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दो करोड़ खर्च के बावजूद बदहाल जनमंच
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:08 AM IST
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सहारनपुर का जनमंच।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में जनमंच प्रेक्षागृह के मामले में नगर निगम की इंजीनियरिंग फेल रही है। इसे जनता के पैसे की बर्बादी भी कहा जा सकता है। दरअसल, नगर निगम ने करीब दो वर्ष पहले जनमंच की जीर्णोद्घार पर दो करोड़ रुपये खर्च किए थे, मगर मुख्य छत को दुरुस्त करना भूल गया।
नतीजा, कुछ ही महीने बाद जनमंच की छत टपकने लगी। अब नगर निगम ने फिर से जनमंच के जीर्णोद्घार के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
जनमंच प्रेक्षागृह इकलौता ऐसा सभागार है, जो शहर के बीच में है और हजारों लोगों की उसमें बैठने की क्षमता है। मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम से लेकर पूर्व की सरकारों के भी अनेक कार्यक्रम इस प्रेक्षागृह में हुए हैं।
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डॉ. नीरज शुक्ला के नगरायुक्त रहते करीब दो साल पहले कई महीने तक जनमंच प्रेक्षागृह का जीर्णोद्घार किया गया। इसके तहत जनमंच में आर्ट गैलरी का निर्माण किया गया। स्थाई जनरेटर की व्यवस्था की गई। कुर्सियां ठीक की गईं। एसी लगाए गए।
साथ ही मंच के बेस पर टाइल्स बिछाई गईं। इतना ही नहीं, जनमंच के फ्रंट का सुंदरीकरण किया गया। काम के बाद नगर निगम के अधिकारी खुद ही अपनी पीठ थपथपाते रहे, मगर जीर्णोद्घार के करीब छह महीने बाद बरसात ने जीर्णोद्घार की पोल खोल दी।
जनमंच की छत एक नहीं अनेक जगहों से टपकने लगी, जिससे दर्शकों को बचने के लिए कुर्सियां बदलकर बैठना पड़ा। इतना ही नहीं इससे भी बुरा यह हुआ कि मंच पर मौजूद कलाकारों के सिर पर पानी पड़ने लगा। ऐसे में कार्यक्रम बाधित हुआ।
पूर्व की खामियों को छिपाने के लिए नगर निगम ने फिर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। जीर्णोद्घार में पूर्व में किए गए सभी कार्यों जैसे दीवारों पर लटके एसी हटा दिए गए हैं।
टीन के नीचे बनाई गई छत को पूरी तरह गिरा दिया गया है। जिससे भीतर कचरा ही कचरा फैला है। मौजूदा अधिकारियों का कहना है कि यदि पूर्व के अधिकारी और इंजीनियर सही से काम करते तो दोबारा पैसा खर्च न करना पड़ता।
दिल्ली की एजेंसी और मुंबई के कारीगर कर रहे काम
जनमंच के पुन: जीर्णोद्घार का ठेका दिल्ली की एक एजेंसी को दिया गया है। जिसने मुंबई के कारीगरों को काम पर लगाया है। जनमंच के अंदर के दरवाजे बंद कर काम किया जा रहा है। कारीगरों के ठेकेदार ने बताया कि वह देश भर के अनेक बड़े शहरों में मॉल आदि तैयार कर चुके हैं। पहले एसी दीवारों पर लगाए गए थे, जिन्हें छत के भीतर किया जा रहा है। सभी गद्दे की कुर्सियां बदली जानी हैं। मंच पर भी काम होगा। साथ ही भीतर की दीवारों का सुंदरीकरण किया जाना है। जीर्णोद्घार में पांच से छह महीने का समय लगेगा।
