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पंडित रोनू मजूमदार ने बांसुरी वादन से किया मंत्रमुग्ध
Updated Thu, 30 Aug 2018 01:08 AM IST
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पंडित रोनू मजूमदार ने बांसुरी वादन से किया मंत्रमुग्ध
गंगोह। शोभित विश्वविद्यालय में स्पिक मैके सहारनपुर चैप्टर की विरासत श्रृंखला के तहत सृजन द स्पार्क संस्था की ओर से प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार ने बांसुरी वादन कर बच्चों को भारतीय वाद्ययंत्रों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम का उद्घाटन कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र, कुलपति डा. डीके कौशिक, कुलसचिव डा. महिपाल सिंह एवं आमंत्रित अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कुंवर शेखर विजेंद्र ने कहा कि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति को भूल रही है। इससे देश में पाश्चात्य सभ्यता हावी होती जा रही है। इससे बचने के लिए सभी को एकजुट होकर युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति जिज्ञासा और जागरूकता पैदा करनी होगी। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से संस्था लंबे समय से स्पिक मैके के साथ मिलकर विभिन्न स्कूलों और क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों एवं बच्चों को भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं कलाओं को युवाओं के बीच प्रचारित-प्रसारित करने में स्पिक मैके के योगदान को प्रशंसनीय बताते हुए इसके लिए स्पिक मैके के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विवि में स्पिक मैके द्वारा एक सप्ताह की कार्यशाला कराने की बात कही। कार्यक्रम समन्वयक डा. प्रशांत कुमार ने पंडित रोनू मजूमदार के बारे में बताया कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2014-15, आल इंडिया रेडियो अवार्ड 1981, आदित्य बिड़ला विक्रम अवार्ड 1996 प्राप्त पंडित रोनू मजूमदार, भारत रत्न पंडित रविशंकर के शिष्य हैं। पंडित जी ने आर्ट ऑफ लिविंग के अंतर्गत वेणुनाद नामक संगीत कार्यक्रम का संचालन किया जिसमें एक मंच पर एक साथ 5378 बांसुरी वादकों ने भाग लिया था, जोकि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज है। पं. मजूमदार ने बांसुरी वादन की शुरूआत वृंदावनी सारंग राग से की। बीच बीच में तबले के साथ बंदिशों और बांसुरी की जुगलबंदी की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दुर्जय भौमिक ने तबले पर और कल्पेश साचला ने बांसुरी पर पं. मजूमदार का साथ देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। मजूमदार ने रघुपति राघव राजा राम एवं वंदे मातरम की धुन से सभी को मोहित कर दिया। उन्होने छात्र-छात्राओं से अपने वादन के जरिए संवाद किया एवं भारतीय संगीत की गहराई और शुद्धता से वाकिफ कराया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। केयर टेकर सूफी जहीर अख्तर, स्पीक मैके सहारनपुर चैप्टर के समन्वयक पंकज मल्होत्रा, राजीव उपाध्याय आदि रहे।
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गंगोह। शोभित विश्वविद्यालय में स्पिक मैके सहारनपुर चैप्टर की विरासत श्रृंखला के तहत सृजन द स्पार्क संस्था की ओर से प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार ने बांसुरी वादन कर बच्चों को भारतीय वाद्ययंत्रों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम का उद्घाटन कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र, कुलपति डा. डीके कौशिक, कुलसचिव डा. महिपाल सिंह एवं आमंत्रित अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कुंवर शेखर विजेंद्र ने कहा कि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति को भूल रही है। इससे देश में पाश्चात्य सभ्यता हावी होती जा रही है। इससे बचने के लिए सभी को एकजुट होकर युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति जिज्ञासा और जागरूकता पैदा करनी होगी। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से संस्था लंबे समय से स्पिक मैके के साथ मिलकर विभिन्न स्कूलों और क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों एवं बच्चों को भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं कलाओं को युवाओं के बीच प्रचारित-प्रसारित करने में स्पिक मैके के योगदान को प्रशंसनीय बताते हुए इसके लिए स्पिक मैके के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विवि में स्पिक मैके द्वारा एक सप्ताह की कार्यशाला कराने की बात कही। कार्यक्रम समन्वयक डा. प्रशांत कुमार ने पंडित रोनू मजूमदार के बारे में बताया कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2014-15, आल इंडिया रेडियो अवार्ड 1981, आदित्य बिड़ला विक्रम अवार्ड 1996 प्राप्त पंडित रोनू मजूमदार, भारत रत्न पंडित रविशंकर के शिष्य हैं। पंडित जी ने आर्ट ऑफ लिविंग के अंतर्गत वेणुनाद नामक संगीत कार्यक्रम का संचालन किया जिसमें एक मंच पर एक साथ 5378 बांसुरी वादकों ने भाग लिया था, जोकि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज है। पं. मजूमदार ने बांसुरी वादन की शुरूआत वृंदावनी सारंग राग से की। बीच बीच में तबले के साथ बंदिशों और बांसुरी की जुगलबंदी की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दुर्जय भौमिक ने तबले पर और कल्पेश साचला ने बांसुरी पर पं. मजूमदार का साथ देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। मजूमदार ने रघुपति राघव राजा राम एवं वंदे मातरम की धुन से सभी को मोहित कर दिया। उन्होने छात्र-छात्राओं से अपने वादन के जरिए संवाद किया एवं भारतीय संगीत की गहराई और शुद्धता से वाकिफ कराया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। केयर टेकर सूफी जहीर अख्तर, स्पीक मैके सहारनपुर चैप्टर के समन्वयक पंकज मल्होत्रा, राजीव उपाध्याय आदि रहे।
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