{"_id":"5ad644e04f1c1b340a8b50ee","slug":"191523991776-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"103 छात्रों की मौलवी बनने पर हुई दस्तार बंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
103 छात्रों की मौलवी बनने पर हुई दस्तार बंदी
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगोह (सहारनपुर)। मदरसा अशरफ-उल-उलूम रशीदिया में सोमवार रात खत्म बुखारी शरीफ का आयोजन किया गया। उलमा ने बच्चों को शिक्षित करने पर बल देते हुए कहा कि बिना तालीम के कोई भी कौम तरक्की नहीं कर सकती। 103 छात्रों की मौलवी बनने पर दस्तार बंदी की गई।
कार्यक्रम का आरंभ नात-ए-पाक एवं तिलावत-ए-कुरान के साथ किया गया। इसके उपरांत छात्रों को हदीस की सबसे बड़ी किताब बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया गया। हजरत शेख वसीम अहमद, मदरसे के मोहतमिम मुफ्ती खालिद सैफुल्ला, मौलाना मोहम्मद सलमान आदि उलमा ने कहा कि दुनिया एवं आखिरत संवारने के लिए कुरान और हदीस पर जिंदगी गुजारना जरूरी है। कुरान और हदीस की तालीम से दुनिया एवं आखिरत में उंचा मकाम हासिल किया जा सकता है। कहा कि मौजूदा दौर में मुसलमान दीनी तालीम से हट गया है जिससे वह दुनिया में जलील होने के साथ ही अपनी आखिरत भी खराब कर रहा है। उलेमाओं ने मदरसों को दीन के सतून बताते हुए कहा कि इनकी हिफाजत करना हर मुसलमान का फर्ज है। कहा कि कुरान अल्लाह का कलाम है, जिसमें हर मसले का हल मौजूद है। इसके उपरांत 103 छात्रों की मौलवी बनने पर दस्तार बंदी की गई। अंत में मुल्क और कौम की सलामती के लिए दुआ कराई गई।
विज्ञापन
कार्यक्रम का आरंभ नात-ए-पाक एवं तिलावत-ए-कुरान के साथ किया गया। इसके उपरांत छात्रों को हदीस की सबसे बड़ी किताब बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया गया। हजरत शेख वसीम अहमद, मदरसे के मोहतमिम मुफ्ती खालिद सैफुल्ला, मौलाना मोहम्मद सलमान आदि उलमा ने कहा कि दुनिया एवं आखिरत संवारने के लिए कुरान और हदीस पर जिंदगी गुजारना जरूरी है। कुरान और हदीस की तालीम से दुनिया एवं आखिरत में उंचा मकाम हासिल किया जा सकता है। कहा कि मौजूदा दौर में मुसलमान दीनी तालीम से हट गया है जिससे वह दुनिया में जलील होने के साथ ही अपनी आखिरत भी खराब कर रहा है। उलेमाओं ने मदरसों को दीन के सतून बताते हुए कहा कि इनकी हिफाजत करना हर मुसलमान का फर्ज है। कहा कि कुरान अल्लाह का कलाम है, जिसमें हर मसले का हल मौजूद है। इसके उपरांत 103 छात्रों की मौलवी बनने पर दस्तार बंदी की गई। अंत में मुल्क और कौम की सलामती के लिए दुआ कराई गई।
विज्ञापन