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पालिकाध्यक्ष जियाउददीन अंसारी को हाईकोर्ट से मिली राहत
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:32 PM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। जलकल विभाग फर्जी बिल मामले में हाईकोर्ट ने पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत देते हुए लोवर कोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी है। साथ ही जियाउद्दीन अंसारी को दस दिन के अंदर कोर्ट में हाजिर होकर जमानत कराने के आदेश दिए हैं।
वर्ष 2003 में नगर पालिका के जलकल विभाग में हुए फर्जी बिलिंग के एक मामले में सीजेएम कोर्ट सहारनपुर ने आगामी 16 मार्च तक जियाउद्दीन अंसारी को न्यायालय में पेश होने का सख्त आदेश दिया था। इसके साथ ही न्यायालय में पेश न होने पर उनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू तथा धारा 82 व 83 की कार्रवाई करने के आदेश भी दिए थे। इस मामले में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सीजेएम सहारनपुर के आदेश पर रोक लगा दी गई है। साथ ही जियाउद्दीन अंसारी को आदेश दिया गया कि दस दिन में वे सीजेएम कोर्ट में पेश होकर अपनी जमानत करा लें। बताया गया है कि कोर्ट ने जियाउद्दीन अंसारी को लोकसेवक माना है। जिसके चलते उनकी जमानत बाहर से ही होने की चर्चा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय से पालिकाध्यक्ष समर्थकों में खुशी का माहौल है।
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वर्ष 2003 में नगर पालिका के जलकल विभाग में हुए फर्जी बिलिंग के एक मामले में सीजेएम कोर्ट सहारनपुर ने आगामी 16 मार्च तक जियाउद्दीन अंसारी को न्यायालय में पेश होने का सख्त आदेश दिया था। इसके साथ ही न्यायालय में पेश न होने पर उनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू तथा धारा 82 व 83 की कार्रवाई करने के आदेश भी दिए थे। इस मामले में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सीजेएम सहारनपुर के आदेश पर रोक लगा दी गई है। साथ ही जियाउद्दीन अंसारी को आदेश दिया गया कि दस दिन में वे सीजेएम कोर्ट में पेश होकर अपनी जमानत करा लें। बताया गया है कि कोर्ट ने जियाउद्दीन अंसारी को लोकसेवक माना है। जिसके चलते उनकी जमानत बाहर से ही होने की चर्चा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय से पालिकाध्यक्ष समर्थकों में खुशी का माहौल है।
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