{"_id":"59c2c2944f1c1b98688b59d9","slug":"201505936020-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिद्धपीठ में शारदीय नवरात्र मेला आज से, तैयारियां पूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिद्धपीठ में शारदीय नवरात्र मेला आज से, तैयारियां पूरी
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेहट (सहारनपुर)। वेस्ट यूपी के विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में शारदीय नवरात्र मेला आज से प्रारंभ हो रहा है। जिला पंचायत द्वारा मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। उधर, पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहेंगे और मेला परिसर तीसरी आंख (सीसीटीवी कैमरों) की निगरानी में रहेगा। प्रथम नवरात्र से प्रारंभ हो रहा यह मेला पूर्णिमा तक चलेगा। इस बार मेले में दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जनपद सहारनपुर से 45 किमी दूर शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित आदिशक्ति मां शाकंभरी देवी के पावन मंदिर पर वर्ष में तीन बड़े मेले लगते है। इनमें सबसे बड़ा मेला शारदीय नवरात्र मेला है। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी डा. सुमन लता ने बताया कि जिला पंचायत की ओर से मेला परिसर में 40 स्थाई शौचालय और 160 अस्थाई शौचालय बनाए गए है। मंदिर तक लगाई गई बैडिकेटिंग के ऊपर से एक बड़ा लोहे का पुल और 10 लकड़ी के पुल बनाए गए है। 1100 बैडिकेटिंग लगाई गई है, ताकि माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालु लाइन से चल सके और उन्हें किसी अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। इसके अलावा चार महिला स्नानघर बनाए गए है। मेला परिसर में चार मचान भी बनाए गए है, जिनसे सुरक्षाकर्मी मेला परिसर पर नजर रख सकेंगे।
इसके अलावा मेला परिक्षेत्र पर नजर रखने के लिए 13 सीसीटीवी कैमरे, बिजली की व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए चार जनरेटर लगाए गए है। मेला परिसर में समतलीकरण का कार्य पूर्ण करा दिया गया है।
विज्ञापन
सुरक्षा व्यवस्था
मेले की सुरक्षा के लिए मेला परिसर में अस्थाई कोतवाली बनाई गई है। मेला कोतवाली इंचार्ज विंध्याचल तिवारी ने बताया कि मेले की सुरक्षा के लिए 30 सब इंस्पेक्टर, तीन हैड कांस्टेबल, 150 पुरुष कांस्टेबल, 50 महिला कांस्टेबल, एक प्लाटून पीएसी, एक फायर बिग्रेड की डिमांड की गई थी। लगभग डिमांड किया गया फोर्स मेले की सुरक्षा के लिए पहुंच गया है।
ऐसे कहलाई शाकंभरी
मान्यता है कि प्राचीन काल में दुर्गम नामक दैत्य ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर वरदान में चारों वेद मांग लिए थे। दैत्यों के हाथ चारों वेद लगने से सभी वैदिक क्रियाएं लुप्त हो गई। परिणाम स्वरूप 100 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई, जिसके कारण तीनों लोक में त्राहि-त्राहि मच गई। पृथ्वी पर अकाल पड़ गया। तब देवताओं ने शिवालिक पर्वत श्रंखला की प्रथम शिखा पर मां जगदंबा की घोर तपस्या की। देवताओं की करुण पुकार सुनकर मां भगवती देवताओं के समक्ष प्रकट हो गई। व्याकुल देवताओं ने मां भगवती की प्रार्थना की। इस पर मां जगदंबा ने अपने शत नेत्रों से नौ दिन एवं नौ रात तक अश्कवृष्टि की। इससे सूखी धरा तृप्त हो गई। सभी सागर एवं नदियां जल से भर गई। तभी से नवरात्रों की पूजा का प्रावधान बना और मां जगदंबा को शताक्षी कहा जाने लगा। करुणामयी मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से शाक, फल उत्पन्न किए, जिसके बाद माता शाकंभरी कहलाई।
