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सहारनपुर में नहीं बंद हुआ रावण के दांत का दर्द, मेरठ हुआ रेफर
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:24 AM IST
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सहारनपुर। सहारनपुर हिंसा को लेकर रासुका में निरुद्ध भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण के दांत का दर्द स्थानीय अस्पताल में दूर नहीं हो सका। अस्पताल प्रशासन ने अनुभवी डाक्टर न होने का तर्क देकर रावण को उपचार के लिए मेरठ रेफर कर दिया।
आठ माह से कारागार में बंद भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण को सोमवार शाम दांत में दर्द की शिकायत हुई। जेल से अभिरक्षा में रावण को जिला अस्पताल लाया गया। प्राथमिक जांच पड़ताल के बाद बंदी को मेरठ रेफर कर दिया गया। मंगलवार सुबह ही पुलिस की एक गाड़ी रावण को लेकर मेेरठ पहुंची गई। आरोप है कि रेफर करने के पीछे कहा गया है कि जिला अस्पताल में कोई अच्छा डाक्टर नहीं है। यहां उपचार नहीं हो सकता। इससे सहारनपुर की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अस्पताल में दांत के दर्द तक का उपचार नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। चंद्रशेखर को पहले भी पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड कराने को सीधे मेरठ भेजा था। दो दिन तक रावण मेरठ के मेडिकल कॉलेज में रहा। जबकि जेल में बंद अन्य बंदियों का उपचार अधिकांश उपचार जेल चिकित्सकों द्वारा ही किया जाता है। गंभीर हालत होने पर ही उसे जिला अस्पताल तक लाया जाता है। कई मरीजों के तो अंतिम समय पर ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर उपचार में देरी के चलते बंदी की मौत हुई है। जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा का कहना है कि बंदी चंद्रशेखर उर्फ रावण को पहले जिला अस्पताल भेजा गया था, वहां से ही उसे मेरठ के लिए रेफर किया गया है।
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आठ माह से कारागार में बंद भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण को सोमवार शाम दांत में दर्द की शिकायत हुई। जेल से अभिरक्षा में रावण को जिला अस्पताल लाया गया। प्राथमिक जांच पड़ताल के बाद बंदी को मेरठ रेफर कर दिया गया। मंगलवार सुबह ही पुलिस की एक गाड़ी रावण को लेकर मेेरठ पहुंची गई। आरोप है कि रेफर करने के पीछे कहा गया है कि जिला अस्पताल में कोई अच्छा डाक्टर नहीं है। यहां उपचार नहीं हो सकता। इससे सहारनपुर की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अस्पताल में दांत के दर्द तक का उपचार नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। चंद्रशेखर को पहले भी पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड कराने को सीधे मेरठ भेजा था। दो दिन तक रावण मेरठ के मेडिकल कॉलेज में रहा। जबकि जेल में बंद अन्य बंदियों का उपचार अधिकांश उपचार जेल चिकित्सकों द्वारा ही किया जाता है। गंभीर हालत होने पर ही उसे जिला अस्पताल तक लाया जाता है। कई मरीजों के तो अंतिम समय पर ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर उपचार में देरी के चलते बंदी की मौत हुई है। जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा का कहना है कि बंदी चंद्रशेखर उर्फ रावण को पहले जिला अस्पताल भेजा गया था, वहां से ही उसे मेरठ के लिए रेफर किया गया है।
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