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केंद्रीय मंत्री गिरिराज के बयान पर भड़के देवबंदी उलमा
Updated Fri, 12 Oct 2018 12:54 AM IST
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज के बयान पर भड़के देवबंदी उलमा
देवबंद(सहारनपुर)। हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर राम मंदिर बनाएं, नहीं तो देश के हालात खराब हो सकते हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के इस बयान पर देवबंदी उलमा भड़क गए हैं। उलमा का कहना है कि चुनाव का वक्त नजदीक आने पर आरएसएस और भाजपा के लोग ऐसी बयानबाजी करके हिंदू और मुसलमानों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा वह हमें मंजूर होगा।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि गिरिराज सिंह को बयानबाजी करने से पहले यह सोचना चाहिए कि बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हम बार बार कह रहे हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा वो मुल्क के मुसलमानों को मंजूर होगा। फिर इस पर बयानबाजी करने की क्या जरूरत है। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने इल्जाम लगाया कि चुनाव का वक्त नजदीक आने पर आरएसएस और बीजेपी के नेता इस प्रकार की बयानबाजी कर हिंदू मुस्लिमों में नफरत फैलाकर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करना चाहते हैं। जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि आज देश जिस नाजुक वक्त से गुजर रहा है उसमें दूरियां को घटाने का काम होना चाहिए, लेकिन कुछ लोग स्वार्थ की पूर्ति के लिए मुल्क के माहौल को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। जिन पर नकेल कसना बेहद जरूरी है। उन्होंने अवाम से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के लोगों के बयानों पर जरा भी ध्यान न दें।
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देवबंद(सहारनपुर)। हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर राम मंदिर बनाएं, नहीं तो देश के हालात खराब हो सकते हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के इस बयान पर देवबंदी उलमा भड़क गए हैं। उलमा का कहना है कि चुनाव का वक्त नजदीक आने पर आरएसएस और भाजपा के लोग ऐसी बयानबाजी करके हिंदू और मुसलमानों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा वह हमें मंजूर होगा।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि गिरिराज सिंह को बयानबाजी करने से पहले यह सोचना चाहिए कि बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हम बार बार कह रहे हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा वो मुल्क के मुसलमानों को मंजूर होगा। फिर इस पर बयानबाजी करने की क्या जरूरत है। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने इल्जाम लगाया कि चुनाव का वक्त नजदीक आने पर आरएसएस और बीजेपी के नेता इस प्रकार की बयानबाजी कर हिंदू मुस्लिमों में नफरत फैलाकर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करना चाहते हैं। जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि आज देश जिस नाजुक वक्त से गुजर रहा है उसमें दूरियां को घटाने का काम होना चाहिए, लेकिन कुछ लोग स्वार्थ की पूर्ति के लिए मुल्क के माहौल को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। जिन पर नकेल कसना बेहद जरूरी है। उन्होंने अवाम से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के लोगों के बयानों पर जरा भी ध्यान न दें।
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