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इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल प्रणाली के तहत एक साल तक कार्रवाई न करने की मांग
Updated Thu, 12 Apr 2018 12:44 AM IST
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सहारनपुर। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की बैठक में इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल प्रणाली लागू किए जाने को लेकर विचार विमर्श किया गया और इसमें आने वाली समस्याओं के निराकरण पर चर्चा की गई। परिवहन कारोबारियों ने एक वर्ष तक गलती पर कार्रवाई न किए जाने की मांग की।
एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार पीपी सिंह ने कहा कि 15 अप्रैल से इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल की प्रणाली को चालू किया जा रहा है। इस व्यवस्था से परिवहन व्यवसायी अनभिज्ञ हैं। इसके लिए ट्रांसपोर्टरों को अनेकों संसाधनों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। महासचिव ललित पोपली एवं संयोजक राजीव कालिया ने कहा कि ई-वे बिल प्रणाली जीएसटी प्रणाली के समकक्ष व्यवस्था है, जबकि जीएसटी प्रणाली लागू होने पर परिवहन व्यवसायी को केवल दोनों पार्टियों का माल भेजने वाली और पाने वानी का जीएसटी नंबर या आधार कार्ड अंकित करना पड़ रहा है, लेकिन ई-वे बिल पार्ट टू को जनरेट करने के लिए ऑपरेटर, कंप्यूटर एवं प्रिंटर की व्यवस्था के साथ इंटरनेट प्रणाली को भी अपनाने की प्रक्रिया करनी पड़ सकती है। अध्यक्ष ब्रित चावला ने कहा कि देश के 5 राज्यों में सामान ढुलाई होने वाले सामानों पर 15 अप्रैल से ई-वे बिल प्रणाली लागू हो रही है। सरकार एक अप्रैल से ही 50 हजार रुपये या इससे अधिक मूल्य के सामानों के अंतरराज्यीय परिवहन पर ई-वे बिल प्रणाली को लागू कर दिया गया है। उन्होंने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर मांग की है कि ई-वे बिल इंट्रा स्टेट प्रणाली लागू होने के उपरांत एक वर्ष तक चेकिंग प्रणाली में सख्ती न बरती जाए और कोई त्रुटि पाई जाती है तो चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए। उन्होंने लोगों से अपील की है कि रात 12 बजे तक बुकिंग कराए जाने वाला सामान ट्रांसपोर्टरों पर बुक करवा दिया जाए। जिससे परिवहन व्यवसायी को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार पीपी सिंह ने कहा कि 15 अप्रैल से इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल की प्रणाली को चालू किया जा रहा है। इस व्यवस्था से परिवहन व्यवसायी अनभिज्ञ हैं। इसके लिए ट्रांसपोर्टरों को अनेकों संसाधनों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। महासचिव ललित पोपली एवं संयोजक राजीव कालिया ने कहा कि ई-वे बिल प्रणाली जीएसटी प्रणाली के समकक्ष व्यवस्था है, जबकि जीएसटी प्रणाली लागू होने पर परिवहन व्यवसायी को केवल दोनों पार्टियों का माल भेजने वाली और पाने वानी का जीएसटी नंबर या आधार कार्ड अंकित करना पड़ रहा है, लेकिन ई-वे बिल पार्ट टू को जनरेट करने के लिए ऑपरेटर, कंप्यूटर एवं प्रिंटर की व्यवस्था के साथ इंटरनेट प्रणाली को भी अपनाने की प्रक्रिया करनी पड़ सकती है। अध्यक्ष ब्रित चावला ने कहा कि देश के 5 राज्यों में सामान ढुलाई होने वाले सामानों पर 15 अप्रैल से ई-वे बिल प्रणाली लागू हो रही है। सरकार एक अप्रैल से ही 50 हजार रुपये या इससे अधिक मूल्य के सामानों के अंतरराज्यीय परिवहन पर ई-वे बिल प्रणाली को लागू कर दिया गया है। उन्होंने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर मांग की है कि ई-वे बिल इंट्रा स्टेट प्रणाली लागू होने के उपरांत एक वर्ष तक चेकिंग प्रणाली में सख्ती न बरती जाए और कोई त्रुटि पाई जाती है तो चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए। उन्होंने लोगों से अपील की है कि रात 12 बजे तक बुकिंग कराए जाने वाला सामान ट्रांसपोर्टरों पर बुक करवा दिया जाए। जिससे परिवहन व्यवसायी को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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