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वेदों के प्रचार प्रसार पर बल दिया
Updated Tue, 22 Aug 2017 12:47 AM IST
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वेदों के प्रचार प्रसार पर बल दिया
अंबेहटा (बागपत)। आर्य समाज गंगोह द्वारा चलाई जा रही गांव दर गांव वेद प्रचार कराने की श्रंखला में सोमवार को मोहद्दीनपुर में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें विद्वानों ने वेदों को प्राचीन ग्रंथ बताते हुए वेदों के प्रचार प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। तदोपरांत प्रवचन करते हुए आर्य समाज के प्रचारक आचार्य बिजेंद्र शास्त्री ने कहा कि वेद ईश्वरीय वाणी है, चारों वेदों में मनुष्योपयोगी ज्ञान का भंडार है, परंतु हम लोग वेद ज्ञान रूपी अपनी ही संपत्ति का लाभ नही उठा पा रहे हैं। जबकि दूसरे देशों के लोग वेदों का अनुसरण कर अपना जीवन सुधार रहे हैं। आचार्य ने कहा कि वेद प्राणी मात्र के भले की बात कहते है, इसीलिए दयानंद सरस्वती ने वेद मंत्रों की सही व्याख्या करके लोगों को जीने की राह दिखाई। स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज समाज में धर्म के नाम पर अनेक आयोजन हो रहे हैं, परंतु फिर भी अधर्म का बोल बाला बढ़ता जा रहा है। इसका मूल कारण मनुष्यों का धर्म के वास्तविक स्वरूप से दूर होकर आडंबरों में फंस जाना है। उन्होंने आह्वान किया कि धर्म का जानने के लिए जरूरी है कि लोग आर्य समाज के साथ जुड़े ताकि समाज में फैली विकृति को दूर किया जा सके। भजनोपदेशक पंडित नरेश दत्त आर्य, भीष्म आर्य ने भी भजनों के माध्यम से विचार रखते हुए वेदों के पठन पाठन की आवश्यकता बताई।
शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान वीर सिंह भावुक, जगपाल आर्य, देवेंद्र आर्य, संजय आर्य, मदन पाल, ताराचंद आर्य, अंकित सैनी, आनंद मुनी, डा. राजेश आर्य, श्यामलाल सैनी, प्रीतम सिंह, रचना, सुमन, कविता मौजूद रहे।
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अंबेहटा (बागपत)। आर्य समाज गंगोह द्वारा चलाई जा रही गांव दर गांव वेद प्रचार कराने की श्रंखला में सोमवार को मोहद्दीनपुर में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें विद्वानों ने वेदों को प्राचीन ग्रंथ बताते हुए वेदों के प्रचार प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। तदोपरांत प्रवचन करते हुए आर्य समाज के प्रचारक आचार्य बिजेंद्र शास्त्री ने कहा कि वेद ईश्वरीय वाणी है, चारों वेदों में मनुष्योपयोगी ज्ञान का भंडार है, परंतु हम लोग वेद ज्ञान रूपी अपनी ही संपत्ति का लाभ नही उठा पा रहे हैं। जबकि दूसरे देशों के लोग वेदों का अनुसरण कर अपना जीवन सुधार रहे हैं। आचार्य ने कहा कि वेद प्राणी मात्र के भले की बात कहते है, इसीलिए दयानंद सरस्वती ने वेद मंत्रों की सही व्याख्या करके लोगों को जीने की राह दिखाई। स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज समाज में धर्म के नाम पर अनेक आयोजन हो रहे हैं, परंतु फिर भी अधर्म का बोल बाला बढ़ता जा रहा है। इसका मूल कारण मनुष्यों का धर्म के वास्तविक स्वरूप से दूर होकर आडंबरों में फंस जाना है। उन्होंने आह्वान किया कि धर्म का जानने के लिए जरूरी है कि लोग आर्य समाज के साथ जुड़े ताकि समाज में फैली विकृति को दूर किया जा सके। भजनोपदेशक पंडित नरेश दत्त आर्य, भीष्म आर्य ने भी भजनों के माध्यम से विचार रखते हुए वेदों के पठन पाठन की आवश्यकता बताई।
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शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान वीर सिंह भावुक, जगपाल आर्य, देवेंद्र आर्य, संजय आर्य, मदन पाल, ताराचंद आर्य, अंकित सैनी, आनंद मुनी, डा. राजेश आर्य, श्यामलाल सैनी, प्रीतम सिंह, रचना, सुमन, कविता मौजूद रहे।
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