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सहारनपुर: चॉकलेट से बनेगी मवेशियों की सेहत
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर है। जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक युवाओं को पशु चॉकलेट बनाने का प्रशिक्षण देंगे। पोषक तत्वों से भरपूर यह चॉकलेट पशुओं के स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक सिद्घ होगी। प्रशिक्षण के बाद युवा इसे स्वरोजगार के रूप में भी अपना सकते हैं।
पोषक तत्वों की कमी के चलते कई बार पशुओं में दूध उत्पादन से लेकर उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। इसे देखते हुए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली ने एक चॉकलेट विकसित की है। इसे यूरिया, मोलासिस,मिनरल ब्लाक (यूएमएमबी) के नाम से जाना जाता है। इस चॉकलेट को गेहूं के चौकर, शीरा, सरसों की खली, यूरिया, कैल्सियम, फॉस्फोरस, मैग्नीजियम,जिंक, कॉपर आदि के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
एक पशु को 500 से 600 ग्राम चॉकलेट प्रति सप्ताह देना पर्याप्त रहता है। इससे पशु की अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता पूरी हो जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक युवाओं को इस चॉकलेट को बनाने का प्रशिक्षण देंगे। जिससे न सिर्फ पशुपालकों को पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर पोषक तत्वों से भरपूर चॉकलेट मिल सकेंगी बल्कि युवा इसे स्वरोजगार के रूप में भी अपना सकते हैं।
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वर्जन ....
युवाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण
पशु चॉकलेट बनाने के लिए युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम 14 से 18 फरवरी तक चलेगा। इसमें पशु चॉकलेट बनाने की तकनीकी और पशुओं के विभिन्न रोगों के लक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन और उपचार आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी।-- - डॉक्टर मनोज सिंह, पशुपालन विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र।
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सहारनपुर। पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर है। जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक युवाओं को पशु चॉकलेट बनाने का प्रशिक्षण देंगे। पोषक तत्वों से भरपूर यह चॉकलेट पशुओं के स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक सिद्घ होगी। प्रशिक्षण के बाद युवा इसे स्वरोजगार के रूप में भी अपना सकते हैं।
पोषक तत्वों की कमी के चलते कई बार पशुओं में दूध उत्पादन से लेकर उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। इसे देखते हुए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली ने एक चॉकलेट विकसित की है। इसे यूरिया, मोलासिस,मिनरल ब्लाक (यूएमएमबी) के नाम से जाना जाता है। इस चॉकलेट को गेहूं के चौकर, शीरा, सरसों की खली, यूरिया, कैल्सियम, फॉस्फोरस, मैग्नीजियम,जिंक, कॉपर आदि के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
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एक पशु को 500 से 600 ग्राम चॉकलेट प्रति सप्ताह देना पर्याप्त रहता है। इससे पशु की अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता पूरी हो जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक युवाओं को इस चॉकलेट को बनाने का प्रशिक्षण देंगे। जिससे न सिर्फ पशुपालकों को पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर पोषक तत्वों से भरपूर चॉकलेट मिल सकेंगी बल्कि युवा इसे स्वरोजगार के रूप में भी अपना सकते हैं।
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युवाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण
पशु चॉकलेट बनाने के लिए युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम 14 से 18 फरवरी तक चलेगा। इसमें पशु चॉकलेट बनाने की तकनीकी और पशुओं के विभिन्न रोगों के लक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन और उपचार आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी।