{"_id":"5b031b6e4f1c1b334d8b4e0f","slug":"71526930286-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान की फसल को रोगमुक्त करने के टिप्स दिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान की फसल को रोगमुक्त करने के टिप्स दिए
Updated Tue, 22 May 2018 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) राकेश बाबू ने बताया कि फसलों में रोग बीज, मृदा, वायु एवं कीटों द्वारा फैलते हैं। बीज जनित और भूमि जनित रोगों की रोकथाम के लिए बीज शोधन की बड़ी भूमिका है।
उप निदेशक कृषि रक्षा ने बताया कि धान की फसल को जीवाणु झुलसा की रोकथाम हेतु 25 किग्रा बीज को 4 ग्राम स्टैप्टोसाक्लीन या 40 ग्राम स्टैप्टोमाइसीन सल्फेट 9 प्रतिशत, टेट्रासाइक्लीन हाइड्रोक्लोराइड एक प्रतिशत के घोल में 12 घंटे भिगोकर उसके बाद घोल से निकालकर बीज को 75 ग्राम थीरम या 50 ग्राम कार्बंडाजिम 50 डब्लूपी या 125 ग्राम टाइक्रोडर्मा मिलाकर नर्सरी की बुवाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जिन खेतों में दीमक या सफेद गिंडार का प्रकोप है, उसमें 2.5 किलाग्राम ब्यूवेरिया बेसियाना एक डब्लूपी को 100 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर तैयारी के समय खेत मिलाने से फायदा होता है। जबकि भूमि जनित रोगो के नियंत्रण हेतु 2.5 किलोग्राम टाइकोडर्मा 2 प्रतिशत डब्लूपी को 100 किलो गोबर की खाद में मिलाकर खेत की तैयारी के समय मिट्टी में डालना मुफीद रहता है।
विज्ञापन
उप निदेशक कृषि रक्षा ने बताया कि धान की फसल को जीवाणु झुलसा की रोकथाम हेतु 25 किग्रा बीज को 4 ग्राम स्टैप्टोसाक्लीन या 40 ग्राम स्टैप्टोमाइसीन सल्फेट 9 प्रतिशत, टेट्रासाइक्लीन हाइड्रोक्लोराइड एक प्रतिशत के घोल में 12 घंटे भिगोकर उसके बाद घोल से निकालकर बीज को 75 ग्राम थीरम या 50 ग्राम कार्बंडाजिम 50 डब्लूपी या 125 ग्राम टाइक्रोडर्मा मिलाकर नर्सरी की बुवाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जिन खेतों में दीमक या सफेद गिंडार का प्रकोप है, उसमें 2.5 किलाग्राम ब्यूवेरिया बेसियाना एक डब्लूपी को 100 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर तैयारी के समय खेत मिलाने से फायदा होता है। जबकि भूमि जनित रोगो के नियंत्रण हेतु 2.5 किलोग्राम टाइकोडर्मा 2 प्रतिशत डब्लूपी को 100 किलो गोबर की खाद में मिलाकर खेत की तैयारी के समय मिट्टी में डालना मुफीद रहता है।
विज्ञापन