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त्योहार उद्देश्य सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना: गोरा
Updated Fri, 15 Jun 2018 01:00 AM IST
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सामाजिक सौहार्द बढ़ाते हैं त्योहार : गोरा
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक और इमाम कारी सय्यद इसहाक गोरा ने कहा कि इस्लामी परंपरा के अनुसार रमजान माह के ठीक बाद ईद-उल-फितर और हज के महीने में ईद उल अजहा दो महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। बृहस्पतिवार को जारी बयान में गोरा ने कहा कि ईद-उल-फितर का शाब्दिक अर्थ उपवास पूरे होने का उत्सव। ये त्योहार रमजान माह के अंत में इसलिए मनाया जाता है कि रोजों की समाप्ति की खुशी में रोजेदार खुदा का शुक्र अदा कर सकें। उपवास का उद्देश्य केवल खाना पीना छोड़ना नहीं है, बल्कि रोजा स्वयं को हर बुराई से जीवन भर दूर रखने का प्रतीक है। ईद उल-फितर गरीबों को दान करने का पर्व है। उन्होंने कहा कि त्योहार सामाजिक सौहार्द बढ़ाते हैं।
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सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक और इमाम कारी सय्यद इसहाक गोरा ने कहा कि इस्लामी परंपरा के अनुसार रमजान माह के ठीक बाद ईद-उल-फितर और हज के महीने में ईद उल अजहा दो महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। बृहस्पतिवार को जारी बयान में गोरा ने कहा कि ईद-उल-फितर का शाब्दिक अर्थ उपवास पूरे होने का उत्सव। ये त्योहार रमजान माह के अंत में इसलिए मनाया जाता है कि रोजों की समाप्ति की खुशी में रोजेदार खुदा का शुक्र अदा कर सकें। उपवास का उद्देश्य केवल खाना पीना छोड़ना नहीं है, बल्कि रोजा स्वयं को हर बुराई से जीवन भर दूर रखने का प्रतीक है। ईद उल-फितर गरीबों को दान करने का पर्व है। उन्होंने कहा कि त्योहार सामाजिक सौहार्द बढ़ाते हैं।