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किराये पर चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंदी का संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 04 Jun 2016 12:11 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर जिले में किराए पर चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंदी का संकट आ खड़ा हुआ है। एक साल बाद किराए के लिए आया बजट नियम पूरे न होने पर विभाग ने वापस कर दिया।
जिस पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने केंद्रों के संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं। कहा है कि अपनी जेब से कब तक किराया दें। जिले में 3410 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 878 आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं।
लेकिन अब किराए के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंदी का संकट गहराने लगा है। देहात क्षेत्र में किराए के लिए मात्र 450 रुपये निर्धारित होने के चलते किराए पर भवन नहीं मिले तो आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अपने घर में अथवा अपनी रिश्तेदारों के मकानों में ही आंगनबाड़ी केंद्र चलाने शुरू कर दिए।
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जबकि किसी भी आंगनबाड़ी के घर अथवा किसी जानकारी एवं रिश्तेदार के घर में आंगनबाड़ी केंद्र का किराया नहीं दिया जा सकता। कुछ ने अपनी जेब से ही एक हजार रुपये से 1500 रुपये किराए पर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर लिया।
उम्मीद थी कि शासन से पैसा मिल जाएगा।शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए के लिए 3000 रुपये निर्धारित हैं। इसके लिए विभाग ने किरायेनामे के लिए आवेदन भी मांगे।
लेकिन 3000 के किराए पर अपना मकान देने के लिए शहरी क्षेत्र में एक भी व्यक्ति तैयार नहीं हुआ। कुछ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने किसी रिश्तेदारी में आंगनबाड़ी केंद्र बनाए तो किसी ने अपनी जेब से ही किराए पर भवन लेकर आंगनबाड़ी केंद्र चलाए।
उन्हें भी उम्मीद थी कि शासन से बजट आने पर उन्हें किराया मिल जाएगा। शासन से 878 किराए के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए एक साल बाद बजट आया। देहात क्षेत्र के लगभग सौ आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया दिया गया। जबकि शेष को नियम पूरे नहीं होने पर किराया नहीं दिया गया।
शहरी क्षेत्र में तो एक का भी किराया नहीं दिया जा सका। 31 मार्च को किराए के लिए आया बजट भी शासन को वापस कर दिया गया। जिससे आंगनबाड़ी कार्यकत्री परेशान है।
अपने मानदेय में से किराया दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अब किराया देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि बजट के आने के इंतजार में अपनी जेब से किराया भर रहे थे। अब कब तक और कहां से किराया दें।
मुख्यालय तक आने जाने में और केंद्र के किराए में ही पूरा मानदेय खर्च हो रहा है। शीघ्र ही किराए की व्यवस्था नहीं की गई तो किराया दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों केंद्रों को बंद कर देंगी।
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जिस पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने केंद्रों के संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं। कहा है कि अपनी जेब से कब तक किराया दें। जिले में 3410 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 878 आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं।
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लेकिन अब किराए के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंदी का संकट गहराने लगा है। देहात क्षेत्र में किराए के लिए मात्र 450 रुपये निर्धारित होने के चलते किराए पर भवन नहीं मिले तो आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अपने घर में अथवा अपनी रिश्तेदारों के मकानों में ही आंगनबाड़ी केंद्र चलाने शुरू कर दिए।
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जबकि किसी भी आंगनबाड़ी के घर अथवा किसी जानकारी एवं रिश्तेदार के घर में आंगनबाड़ी केंद्र का किराया नहीं दिया जा सकता। कुछ ने अपनी जेब से ही एक हजार रुपये से 1500 रुपये किराए पर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर लिया।
उम्मीद थी कि शासन से पैसा मिल जाएगा।शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए के लिए 3000 रुपये निर्धारित हैं। इसके लिए विभाग ने किरायेनामे के लिए आवेदन भी मांगे।
लेकिन 3000 के किराए पर अपना मकान देने के लिए शहरी क्षेत्र में एक भी व्यक्ति तैयार नहीं हुआ। कुछ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने किसी रिश्तेदारी में आंगनबाड़ी केंद्र बनाए तो किसी ने अपनी जेब से ही किराए पर भवन लेकर आंगनबाड़ी केंद्र चलाए।
उन्हें भी उम्मीद थी कि शासन से बजट आने पर उन्हें किराया मिल जाएगा। शासन से 878 किराए के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए एक साल बाद बजट आया। देहात क्षेत्र के लगभग सौ आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया दिया गया। जबकि शेष को नियम पूरे नहीं होने पर किराया नहीं दिया गया।
शहरी क्षेत्र में तो एक का भी किराया नहीं दिया जा सका। 31 मार्च को किराए के लिए आया बजट भी शासन को वापस कर दिया गया। जिससे आंगनबाड़ी कार्यकत्री परेशान है।
अपने मानदेय में से किराया दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अब किराया देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि बजट के आने के इंतजार में अपनी जेब से किराया भर रहे थे। अब कब तक और कहां से किराया दें।
मुख्यालय तक आने जाने में और केंद्र के किराए में ही पूरा मानदेय खर्च हो रहा है। शीघ्र ही किराए की व्यवस्था नहीं की गई तो किराया दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों केंद्रों को बंद कर देंगी।