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दो भाइयों की मौत पर बिलख पड़े ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 06 Jan 2017 12:14 AM IST
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रोते हुए परिजन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के बेहट में चेतराम कोठड़ी गांव में मातम पसरा था। दोपहर में मां और बहन के साथ दो हंसती खेलती जिंदगियां पेट की आग बुझाने के लिए जंगल में लकड़ी बीनने गई थी।
मां और बहन की आंखों के सामने एक धमाका हुआ और दोनों भाई खून से लथपथ जमीन पर पड़े थे। एक को मौत ने सुला दिया था और दूसरा तड़प रहा था। वह भी कुछ देर बाद अस्पताल ले जाते समय जिंदगी की जंग हार गया।
चेतराम कोठड़ी गांव दो भाइयों सोनू और निखिल की मौत से सहमा हुआ है। मां शिक्षा और बहन गीता की आंखें यह हृदय विदारक दृश्य देखकर पथरा गई थी।
बूढ़ा बाप चमन सिंह कलेजे के टुकड़ों के क्षत-विक्षत शव देखकर बदहवास हो गया। वह पथराई आंखों से बेटों की लाशों को देख रहा था। सोनू और निखिल आठ भाई-बहनों में थे।
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सोनू बड़े से छोटा था और निखिल सबसे छोटा था। पूरा परिवार जंगल से लकड़ी बीनकर उन्हें बेचने के बाद मिलने वाले पैसे से दो वक्त की रोटी का इंतजाम करता है।
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मां और बहन की आंखों के सामने एक धमाका हुआ और दोनों भाई खून से लथपथ जमीन पर पड़े थे। एक को मौत ने सुला दिया था और दूसरा तड़प रहा था। वह भी कुछ देर बाद अस्पताल ले जाते समय जिंदगी की जंग हार गया।
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चेतराम कोठड़ी गांव दो भाइयों सोनू और निखिल की मौत से सहमा हुआ है। मां शिक्षा और बहन गीता की आंखें यह हृदय विदारक दृश्य देखकर पथरा गई थी।
बूढ़ा बाप चमन सिंह कलेजे के टुकड़ों के क्षत-विक्षत शव देखकर बदहवास हो गया। वह पथराई आंखों से बेटों की लाशों को देख रहा था। सोनू और निखिल आठ भाई-बहनों में थे।
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सोनू बड़े से छोटा था और निखिल सबसे छोटा था। पूरा परिवार जंगल से लकड़ी बीनकर उन्हें बेचने के बाद मिलने वाले पैसे से दो वक्त की रोटी का इंतजाम करता है।