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यात्रियों के अभाव में निगम के लिए बसें चलाना घाटे का सौदा
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छुटमलपुर डिपो में खड़ी रोडवेज की बसें
- फोटो : SAHARANPUR
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छुटमलपुर (सहारनपुर)। केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार अनलॉक वन में उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें तो सड़कों पर दौड़नी शुरू हो गई हैं, लेकिन सवारियों के अभाव में इनका संचालन निगम के लिए भारी घाटे का सौदा साबित हो रहा है। बस संचालन में छुटमलपुर डिपो को ही पहले पखवाड़े में सत्तर लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। ऐसा तब है जब यह डिपो आय के मामले में लॉकडाउन से पहले पूरे प्रदेश में टॉप टेन में शुमार था।
छुटमलपुर डिपो में 67 बसों का बेड़ा है। इंटर स्टेट बसें चलाने की बाध्यता के चलते डिपो के शिमला, पीलीभीत, देहरादून, हरिद्वार, करनाल, कुरुक्षेत्र, दिल्ली आदि महत्वपूर्ण रूट बंद हैं। इसके चलते अनलॉक वन के शुरुआती दिनों में चलाई गई 35 बसों में से घट कर 14 का ही संचालन रह गया। इन बसों को भी सवारियां नहीं मिल रहीं हैं। सामान्य दिनों में सत्तर फीसदी लोड फैक्टर देने वाली निगम की बसें फिलहाल बीस से 31 फीसदी लोड फैक्टर ही दे पा रही हैं। इसका नतीजा है कि लॉक डाउन से पहले आठ लाख रुपये राजस्व एकत्र करने वाले डिपो का शनिवार को राजस्व केवल दो लाख रुपये रहा। वरिष्ठ केंद्र प्रभारी दिनेश कुमार के अनुसार तीन से चार हजार रुपये प्रतिदिन सैनिटाइजेशन में भी खर्च हो रहे हैं। उनका कहना है कि बसों का संचालन पूरी तरह घाटे में चल रहा है।
पहले पखवाड़े में ही 70 लाख रुपये का नुकसान
लॉक डाउन से पहले छुटमलपुर डिपो की प्रतिदिन औसतन बचत अस्सी हजार रुपये थी। अनलॉक वन में सवारी नहीं मिलने के कारण अब प्रतिदिन औसतन पांच लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में पहले पखवाड़े में ही छुटमलपुर डिपो से निगम को 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। दूसरे राज्य के रूट खुलने के बाद ही स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
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- प्रेम सिंह , सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम।
चालक और परिचालक न मिलने से घटी बसों की संख्या
छुटमलपुर। छुटमलपुर डिपो में संविदा पर 124 चालक, 117 परिचालक, स्थायी 32 चालक और 19 परिचालक तैनात हैं। इनमें से कुछ ही परिचालक ही ड्यूटी पर पहुंच रहे हैं। डिपो इंचार्ज दिनेश कुमार ने बताया कि इसके चलते कम बसें ही रूट पर निकाली जा रहीं हैं। संविदा कर्मचारी यूनियन के शाखा मंत्री अस्तपाल सिंह कहते हैं कि वेतन कम मिलने के साथ ही संविदा कर्मचारियों का उत्पीड़न भी हो रहा है। हालांकि डिपो इंचार्ज उत्पीड़न के आरोपों को नकारते हैं। जबकि निगम के एआरएम प्रेम सिंह ने बताया वे नियमित रुप से संविदा कर्मियों को आने के लिए व्हाट्स एप पर सूचना दे रहे हैं।
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छुटमलपुर डिपो में 67 बसों का बेड़ा है। इंटर स्टेट बसें चलाने की बाध्यता के चलते डिपो के शिमला, पीलीभीत, देहरादून, हरिद्वार, करनाल, कुरुक्षेत्र, दिल्ली आदि महत्वपूर्ण रूट बंद हैं। इसके चलते अनलॉक वन के शुरुआती दिनों में चलाई गई 35 बसों में से घट कर 14 का ही संचालन रह गया। इन बसों को भी सवारियां नहीं मिल रहीं हैं। सामान्य दिनों में सत्तर फीसदी लोड फैक्टर देने वाली निगम की बसें फिलहाल बीस से 31 फीसदी लोड फैक्टर ही दे पा रही हैं। इसका नतीजा है कि लॉक डाउन से पहले आठ लाख रुपये राजस्व एकत्र करने वाले डिपो का शनिवार को राजस्व केवल दो लाख रुपये रहा। वरिष्ठ केंद्र प्रभारी दिनेश कुमार के अनुसार तीन से चार हजार रुपये प्रतिदिन सैनिटाइजेशन में भी खर्च हो रहे हैं। उनका कहना है कि बसों का संचालन पूरी तरह घाटे में चल रहा है।
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पहले पखवाड़े में ही 70 लाख रुपये का नुकसान
लॉक डाउन से पहले छुटमलपुर डिपो की प्रतिदिन औसतन बचत अस्सी हजार रुपये थी। अनलॉक वन में सवारी नहीं मिलने के कारण अब प्रतिदिन औसतन पांच लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में पहले पखवाड़े में ही छुटमलपुर डिपो से निगम को 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। दूसरे राज्य के रूट खुलने के बाद ही स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
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- प्रेम सिंह , सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम।
चालक और परिचालक न मिलने से घटी बसों की संख्या
छुटमलपुर। छुटमलपुर डिपो में संविदा पर 124 चालक, 117 परिचालक, स्थायी 32 चालक और 19 परिचालक तैनात हैं। इनमें से कुछ ही परिचालक ही ड्यूटी पर पहुंच रहे हैं। डिपो इंचार्ज दिनेश कुमार ने बताया कि इसके चलते कम बसें ही रूट पर निकाली जा रहीं हैं। संविदा कर्मचारी यूनियन के शाखा मंत्री अस्तपाल सिंह कहते हैं कि वेतन कम मिलने के साथ ही संविदा कर्मचारियों का उत्पीड़न भी हो रहा है। हालांकि डिपो इंचार्ज उत्पीड़न के आरोपों को नकारते हैं। जबकि निगम के एआरएम प्रेम सिंह ने बताया वे नियमित रुप से संविदा कर्मियों को आने के लिए व्हाट्स एप पर सूचना दे रहे हैं।

उप्र राज्य सड़क परिवहन के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक प्रेम सिंह- फोटो : SAHARANPUR