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नोटबंदी से कहीं इजाफा तो कहीं नुकसान
Updated Wed, 08 Nov 2017 12:06 AM IST
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सहारनपुर। नोटबंदी को आज रात आठ बजे पूरा एक साल हो होने जा रहा है। नोटबंदी के समय जहां जिलेभर में नोटों की उपलब्धता को लेकर हाहाकार मचा था, वहीं अब हालात सामान्य हैं। नोटबंदी ने कुछ क्षेत्रों में कामकाज को भी खासा प्रभावित किया है, वहीं अब लोग सरकार की मंशा के अनुरूप कैशलेस व्यवस्था अपनाने लगे हैं, जो सरल और सुरक्षित व्यवस्था मानी जा रही है। इसके अलावा आयकर दाताओं की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी होना लाजिमी है।
पिछले एक वर्ष में सहारनपुर के कुल बैंक उपभोक्ताओं में से करीब 20 से 30 फीसदी उपभोक्ता नैट बैंकिंग अपना रहे हैं, जो रुपयों का लेनदेन कैश की बजाय लेनदेन ऑलाइन करने लगे हैं। अनेक बड़े प्रतिष्ठानों खासकर मॉल और मार्ट में स्वैपिंग मशीनें लग चुकी हैं, जहां प्रतिदिन 15 से 20 फीसदी लोग कैश पेमेंट करने की बजाय कार्ड स्वैप कराकर भुगतान कर रहे हैं। वहीं अब आयकर दाताओं की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है। उधर, नुकसान की बात करें तो दुनिया भर में मशहूर वुडकार्विंग उद्योग नोटबंदी से आज तक पूरी तरह उबर नहीं सका है। नोटबंदी के दौरान करीब 25 हजार कारीगर घर बैठ गए थे। विदेशों के आर्डर पर भी असर पड़ा था। एक साल में हालात सुधरे जरूर हैं मगर सामान्य नहीं हैं। होजरी उद्योग यहां घर-घर में चलता है। यह उद्योग भी नोटबंदी के बाद से पूरी तरह उबर नहीं सका है। सहारनपुर का कपड़ा व्यापार भी पहचान रखता है। नोटबंदी के बाद कपड़ा व्यापारियों की आय में 50 प्रतिशत तक कमी आई है। यही वजह है कि कपड़ा व्यापारी नोटबंदी की सालगिरह पर विरोध जता रहे हैं।
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पिछले एक वर्ष में सहारनपुर के कुल बैंक उपभोक्ताओं में से करीब 20 से 30 फीसदी उपभोक्ता नैट बैंकिंग अपना रहे हैं, जो रुपयों का लेनदेन कैश की बजाय लेनदेन ऑलाइन करने लगे हैं। अनेक बड़े प्रतिष्ठानों खासकर मॉल और मार्ट में स्वैपिंग मशीनें लग चुकी हैं, जहां प्रतिदिन 15 से 20 फीसदी लोग कैश पेमेंट करने की बजाय कार्ड स्वैप कराकर भुगतान कर रहे हैं। वहीं अब आयकर दाताओं की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है। उधर, नुकसान की बात करें तो दुनिया भर में मशहूर वुडकार्विंग उद्योग नोटबंदी से आज तक पूरी तरह उबर नहीं सका है। नोटबंदी के दौरान करीब 25 हजार कारीगर घर बैठ गए थे। विदेशों के आर्डर पर भी असर पड़ा था। एक साल में हालात सुधरे जरूर हैं मगर सामान्य नहीं हैं। होजरी उद्योग यहां घर-घर में चलता है। यह उद्योग भी नोटबंदी के बाद से पूरी तरह उबर नहीं सका है। सहारनपुर का कपड़ा व्यापार भी पहचान रखता है। नोटबंदी के बाद कपड़ा व्यापारियों की आय में 50 प्रतिशत तक कमी आई है। यही वजह है कि कपड़ा व्यापारी नोटबंदी की सालगिरह पर विरोध जता रहे हैं।
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