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शहरियों की अपेक्षा ग्रामीण मतदाता अधिक जागरूक दिखे
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:22 AM IST
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सहारनपुर। निकाय चुनाव के तहत जनपद में बुधवार को मेयर, चेयरमैन तथा पार्षद और सभासद, सदस्यों के लिए हुई वोटिंग में शहरी मतदाताओं की तुलना में ग्रामीण मतदाता अधिक उत्साहित नजर आए। एक ओर जहां देहात के मतदान केंद्रों पर सुबह से ही कतारें लग गईं थी, वहीं शहर के अनेक मतदान केंद्रों पर दस बजे तक सन्नाटा पसरा रहा। यही वजह रही कि शहर का मतदान प्रतिशत देहात के मतदान प्रतिशत से कम रहा।
जिले में एक नगर निगम के अलावा छह नगर पंचायत और चार नगर पालिका के लिए वोट डाले गए। शहर के हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों के अनेक मतदान केंद्रों पर सुबह दस बजे तक काफी कम संख्या में लोग वोट डालने पहुंचे थे, जबकि मुस्लिम और दलित आबादी वाले क्षेत्रों में सुबह से कतारें लगी थीं। हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों दस बजे के बाद रौनक आना शुरू हुआ। रामनगर के प्राथमिक विद्यालय में बने मतदान केंद्र पर गांव के मतदाताओं के लिए बने बूथ नंबर दो और तीन पर कतारें नजर आईं, जबकि बूथ नंबर एक शहर की कॉलोनियों के लिए था, जिसपर सन्नाटा पसरा नजर आया। शहर के अनेक मतदान केंद्रों पर 11 और 12 बजे के बाद ही थोड़ी रौनक नजर आई। आंकड़े देखें तो दोपहर दो बजे तक शहर में केवल 40 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि चिलकाना में 61, सरसावा, रामपुर मनिहारान और नानौता में 55 प्रतिशत तक वोटिंग हुई। बाकी नगर पंचायतों और पालिकाओं में भी दो बजे तक 45 फीसदी से अधिक वोटिंग होना शहर की अपेक्षा देहात में अधिक मतदान होना इसका बेहतर उदाहरण है।
ज्यादातर मतदाताओं ने मनाया े
बुधवार को वोट डालने के लिए घरों से निकलने की बजाय शहर के ज्यादातर मतदाता घरों में ही रहे। शहर में मतदान प्रतिशत कम रहने की प्रमुख वजह भी यह भी रही कि लोगों ने मतदान डे को छुट्टी के रूप में मनाया। वोट न करने वालों में बड़ी संख्या उनकी रही, जो अपने आपको पढ़ा लिखा बताते हैं। मुस्लिम और दलित क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर लगी कतारें इसका पुख्ता प्रमाण हैं।
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बाजारों और सड़कों पर पसरा रहा सन्नाटा
मतदान की वजह से बुधवार को शहर के तमाम बाजारों और मुख्य मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहा। दुकानें और तमाम प्रतिष्ठान बंद रहने के साथ ही ई-रिक्शा और टेंपो आदि तक नहीं चले। शाम चार बजे के बाद सब्जी मंडी समेत कुछ बाजारों में ग्राहक खरीदारी करने निकले। इसके अलावा रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी सन्नाटा पसरा रहा। अनेक बसों को इक्का-दुक्का सवारियों के साथ ही रवाना करना पड़ा।
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जिले में एक नगर निगम के अलावा छह नगर पंचायत और चार नगर पालिका के लिए वोट डाले गए। शहर के हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों के अनेक मतदान केंद्रों पर सुबह दस बजे तक काफी कम संख्या में लोग वोट डालने पहुंचे थे, जबकि मुस्लिम और दलित आबादी वाले क्षेत्रों में सुबह से कतारें लगी थीं। हिंदू आबादी वाले क्षेत्रों दस बजे के बाद रौनक आना शुरू हुआ। रामनगर के प्राथमिक विद्यालय में बने मतदान केंद्र पर गांव के मतदाताओं के लिए बने बूथ नंबर दो और तीन पर कतारें नजर आईं, जबकि बूथ नंबर एक शहर की कॉलोनियों के लिए था, जिसपर सन्नाटा पसरा नजर आया। शहर के अनेक मतदान केंद्रों पर 11 और 12 बजे के बाद ही थोड़ी रौनक नजर आई। आंकड़े देखें तो दोपहर दो बजे तक शहर में केवल 40 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि चिलकाना में 61, सरसावा, रामपुर मनिहारान और नानौता में 55 प्रतिशत तक वोटिंग हुई। बाकी नगर पंचायतों और पालिकाओं में भी दो बजे तक 45 फीसदी से अधिक वोटिंग होना शहर की अपेक्षा देहात में अधिक मतदान होना इसका बेहतर उदाहरण है।
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ज्यादातर मतदाताओं ने मनाया े
बुधवार को वोट डालने के लिए घरों से निकलने की बजाय शहर के ज्यादातर मतदाता घरों में ही रहे। शहर में मतदान प्रतिशत कम रहने की प्रमुख वजह भी यह भी रही कि लोगों ने मतदान डे को छुट्टी के रूप में मनाया। वोट न करने वालों में बड़ी संख्या उनकी रही, जो अपने आपको पढ़ा लिखा बताते हैं। मुस्लिम और दलित क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर लगी कतारें इसका पुख्ता प्रमाण हैं।
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बाजारों और सड़कों पर पसरा रहा सन्नाटा
मतदान की वजह से बुधवार को शहर के तमाम बाजारों और मुख्य मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहा। दुकानें और तमाम प्रतिष्ठान बंद रहने के साथ ही ई-रिक्शा और टेंपो आदि तक नहीं चले। शाम चार बजे के बाद सब्जी मंडी समेत कुछ बाजारों में ग्राहक खरीदारी करने निकले। इसके अलावा रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी सन्नाटा पसरा रहा। अनेक बसों को इक्का-दुक्का सवारियों के साथ ही रवाना करना पड़ा।