मान्यता
ऐसी मान्यता है कि मां शाकंभरी मानव के कल्याण के लिए धरती पर अवतरित हुई थी। मां शाकंभरी के तीन शक्तिपीठों की, नौ देवियों में से एक है मां शाकंभरी देवी। मां शाकंभरी धन-धान्य का आशीर्वाद देती है। इनकी आराधना से घर हमेशा शाक यानी अन्न के भंडार से भरा रहता है।
विज्ञापन
जनपद सहारनपुर से 45 किमी दूर शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित आदिशक्ति मां शाकंभरी देवी के पावन मंदिर पर वर्ष में तीन बड़े मेले लगते है। इनमें सबसे बड़ा मेला शारदीय नवरात्र मेला है। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी डा. सुमन लता ने बताया कि जिला पंचायत की ओर से मेला परिसर में 40 स्थाई शौचालय और 160 अस्थाई शौचालय बनाए गए है। मंदिर तक लगाई गई बैडिकेटिंग के ऊपर से एक बड़ा लोहे का पुल और 10 लकड़ी के पुल बनाए गए है। 1100 बैडिकेटिंग लगाई गई है, ताकि माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालु लाइन से चल सके और उन्हें किसी अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। इसके अलावा चार महिला स्नानघर बनाए गए है। मेला परिसर में चार मचान भी बनाए गए है, जिनसे सुरक्षाकर्मी मेला परिसर पर नजर रख सकेंगे।
विज्ञापन
इसके अलावा मेला परिक्षेत्र पर नजर रखने के लिए 13 सीसीटीवी कैमरे, बिजली की व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए चार जनरेटर लगाए गए है। मेला परिसर में समतलीकरण का कार्य पूर्ण करा दिया गया है।
विज्ञापन
सुरक्षा व्यवस्था
मेले की सुरक्षा के लिए मेला परिसर में अस्थाई कोतवाली बनाई गई है। मेला कोतवाली इंचार्ज विंध्याचल तिवारी ने बताया कि मेले की सुरक्षा के लिए 30 सब इंस्पेक्टर, तीन हैड कांस्टेबल, 150 पुरुष कांस्टेबल, 50 महिला कांस्टेबल, एक प्लाटून पीएसी, एक फायर बिग्रेड की डिमांड की गई थी। लगभग डिमांड किया गया फोर्स मेले की सुरक्षा के लिए पहुंच गया है।
ऐसे कहलाई शाकंभरी
मान्यता है कि प्राचीन काल में दुर्गम नामक दैत्य ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर वरदान में चारों वेद मांग लिए थे। दैत्यों के हाथ चारों वेद लगने से सभी वैदिक क्रियाएं लुप्त हो गई। परिणाम स्वरूप 100 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई, जिसके कारण तीनों लोक में त्राहि-त्राहि मच गई। पृथ्वी पर अकाल पड़ गया। तब देवताओं ने शिवालिक पर्वत श्रंखला की प्रथम शिखा पर मां जगदंबा की घोर तपस्या की। देवताओं की करुण पुकार सुनकर मां भगवती देवताओं के समक्ष प्रकट हो गई। व्याकुल देवताओं ने मां भगवती की प्रार्थना की। इस पर मां जगदंबा ने अपने शत नेत्रों से नौ दिन एवं नौ रात तक अश्कवृष्टि की। इससे सूखी धरा तृप्त हो गई। सभी सागर एवं नदियां जल से भर गई। तभी से नवरात्रों की पूजा का प्रावधान बना और मां जगदंबा को शताक्षी कहा जाने लगा। करुणामयी मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से शाक, फल उत्पन्न किए, जिसके बाद माता शाकंभरी कहलाई।
मान्यता
ऐसी मान्यता है कि मां शाकंभरी मानव के कल्याण के लिए धरती पर अवतरित हुई थी। मां शाकंभरी के तीन शक्तिपीठों की, नौ देवियों में से एक है मां शाकंभरी देवी। मां शाकंभरी धन-धान्य का आशीर्वाद देती है। इनकी आराधना से घर हमेशा शाक यानी अन्न के भंडार से भरा रहता है।