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...मुखतलिफ खुश्बुओं का संगम है जिसको हिंदुस्तान कहते हैं
Updated Sat, 21 Apr 2018 12:36 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मेला पंडाल में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने देर रात्रि तक उम्दा कलाम पेश कर श्रोताओं की जमकर दाद बटोरी।
बृहस्पतिवार की रात्रि आयोजित हुए मुशायरे का उद्घाटन पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी व बसपा नेता माजिद अली ने फीता काटकर व मास्टर रिहान ने शमा रोशन कर किया। प्रसिद्ध शायर माजिद देवबंदी ने मुल्क से मोहब्बत को कुछ यूं बयां किया..जो मोहब्बतों की बात करता है, उसको हम अपनी जान कहते हैं, मुख्तलिफ खुश्बुओं का संगम है जिसको हिंदुस्तान कहते हैं। हाशिम फिरोजाबादी ने कहा..जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए। निगहत अमरोहवी ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए..वक्त की भीड़ में हरगिज नहीं खोने दूंगी, मैं तुझे और किसी का नहीं होने दूंगी। मिसम गोपालपुरी ने पढ़ा..दिल में जिसने भी जला रखा है इमां का दीया, मेरा दावा है वो गद्दार नहीं हो सकता। सरवर कमाल ने कहा..पेड़ बदी का फलता फूलता रहता है, खुश होकर शैतान उछलता रहता है, कानों में आती है अजानों की आवाज और कमरे में टीवी चलता रहता है। हास्य व्यंग्य शायर सज्जाद झंझट ने गुदगुदाते हुए कहा..सुंदर सी एक नारी जिसका राधे मां है नाम, खुश्बू रामपुरी ने कुछ यूं बयां किया..नहीं जब दुश्मनी उनसे किनारा क्यों किया जाए, जरा सी बात पर इतना तमाशा क्यों किया जाए। काविश रुदोलवी ने पढ़ा..अपने कद से बढ़के भी मत उड़ा करो साहब, दायरे में रहकर ही कुछ कहा करो साहब सुनाकर देर रात्रि तक श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी। इनके अलावा शाह खालिद, अली बाराबंकी, फलक सुल्तानपुरी, साहिल प्रतापगढ़ी, अलीम वाजिद, वसीम राज्जुपुरी, नदीम अनवर ने भी कलाम पेश किए। अध्यक्षता बसपा नेता हाजी फजलुर्रहमान व संचालन गुलजार जिगर ने किया। इस मौके पर मुशायरा संयोजक असलम मुखिया, सह संयोजक कलीम कुरैशी के अलावा पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी, वली वकास, डा. कमरुज्जमा कुरैशी, जमालुद्दीन, अय्यूब बेग, आसिफ अंसारी, कय्यूम कुरैशी, फैसल खान, सलमान वकास, तंजीम खान आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार की रात्रि आयोजित हुए मुशायरे का उद्घाटन पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी व बसपा नेता माजिद अली ने फीता काटकर व मास्टर रिहान ने शमा रोशन कर किया। प्रसिद्ध शायर माजिद देवबंदी ने मुल्क से मोहब्बत को कुछ यूं बयां किया..जो मोहब्बतों की बात करता है, उसको हम अपनी जान कहते हैं, मुख्तलिफ खुश्बुओं का संगम है जिसको हिंदुस्तान कहते हैं। हाशिम फिरोजाबादी ने कहा..जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए। निगहत अमरोहवी ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए..वक्त की भीड़ में हरगिज नहीं खोने दूंगी, मैं तुझे और किसी का नहीं होने दूंगी। मिसम गोपालपुरी ने पढ़ा..दिल में जिसने भी जला रखा है इमां का दीया, मेरा दावा है वो गद्दार नहीं हो सकता। सरवर कमाल ने कहा..पेड़ बदी का फलता फूलता रहता है, खुश होकर शैतान उछलता रहता है, कानों में आती है अजानों की आवाज और कमरे में टीवी चलता रहता है। हास्य व्यंग्य शायर सज्जाद झंझट ने गुदगुदाते हुए कहा..सुंदर सी एक नारी जिसका राधे मां है नाम, खुश्बू रामपुरी ने कुछ यूं बयां किया..नहीं जब दुश्मनी उनसे किनारा क्यों किया जाए, जरा सी बात पर इतना तमाशा क्यों किया जाए। काविश रुदोलवी ने पढ़ा..अपने कद से बढ़के भी मत उड़ा करो साहब, दायरे में रहकर ही कुछ कहा करो साहब सुनाकर देर रात्रि तक श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी। इनके अलावा शाह खालिद, अली बाराबंकी, फलक सुल्तानपुरी, साहिल प्रतापगढ़ी, अलीम वाजिद, वसीम राज्जुपुरी, नदीम अनवर ने भी कलाम पेश किए। अध्यक्षता बसपा नेता हाजी फजलुर्रहमान व संचालन गुलजार जिगर ने किया। इस मौके पर मुशायरा संयोजक असलम मुखिया, सह संयोजक कलीम कुरैशी के अलावा पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी, वली वकास, डा. कमरुज्जमा कुरैशी, जमालुद्दीन, अय्यूब बेग, आसिफ अंसारी, कय्यूम कुरैशी, फैसल खान, सलमान वकास, तंजीम खान आदि मौजूद रहे।
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