जनमंच प्रेक्षागृह में कुछ कमियां थीं, जिनको दूर कराया जा रहा है। एसी को दीवारों से हटाकर छत के भीतर लगाया जा रहा है, जिससे पूरे सभागार में बराबर ठंडक पहुंच सके। साथ ही सभी कुर्सियां भी बदली जानी हैं और अन्य कार्य भी होने हैं। इन कार्यों के लिए एक से डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
जितेंद्र केन, चीफ इंजीनियर, नगर निगम।
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नतीजा, कुछ ही महीने बाद जनमंच की छत टपकने लगी। अब नगर निगम ने फिर से जनमंच के जीर्णोद्घार के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
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जनमंच प्रेक्षागृह इकलौता ऐसा सभागार है, जो शहर के बीच में है और हजारों लोगों की उसमें बैठने की क्षमता है। मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम से लेकर पूर्व की सरकारों के भी अनेक कार्यक्रम इस प्रेक्षागृह में हुए हैं।
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डॉ. नीरज शुक्ला के नगरायुक्त रहते करीब दो साल पहले कई महीने तक जनमंच प्रेक्षागृह का जीर्णोद्घार किया गया। इसके तहत जनमंच में आर्ट गैलरी का निर्माण किया गया। स्थाई जनरेटर की व्यवस्था की गई। कुर्सियां ठीक की गईं। एसी लगाए गए।
साथ ही मंच के बेस पर टाइल्स बिछाई गईं। इतना ही नहीं, जनमंच के फ्रंट का सुंदरीकरण किया गया। काम के बाद नगर निगम के अधिकारी खुद ही अपनी पीठ थपथपाते रहे, मगर जीर्णोद्घार के करीब छह महीने बाद बरसात ने जीर्णोद्घार की पोल खोल दी।
जनमंच की छत एक नहीं अनेक जगहों से टपकने लगी, जिससे दर्शकों को बचने के लिए कुर्सियां बदलकर बैठना पड़ा। इतना ही नहीं इससे भी बुरा यह हुआ कि मंच पर मौजूद कलाकारों के सिर पर पानी पड़ने लगा। ऐसे में कार्यक्रम बाधित हुआ।
पूर्व की खामियों को छिपाने के लिए नगर निगम ने फिर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। जीर्णोद्घार में पूर्व में किए गए सभी कार्यों जैसे दीवारों पर लटके एसी हटा दिए गए हैं।
टीन के नीचे बनाई गई छत को पूरी तरह गिरा दिया गया है। जिससे भीतर कचरा ही कचरा फैला है। मौजूदा अधिकारियों का कहना है कि यदि पूर्व के अधिकारी और इंजीनियर सही से काम करते तो दोबारा पैसा खर्च न करना पड़ता।
दिल्ली की एजेंसी और मुंबई के कारीगर कर रहे काम
जनमंच के पुन: जीर्णोद्घार का ठेका दिल्ली की एक एजेंसी को दिया गया है। जिसने मुंबई के कारीगरों को काम पर लगाया है। जनमंच के अंदर के दरवाजे बंद कर काम किया जा रहा है। कारीगरों के ठेकेदार ने बताया कि वह देश भर के अनेक बड़े शहरों में मॉल आदि तैयार कर चुके हैं। पहले एसी दीवारों पर लगाए गए थे, जिन्हें छत के भीतर किया जा रहा है। सभी गद्दे की कुर्सियां बदली जानी हैं। मंच पर भी काम होगा। साथ ही भीतर की दीवारों का सुंदरीकरण किया जाना है। जीर्णोद्घार में पांच से छह महीने का समय लगेगा।
जनमंच प्रेक्षागृह में कुछ कमियां थीं, जिनको दूर कराया जा रहा है। एसी को दीवारों से हटाकर छत के भीतर लगाया जा रहा है, जिससे पूरे सभागार में बराबर ठंडक पहुंच सके। साथ ही सभी कुर्सियां भी बदली जानी हैं और अन्य कार्य भी होने हैं। इन कार्यों के लिए एक से डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
जितेंद्र केन, चीफ इंजीनियर, नगर निगम।