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पटाखों पर भी भारी महंगाई का बम
Saharanpur
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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सहारनपुर। बढ़ती महंगाई का बम पटाखा बाजार पर भारी पड़ रहा है। पिछले साल तक मध्यम परिवार में अमूमन 500 रुपये तक के पटाखों से काम चल जाता था, मगर अब अब यह बजट 1000 रुपये हो गया है। यानी दुगना।
शहर में इन दिनों गांधी पार्क, जुबली पार्क, वुडकार्विंग बाजार के अलावा कुछ अन्य खुले स्थानों पर पटाखों की बिक्री हो रही है। रविवार को बच्चों के साथ पटाखे खरीदने आए अभिभावकों के चेहरों पर बढ़ी कीमतों की चिंता साफ नजर आई। गांधी पार्क में दो बच्चों के साथ पटाखे खरीदने पहुंचे अरविंद कुमार और बेटी संग आए सुधीर गुप्ता ने अपनी परेशानियां बताईं। अरविंद कहते हैं कि घर से तो यही सोचकर चले थे कि शायद 300-400 रुपये में खूब पटाखे आ जाएंगे, मगर एक बाजार में आकर 800 रुपये के पटाखे भी कम लगे। हालांकि अभिभावकों ने अपनी जेब के अनुसार पटाखे-फुलझड़ी आदि खरीदी, मगर बच्चे कम पटाखों में संतुष्ट नजर नहीं आए।
महंगाई ने मंदा किया बाजार
दशहरा और दिवाली का सीजन ही ऐसा है जिसमें पटाखा कारोबारियों को सबसे अधिक मुनाफे की उम्मीद होती है, मगर हर चीज पर महंगाई की मार ने धंधे को भी काफी झटका दिया है। दिवाली से तीन चार दिन पहले ही लोग बच्चों सहित पटाखे खरीदने पहुंचते थे, मगर अब तो खरीदारी काफी कम हो रही है।
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-राकेश धींगड़ा, पटाखा कारोबारी, गांधी पार्क ।
अनार-राकेट नए रूप में
दिवाली पर आतिशबाजी के लिए धूम धड़ाके के लिए इस बार भी कुछ पटाखे, बम, अनार और राकेट कुछ नए अंदाज में आए हैं। ऐसे अनार बाजार में आए हैं जिनके जलने पर कई रंग एक साथ नजर आएंगे और उनकी फायरिंग टाइमिंग भी तीन से पांच मिनट ज्यादा की होगी। ऐसे रॉकेट आए हैं जो ऊंचाई पर पहुंचकर दो से तीन शॉट में धमाका करेंगे और फूलों की तरह बिखर जाएंगे।लंबी और मजबूत बत्ती बम तेज धमाकों से दिवाली के जशभन का खूब अहसास कराएंगे।
बच्चे बिना खतरे के धमाका
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर इस बार बाजार में हैंड थ्रो बम ज्यादा बिक रहे हैं। इन्हें जमीन या दीवार पर मारकर धमाका होता है। इनसे झुलसने का खतरा भी नहीं है। पटाखा विक्रेता अजब सिंह ने बताया कि ज्यादातर अभिभावक छोटे बच्चों के लिए यही ले रहे हैं। किशोर और युवा जलाने वाले बम और पटाखों को पसंद कर रहे हैं।
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शहर में इन दिनों गांधी पार्क, जुबली पार्क, वुडकार्विंग बाजार के अलावा कुछ अन्य खुले स्थानों पर पटाखों की बिक्री हो रही है। रविवार को बच्चों के साथ पटाखे खरीदने आए अभिभावकों के चेहरों पर बढ़ी कीमतों की चिंता साफ नजर आई। गांधी पार्क में दो बच्चों के साथ पटाखे खरीदने पहुंचे अरविंद कुमार और बेटी संग आए सुधीर गुप्ता ने अपनी परेशानियां बताईं। अरविंद कहते हैं कि घर से तो यही सोचकर चले थे कि शायद 300-400 रुपये में खूब पटाखे आ जाएंगे, मगर एक बाजार में आकर 800 रुपये के पटाखे भी कम लगे। हालांकि अभिभावकों ने अपनी जेब के अनुसार पटाखे-फुलझड़ी आदि खरीदी, मगर बच्चे कम पटाखों में संतुष्ट नजर नहीं आए।
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महंगाई ने मंदा किया बाजार
दशहरा और दिवाली का सीजन ही ऐसा है जिसमें पटाखा कारोबारियों को सबसे अधिक मुनाफे की उम्मीद होती है, मगर हर चीज पर महंगाई की मार ने धंधे को भी काफी झटका दिया है। दिवाली से तीन चार दिन पहले ही लोग बच्चों सहित पटाखे खरीदने पहुंचते थे, मगर अब तो खरीदारी काफी कम हो रही है।
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-राकेश धींगड़ा, पटाखा कारोबारी, गांधी पार्क ।
अनार-राकेट नए रूप में
दिवाली पर आतिशबाजी के लिए धूम धड़ाके के लिए इस बार भी कुछ पटाखे, बम, अनार और राकेट कुछ नए अंदाज में आए हैं। ऐसे अनार बाजार में आए हैं जिनके जलने पर कई रंग एक साथ नजर आएंगे और उनकी फायरिंग टाइमिंग भी तीन से पांच मिनट ज्यादा की होगी। ऐसे रॉकेट आए हैं जो ऊंचाई पर पहुंचकर दो से तीन शॉट में धमाका करेंगे और फूलों की तरह बिखर जाएंगे।लंबी और मजबूत बत्ती बम तेज धमाकों से दिवाली के जशभन का खूब अहसास कराएंगे।
बच्चे बिना खतरे के धमाका
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर इस बार बाजार में हैंड थ्रो बम ज्यादा बिक रहे हैं। इन्हें जमीन या दीवार पर मारकर धमाका होता है। इनसे झुलसने का खतरा भी नहीं है। पटाखा विक्रेता अजब सिंह ने बताया कि ज्यादातर अभिभावक छोटे बच्चों के लिए यही ले रहे हैं। किशोर और युवा जलाने वाले बम और पटाखों को पसंद कर रहे हैं।