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Saharanpur News: तहसील भवन की सपोर्ट बीम में दरारें, गुणवत्ता पर संतोष की मुहर
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रामपुर मनिहारान तहसील भवन का निरीक्षण करती आईआईटी बीएचयू की टीम।
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नौ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रामपुर मनिहारान के तहसील भवन का आईआईटी बनारस हिंदू विवि के सिविल इंजीनियर विभाग ने निरीक्षण किया। सपोर्ट बीम सहित कई जगहों पर दरारें मिली हैं। इसके बावजूद टीम ने भवन के ढांचे पर संतुष्टि की मुहर लगाई है। हालांकि कई सुझाव भी कार्यदायी संस्था के लिए छोड़े हैं।
नवनिर्मित तहसील भवन अपने निर्माण के समय से ही गुणवत्ता को लेकर लगातार सवालों के घेरे में रहा है। पहले तो जमीन के चयन को लेकर ही कई बार सवाल उठाए गए। इसके बाद जब इमारत का निर्माण तकरीबन पूरा हो गया तो कई जगह दरारें आने के बाद गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे। तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सीडीओ को तहसील भवन की जांच समिति गठित कराने के भी निर्देश दिए थे। इसके अलावा भवन की इमारत और अन्य कार्यों की जांच थर्ड पार्टी से कराई गई। इसमें आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की विशेषज्ञों की टीम शामिल रही।
टीम ने पूरी इमारत का गहनता से निरीक्षण किया। इसके बाद अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ज्यादातर निर्माण कार्य पूरा है। एसडीएम और तहसीलदार कक्षों में सपोर्ट बीम स्तर पर दरारें पाई गई हैं। साथ ही कुछ स्थानों पर फर्श बैठने की समस्या भी टीम को मिली है। गहराई होने के चलते ढाई से तीन मीटर मिट्टी का भराव कराया गया।
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टीम ने भवन की मजबूती के लिए सपोर्ट बीम या ग्रिड स्लैब लगाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इमारत की संरचना ड्राइंग के अनुसार उचित पाई गई। टीम ने बाउंड्री वाॅल का निर्माण का निरीक्षण किया।
कुछ स्थानों पर अनधिकृत दुकानें पाईं गई, जो डिजाइन के अनुरूप नहीं थीं। टीम ने इन्हें हटाने के संस्तुति की है। जबकि संरचना इस भार को सहन करने की डिजाइन नहीं है।
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सहारनपुर। नौ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रामपुर मनिहारान के तहसील भवन का आईआईटी बनारस हिंदू विवि के सिविल इंजीनियर विभाग ने निरीक्षण किया। सपोर्ट बीम सहित कई जगहों पर दरारें मिली हैं। इसके बावजूद टीम ने भवन के ढांचे पर संतुष्टि की मुहर लगाई है। हालांकि कई सुझाव भी कार्यदायी संस्था के लिए छोड़े हैं।
नवनिर्मित तहसील भवन अपने निर्माण के समय से ही गुणवत्ता को लेकर लगातार सवालों के घेरे में रहा है। पहले तो जमीन के चयन को लेकर ही कई बार सवाल उठाए गए। इसके बाद जब इमारत का निर्माण तकरीबन पूरा हो गया तो कई जगह दरारें आने के बाद गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे। तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सीडीओ को तहसील भवन की जांच समिति गठित कराने के भी निर्देश दिए थे। इसके अलावा भवन की इमारत और अन्य कार्यों की जांच थर्ड पार्टी से कराई गई। इसमें आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की विशेषज्ञों की टीम शामिल रही।
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टीम ने पूरी इमारत का गहनता से निरीक्षण किया। इसके बाद अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ज्यादातर निर्माण कार्य पूरा है। एसडीएम और तहसीलदार कक्षों में सपोर्ट बीम स्तर पर दरारें पाई गई हैं। साथ ही कुछ स्थानों पर फर्श बैठने की समस्या भी टीम को मिली है। गहराई होने के चलते ढाई से तीन मीटर मिट्टी का भराव कराया गया।
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टीम ने भवन की मजबूती के लिए सपोर्ट बीम या ग्रिड स्लैब लगाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इमारत की संरचना ड्राइंग के अनुसार उचित पाई गई। टीम ने बाउंड्री वाॅल का निर्माण का निरीक्षण किया।
कुछ स्थानों पर अनधिकृत दुकानें पाईं गई, जो डिजाइन के अनुरूप नहीं थीं। टीम ने इन्हें हटाने के संस्तुति की है। जबकि संरचना इस भार को सहन करने की डिजाइन नहीं है।