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फेरोमोन ट्रैप से करें फ्रूट फ्लाई पर नियंत्रण
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:20 AM IST
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फेरोमोन ट्रैप से करें फ्रूट फ्लाई पर नियंत्रण
सहारनपुर। फलों में लगने वाली फ्रूट फ्लाई पर नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप कारगर सिद्ध हो रहा है। फ्रूट फ्लाई से प्रभावित फलों की गुणवत्ता खराब होने से बाजार में इसकी बिक्री नहीं हो पाती। इससे किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है। फेरोमोन ट्रैप में फल मक्खी के वयस्क मादा फेरोमान गंध के चलते आकर्षित होकर ट्रैप में जाकर नष्ट हो जाता है।
बरसात के मौसम में आम, अमरूद, नीबू, लौकी, खीरा करेला, तोरई आदि में फल मक्खी का काफी प्रकोप बढ़ जाता है। इससे प्रभावित फल की गुणवत्ता खराब हो जाती है और बाजार में उसकी बिक्री नहीं हो पाती। यदि वह बिक भी जाए तो भाव काफी कम मिलता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि अधिकांश किसान फल मक्खी से बचाव के लिए कीटनाशकों को प्रयोग करते हैं। ये कीटनाशक मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह होते हैं। उन्होंने बताया कि इससे बचाव के लिए प्रति हेक्टेयर 15 फेरोमोन ट्रैप की दर से लगाना चाहिए। डिब्बे के आकार के इस ट्रैप में फेरोमान की मादा गंध से आकर्षित होकर वयस्क कीट आकर नष्ट हो जाते हैं। इससे फल सुरक्षित रहती है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक कम लागत में फ्रूट फ्लाई पर प्रभावी नियंत्रण करती है।
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फ्रूट फ्लाई की पहचान और नुकसान
वयस्क फ्रूट फ्लाई मध्यम आकार की और करीब सात मिलीमीटर लंबी होती है। इसके पंख पारदर्शी और शरीर पर पीले एवं गहरे भूरे के धब्बे होते हैं। इसके लार्वा का अगला हिस्सा पतला एवं पिछला हिस्सा मोटा रहता है। यह कीट फलों के गूदे को खाते हैं। प्रभावित फलों पर गड्ढे के अंदर गहरे रंग का छिद्र पाया जाता है। इससे गूदा सड़ जाता है। यह कीट कभी कभी फलों में 50 प्रतिशत से अधिक तक नुकसान पहुंचा देता है।
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सहारनपुर। फलों में लगने वाली फ्रूट फ्लाई पर नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप कारगर सिद्ध हो रहा है। फ्रूट फ्लाई से प्रभावित फलों की गुणवत्ता खराब होने से बाजार में इसकी बिक्री नहीं हो पाती। इससे किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है। फेरोमोन ट्रैप में फल मक्खी के वयस्क मादा फेरोमान गंध के चलते आकर्षित होकर ट्रैप में जाकर नष्ट हो जाता है।
बरसात के मौसम में आम, अमरूद, नीबू, लौकी, खीरा करेला, तोरई आदि में फल मक्खी का काफी प्रकोप बढ़ जाता है। इससे प्रभावित फल की गुणवत्ता खराब हो जाती है और बाजार में उसकी बिक्री नहीं हो पाती। यदि वह बिक भी जाए तो भाव काफी कम मिलता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि अधिकांश किसान फल मक्खी से बचाव के लिए कीटनाशकों को प्रयोग करते हैं। ये कीटनाशक मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह होते हैं। उन्होंने बताया कि इससे बचाव के लिए प्रति हेक्टेयर 15 फेरोमोन ट्रैप की दर से लगाना चाहिए। डिब्बे के आकार के इस ट्रैप में फेरोमान की मादा गंध से आकर्षित होकर वयस्क कीट आकर नष्ट हो जाते हैं। इससे फल सुरक्षित रहती है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक कम लागत में फ्रूट फ्लाई पर प्रभावी नियंत्रण करती है।
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फ्रूट फ्लाई की पहचान और नुकसान
वयस्क फ्रूट फ्लाई मध्यम आकार की और करीब सात मिलीमीटर लंबी होती है। इसके पंख पारदर्शी और शरीर पर पीले एवं गहरे भूरे के धब्बे होते हैं। इसके लार्वा का अगला हिस्सा पतला एवं पिछला हिस्सा मोटा रहता है। यह कीट फलों के गूदे को खाते हैं। प्रभावित फलों पर गड्ढे के अंदर गहरे रंग का छिद्र पाया जाता है। इससे गूदा सड़ जाता है। यह कीट कभी कभी फलों में 50 प्रतिशत से अधिक तक नुकसान पहुंचा देता है।