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टीबी के साथ जंग में नहीं मिल रहा निजी चिकित्सकों का साथ

Sun, 02 Sep 2018 12:52 AM IST
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:52 AM IST
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टीबी के साथ जंग में नहीं मिल रहा निजी चिकित्सकों का साथ
टीबी के साथ जंग में नहीं मिल रहा निजी चिकित्सकों का साथ
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सहारनपुर। टीबी के साथ जंग में चिकित्सा विभाग को निजी चिकित्सकों का साथ नहीं मिल रहा है। ऐसे में वर्ष 2025 तक देश को टीबी से मुक्त बनाने की मुहिम गति नहीं पकड़ पा रही है। मुहिम में साथ नहीं देने वाले निजी चिकित्सकों को नोटिस जारी करने की तैयारी चिकित्सा विभाग कर रहा है।
चिकित्सा विभाग का दावा है कि विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियानों और जागरूकता कार्यक्रमों की वजह से जनपद में टीबी के मरीजों की संख्या में कमी आई है। वर्तमान में 4000 से अधिक टीबी के मरीज चिकित्सा विभाग के रजिस्टर में दर्ज हैं। विभाग की पूरे जनपद में घर-घर जाकर टीबी के मरीजों की खोज कर रही है। अभियान का अगला चरण चार सितंबर से शुरू हो रहा है, जो दस दिन चलेगा। विभागी अधिकारियों ने बताया कि 2025 तक देश को टीबी से मुक्त करने के लिए विभाग युद्ध स्तर पर कदम उठा रहा है। विभाग की ओर से जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी और पीएचसी पर शिविर लगाकर और सेमिनार कर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक कर रहे हैं। मगर निजी चिकित्सकों से टीबी के साथ लड़ाई में सहयोग नहीं मिल पा रहा है। निजी चिकित्सकों को निर्देश हैं कि उनके पास जो भी टीबी का मरीज आएं उनका पता सहित पूरी जानकारी जिला अस्पताल में दर्ज कराएं। मगर 95 फीसदी चिकित्सक निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में विभाग के पास टीबी के मरीजों की संख्या और उनकी स्थिति का सही आंकड़ा नहीं इकट्ठा हो पा रहा है। इतना ही नहीं, पिछले दिनों डीएम ने बैठक कर निजी चिकित्सकों को टीबी के मरीजों का प्रतिदिन की रिपोर्ट चिकित्सा विभाग को देने को कहा था। मगर उसके बावजूद निजी चिकित्सकों पर कोई असर नहीं पड़ा है। अब सीएमओ ने विभाग को निजी चिकित्सकों के लिए नोटिस तैयार करने को कहा है।
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एमडीआर मरीजों का इलाज बड़ी चुनौती
जनपद में टीबी के सामान्य मरीजों के साथ ही एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) यानी ऐसे मरीज, जिनपर टीबी की सामान्य दवा असर नहीं करती है की संख्या भी खासी है। विभाग ने संख्या तो नहीं बताई है, मगर एमडीआर मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में अलग से वार्ड तैयार किया गया है, जिससे टीबी की इस स्थिति को समझा जा सकता है।
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गंगोह क्षेत्र है अधिक संवेदनशील
टीबी के मामले में भी जनपद के सभी विकास खंडों की तुलना में गंगोह अधिक संवेदनशील है। इसकी प्रमुख वजह क्षेत्र का यमुना नदी से सटे होना है, जिसकी वजह से क्षेत्र की धरती में नमी और गंदगी रहती है। लोगों में जागरूकता भी कम है। ऐसे में गंगोह क्षेत्र में टीबी के मरीज अन्य विकास खंडों की तुलना में अधिक पाए जाते हैं। चिकित्सा विभाग ने गंगोह सीएचसी पर टीबी से निपटने के लिए तमाम सुविधाएं दी हुई हैं, जिनमें टीबी की जांच भी शामिल है।

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यह सच है कि ज्यादातर निजी चिकित्सक टीबी के मरीजों के बारे में सूचना नहीं भेज रहे हैं, जो बुरी स्थिति है। इस संबंध में पिछले दिनों डीएम ने भी चिकित्सकों को सूचना भेजने को कहा था। मगर स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। निजी चिकित्सकों के लिए सीएमओ की ओर से पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है।
-- डॉ. राजेश जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी।
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