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दुकानें तोड़ने पर शासन ने डीएम से मांगा जवाब
Updated Thu, 10 May 2018 11:45 PM IST
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सहारनपुर। सिटी मजिस्ट्रेट की अगुवाई में नगर निगम द्वारा पुल खुमरान पर 44 वर्ष पुरानी दुकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद सड़क पर आए परिवारों की पीड़ा को शासन ने गंभीरता से लिया है। इस संबंध में शासन के द्वारा डीएम से जवाब मांगा गया है, जिसके बाद डीएम ने नगर निगम से दुकानों की फाइल तलब की है।
पीडब्ल्यूडी के द्वारा पुल खुमरान का चौड़ीकरण किया जाना है। पुल के चौड़ीकरण के लिए पुल के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए चिह्नित किया गया। इस अतिक्रमण के साथ नगर निगम ने अपनी 1964 में बनी और व्यापारियों को अलाट की गई चार दुकानों को भी हटाने का निर्णय लिया। सात मई को सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार के नेतृत्व में नगर निगम की टीम ने दो अवैध दुकानों के साथ चार आवंटित दुकानों को भी ध्वस्त कर दिया। दुकानदार दुकानों को बचाने के लिए अफसरों के सामने गिडगिड़ाते रहे। नहीं मानने पर उन्होंने प्रशासन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी खिलाफ नारेबाजी की थी। ध्वस्तीकरण के बाद से अनेक व्यापारी संगठन पीड़ितों के पक्ष में उतर आए हैं। डीएम के अलावा सांसद और मेयर से मिलकर पीड़ितों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की जा रही है। व्यापारियों के विरोध को देखते हुए सांसद राघव लखनपाल शर्मा और मेयर संजीव वालिया ने इस संबंध में शासन को अवगत कराया था। साथ ही अधिकारियों पर भी मनमानी करने का आरोप लगाया था। शासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम से जवाब मांगा है, जिसके बाद डीएम पीके पांडेय ने नगर निगम से दुकानों की फाइल तलब की है।
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पीडब्ल्यूडी के द्वारा पुल खुमरान का चौड़ीकरण किया जाना है। पुल के चौड़ीकरण के लिए पुल के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए चिह्नित किया गया। इस अतिक्रमण के साथ नगर निगम ने अपनी 1964 में बनी और व्यापारियों को अलाट की गई चार दुकानों को भी हटाने का निर्णय लिया। सात मई को सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार के नेतृत्व में नगर निगम की टीम ने दो अवैध दुकानों के साथ चार आवंटित दुकानों को भी ध्वस्त कर दिया। दुकानदार दुकानों को बचाने के लिए अफसरों के सामने गिडगिड़ाते रहे। नहीं मानने पर उन्होंने प्रशासन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी खिलाफ नारेबाजी की थी। ध्वस्तीकरण के बाद से अनेक व्यापारी संगठन पीड़ितों के पक्ष में उतर आए हैं। डीएम के अलावा सांसद और मेयर से मिलकर पीड़ितों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की जा रही है। व्यापारियों के विरोध को देखते हुए सांसद राघव लखनपाल शर्मा और मेयर संजीव वालिया ने इस संबंध में शासन को अवगत कराया था। साथ ही अधिकारियों पर भी मनमानी करने का आरोप लगाया था। शासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम से जवाब मांगा है, जिसके बाद डीएम पीके पांडेय ने नगर निगम से दुकानों की फाइल तलब की है।
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