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हाईवे पर धरना दे रहे लोगों ने दी सड़क पर ही चूल्हा शुरू करने की चेतावनी
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सरसावा (सहारनपुर)। हाईवे के किनारे सर्विस रोड की मांग को लेकर 11 दिन से चल रहे धरने पर पहुंचे उप जिलाधिकारी नकुड़ किसानों को समझाने में नाकाम रहे। किसानों ने कहा कि प्रशासन को चाहिए वह किसानों का रास्ता बंद करने के बजाय खुलवाने का काम करे। किसानों ने प्रशासन पर विकास की आड़ में गांवों का रास्ता बाधित करने का आरोप लगाया।
शुक्रवार को हाईवे के साथ सर्विस रोड और रैंप की मांग को लेकर किसानों के धरने के 11 वें दिन दबाव बढ़ने पर एसडीएम नकुड़ युगराज सिंह किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सर्विस रोड बनाना संभव नही है, लेकिन काफी देर तक चली जद्दोजहद के बाद भी किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। धरने पर बैठे किसान मांगेराम प्रधान, आशीष चौधरी, राजपाल, अरविंद, प्रदीप ने एसडीएम से कहा कि प्रशासन ने पहले तो हाइवे निर्माण के बाद क्षेत्र का भरपूर विकास होने का दावा कर किसानों की कीमती जमीनों का अधिग्रहण किया, लेकिन अब उसी जमीन पर हाइवे बनाकर किसान को चलने से रोका जा रहा है। ग्रामीणों के चलने तक के रास्ते तक बंद किए जा रहे हैं। ऐसे विकास से किसानों को क्या लाभ जो उनके आवागमन को ही बाधित कर दे। धरने पर बैठे लोगों ने एसडीएम नकुड़ को अपनी समस्या तथ्यों के साथ अवगत कराते हुए साफ कहा कि वे हाईवे से जुड़ने वाली समानांतर सड़क लिए बिना धरने से उठने वाले नहीं हैं। धरने पर बैठे किसानों ने कहा कि अभी तो आसपास के गांवों के लोग ही धरने पर बैठे हैं। प्रशासन ने मांग नहीं मानी तो घर की महिलाएं भी चूल्हा चौका लेकर धरने पर बैठने पर मजबूर होंगी। किसानों की जिद को देखते हुए एसडीएम नकुड़ बिना कोई आश्वासन दिए मौके से चले गए। धरना प्रदर्शन के 11वें दिन रामपाल, निखिल, गुलशैद, वीरसैन, मुस्तकीम, मैराजुद्दीन, शाबिर, इरशाद, आकाश, शरद, सोनू, बोबी, अब्दुल रहमान सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।
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शुक्रवार को हाईवे के साथ सर्विस रोड और रैंप की मांग को लेकर किसानों के धरने के 11 वें दिन दबाव बढ़ने पर एसडीएम नकुड़ युगराज सिंह किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सर्विस रोड बनाना संभव नही है, लेकिन काफी देर तक चली जद्दोजहद के बाद भी किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। धरने पर बैठे किसान मांगेराम प्रधान, आशीष चौधरी, राजपाल, अरविंद, प्रदीप ने एसडीएम से कहा कि प्रशासन ने पहले तो हाइवे निर्माण के बाद क्षेत्र का भरपूर विकास होने का दावा कर किसानों की कीमती जमीनों का अधिग्रहण किया, लेकिन अब उसी जमीन पर हाइवे बनाकर किसान को चलने से रोका जा रहा है। ग्रामीणों के चलने तक के रास्ते तक बंद किए जा रहे हैं। ऐसे विकास से किसानों को क्या लाभ जो उनके आवागमन को ही बाधित कर दे। धरने पर बैठे लोगों ने एसडीएम नकुड़ को अपनी समस्या तथ्यों के साथ अवगत कराते हुए साफ कहा कि वे हाईवे से जुड़ने वाली समानांतर सड़क लिए बिना धरने से उठने वाले नहीं हैं। धरने पर बैठे किसानों ने कहा कि अभी तो आसपास के गांवों के लोग ही धरने पर बैठे हैं। प्रशासन ने मांग नहीं मानी तो घर की महिलाएं भी चूल्हा चौका लेकर धरने पर बैठने पर मजबूर होंगी। किसानों की जिद को देखते हुए एसडीएम नकुड़ बिना कोई आश्वासन दिए मौके से चले गए। धरना प्रदर्शन के 11वें दिन रामपाल, निखिल, गुलशैद, वीरसैन, मुस्तकीम, मैराजुद्दीन, शाबिर, इरशाद, आकाश, शरद, सोनू, बोबी, अब्दुल रहमान सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।
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