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पहले परवाह तक न थी, अब सताने लगा जुर्माने का डर

Tue, 15 Sep 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2020 11:30 PM IST
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At first there was not even care, now the fear of penalty was started
टीपी नगर स्थित एक केंद्र पर प्रदूषण की जांच करवाता वाहन स्वामी। - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कुछ साल पहले तक दुपहिया या चार पहिया वाहनों की प्रदूषण जांच कराने के लिए अधिकतर वाहन स्वामी गंभीर ही नहीं थे और इसे नजरअंदाज करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और नए नियमों में जुर्माना बढ़ने के डर से वाहन स्वामियों में जागरूकता बढ़ी है। अब वाहनों की प्रदूषण जांच कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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पांच साल पहले तक शहर में तीन ही प्रदूषण जांच केंद्र थे। अब इनकी संख्या भी बढ़कर नौ तक हो गई है। शहर में पहले रोजाना 60 से 70 वाहन स्वामी ही प्रदूषण जांच कराने के लिए पहुंचते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 200 से 300 तक हो गई है। दुपहिया वाहन के लिए यदि छह माह तक का प्रमाण पत्र बनवाना हो तो 50 से 60 रुपये ही लगते हैं। लेकिन यदि यह प्रमाण पत्र न हो तो जुर्माना सीधे 10 हजार रुपये तक भरना पड़ेगा। यानी 50 रुपये के खर्च से बचना आगे चलकर भारी पड़ सकता है। यही डर वाहन स्वामियों को इस प्रमाण पत्र के लिए जागरूक कर रहा है और वे इसे बनवाने के लिए अधिक सक्रिय हुए हैं।
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पहले समझाते थे, तब भी नहीं मानते थे
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) अजीत श्रीवास्तव बताते हैं कि पहले नए वाहनों के पंजीकरण या पुराने वाहनों की फिटनेस सहित अन्य काम के लिए वाहन स्वामी उनके पास आते थे तो उन्हें समझाते थे कि बीमा और प्रदूषण जांच के प्रमाण पत्र जरूर साथ में रखें। मगर तब लोग इतना नहीं मानते थे। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के साथ ही सरकार ने जुर्माना बढ़ाया तो वाहन स्वामियों को एहसास होने लगा है कि यह छोटी सी लापरवाही अब अधिक महंगी पड़ सकती है। इसलिए प्रमाण पत्र बनवाने वाले बढ़े हैं।
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प्रदूूषण जांच प्रमाणपत्र की स्थिति
- शहर में एक साल पूर्व तक रोजाना 120 से 150 वाहन स्वामी कराते थे।
- अब संख्या बढ़कर 200 से 300 तक हो गई है
- प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न हो तो वाहन का बीमा भी नहीं हो सकेगा
- प्रमाणपत्र नहीं होने पर 10 हजार रुपये तक देना होता है जुर्माना
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