले दिनों गैंगस्टर के मामले में तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में दोनों ने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इंसाफ मांगा है।
दरअसल, पिछले दिनों विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट की अदालत ने फुगाना निवासी बर्खास्त सिपाही सतेंद्र मलिक और रुड़की निवासी नरेंद्र गिरि को सजा सुनाई थी। इनके अधिवक्ता ने अदालत में दावा किया था कि वर्ष 2002 में थाना जनकपुरी और देहात कोतवाली में तैनात रहे निरीक्षक ने कई मामलों में सतेंद्र मलिक को षड्यंत्र के तहत फंसा दिया था, जिसके बाद सतेंद्र को पुलिस महकमे से बर्खास्त कराया गया था।
इसी तरह वर्ष 2002 में ही टोडरपुर पुलिस चौकी पर तैनात उपनिरीक्षक बिजली से संबंधित अपने कार्य इलेक्ट्रीशियन नरेंद्र गिरि निवासी रुड़की से कराता था। दरोगा का देहात कोतवाली में स्थानांतरण हो गया था। नरेंद्र ने दरोगा से उसके द्वारा किए कार्यों के रुपये मांगे थे। इसी दौरान जनता रोड पर एक व्यक्ति को गोली मारी गई थी, जिसमें उस व्यक्ति की जान बच गई थी। दरोगा ने रुपये देने को नरेंद्र को देहात कोतवाली बुलाया था। आरोप है कि रातभर नरेंद्र के थाने बैठाए रखा और गोलीकांड केस में नाम खोलते हुए सतेंद्र मलिक को गिरोह सरगना बना दिया।
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दोनों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए थे। सतेंद्र और नरेंद्र सभी मामलों में बरी हो चुके हैं। गैंगस्टर के मामले में दोनों को सजा हुई है। इसी मामले के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दायर की है।
आरोप लगाया है कि षड्यंत्र और रंजिश के तहत पुलिसकर्मियों ने उन्हें फंसाया है। दोनों ने हाईकोर्ट से मामला खत्म करने की मांग की है।
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दरअसल, पिछले दिनों विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट की अदालत ने फुगाना निवासी बर्खास्त सिपाही सतेंद्र मलिक और रुड़की निवासी नरेंद्र गिरि को सजा सुनाई थी। इनके अधिवक्ता ने अदालत में दावा किया था कि वर्ष 2002 में थाना जनकपुरी और देहात कोतवाली में तैनात रहे निरीक्षक ने कई मामलों में सतेंद्र मलिक को षड्यंत्र के तहत फंसा दिया था, जिसके बाद सतेंद्र को पुलिस महकमे से बर्खास्त कराया गया था।
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इसी तरह वर्ष 2002 में ही टोडरपुर पुलिस चौकी पर तैनात उपनिरीक्षक बिजली से संबंधित अपने कार्य इलेक्ट्रीशियन नरेंद्र गिरि निवासी रुड़की से कराता था। दरोगा का देहात कोतवाली में स्थानांतरण हो गया था। नरेंद्र ने दरोगा से उसके द्वारा किए कार्यों के रुपये मांगे थे। इसी दौरान जनता रोड पर एक व्यक्ति को गोली मारी गई थी, जिसमें उस व्यक्ति की जान बच गई थी। दरोगा ने रुपये देने को नरेंद्र को देहात कोतवाली बुलाया था। आरोप है कि रातभर नरेंद्र के थाने बैठाए रखा और गोलीकांड केस में नाम खोलते हुए सतेंद्र मलिक को गिरोह सरगना बना दिया।
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दोनों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए थे। सतेंद्र और नरेंद्र सभी मामलों में बरी हो चुके हैं। गैंगस्टर के मामले में दोनों को सजा हुई है। इसी मामले के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दायर की है।
आरोप लगाया है कि षड्यंत्र और रंजिश के तहत पुलिसकर्मियों ने उन्हें फंसाया है। दोनों ने हाईकोर्ट से मामला खत्म करने की मांग की है।