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मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ ही छेडछाड़ क्यों?: खुर्शीदा
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:47 PM IST
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मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ ही छेड़छाड़ क्यों: खुर्शीदा
देवबंद (सहारनपुर)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आमंत्रित सदस्य व मदरसा जामिया इल्हामिया तुल बनात की प्रभारी खुर्शीदा खातून ने कहा कि साजिश के तहत मुसलमानों के पर्सनल लॉ के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। जबकि देश में और भी कई अहम मुद्दे है, जिन पर बहस करने और कानून बनाने की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार साजिश के तहत वर्ग विशेष को निशाना बना रही है।
बृहस्पतिवार को खुर्शीदा खातून ने कहा कि तीन तलाक, हलाला या फिर बहुविवाह, ये मुसलमानों के धार्मिक मसले हैं। सरकार या अदालतें इनमें हस्तक्षेप क्यों कर रही हैं। जबकि मुल्क में बहुत से ऐसे मसले हैं जिन पर बहस करने और कानून बनाने की जरूरत है, लेकिन सरकार उनसे बचने के लिए मुसलमानों के धार्मिक मामलों को उठाकर वर्ग विशेष को निशाना बनाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि बहुविवाह के लिए शरीयत में इजाजत दी हुई है और भारतीय संविधान ने सभी धर्मों के लोगों को अपने अपने मजहब के अनुसार जीवन गुजारने की आजादी दी हुई है। लेकिन केवल मुसलमानों के धार्मिक मामलों को उठाकर क्या साबित किया जा रहा है। खुर्शीदा खातून ने कहा कि हलाला प्रथा को समाज में गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। जबकि इस्लाम में इसे लानत वाला कार्य करार दिया गया है। किसी भी तरह की शर्त के साथ हलाला करना सरासर नाजायज है। तलाक मिलने के बाद औरत किसी दूसरे मर्द से निकाह करती तो उसमें कोई शर्त नहीं रखी जा सकती। बल्कि अगर इत्तेफाकन उस शौहर की मौत हो जाए या फिर वो खुद से उसे तलाक दे देता है तो ऐसे में बीवी चाहे तो पहले शौहर से दोबारा निकाह कर सकती है। बिना वजह इन मुद्दों के तूल दिया जा रहा है।
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देवबंद (सहारनपुर)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आमंत्रित सदस्य व मदरसा जामिया इल्हामिया तुल बनात की प्रभारी खुर्शीदा खातून ने कहा कि साजिश के तहत मुसलमानों के पर्सनल लॉ के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। जबकि देश में और भी कई अहम मुद्दे है, जिन पर बहस करने और कानून बनाने की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार साजिश के तहत वर्ग विशेष को निशाना बना रही है।
बृहस्पतिवार को खुर्शीदा खातून ने कहा कि तीन तलाक, हलाला या फिर बहुविवाह, ये मुसलमानों के धार्मिक मसले हैं। सरकार या अदालतें इनमें हस्तक्षेप क्यों कर रही हैं। जबकि मुल्क में बहुत से ऐसे मसले हैं जिन पर बहस करने और कानून बनाने की जरूरत है, लेकिन सरकार उनसे बचने के लिए मुसलमानों के धार्मिक मामलों को उठाकर वर्ग विशेष को निशाना बनाने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि बहुविवाह के लिए शरीयत में इजाजत दी हुई है और भारतीय संविधान ने सभी धर्मों के लोगों को अपने अपने मजहब के अनुसार जीवन गुजारने की आजादी दी हुई है। लेकिन केवल मुसलमानों के धार्मिक मामलों को उठाकर क्या साबित किया जा रहा है। खुर्शीदा खातून ने कहा कि हलाला प्रथा को समाज में गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। जबकि इस्लाम में इसे लानत वाला कार्य करार दिया गया है। किसी भी तरह की शर्त के साथ हलाला करना सरासर नाजायज है। तलाक मिलने के बाद औरत किसी दूसरे मर्द से निकाह करती तो उसमें कोई शर्त नहीं रखी जा सकती। बल्कि अगर इत्तेफाकन उस शौहर की मौत हो जाए या फिर वो खुद से उसे तलाक दे देता है तो ऐसे में बीवी चाहे तो पहले शौहर से दोबारा निकाह कर सकती है। बिना वजह इन मुद्दों के तूल दिया जा रहा है।
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