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ब्रह्म कुमारी दादी प्रकाश मणि का दसवां स्मृतिदिवस मनाया
Updated Tue, 22 Aug 2017 12:48 AM IST
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ब्रह्म कुमारी दादी प्रकाश मणि का दसवां स्मृतिदिवस मनाया
गंगोह (सहारनपुर)। ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थानीय शाखा में संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशिक्षिका दादी प्रकाश मणि के दसवें स्मृति दिवस को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाते हुए उनके द्वारा दिखाये गये सद्मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया गया।
केंद्र संचालिका बीके राजयोगिनी बहन संतोष ने कहा कि ब्रह्म बाबा के अव्यक्त होने के 38 वर्षों तक दादी प्रकाशमणि ही विवि की मुख्य प्रशासिका रही। उन्हाेंने ईश्वरीय यज्ञ का कर्मठता एवं कुशलता से संचालन किया। सभी भाई-बहनों की प्यार से पालना की और ईश्वरीय कार्य को विश्वव्यापी बनाया। दादी प्रकाशमणि को माता, मार्गदर्शक और प्रेरक बताते हुए उन्होंने कहा कि दादी जी के जीवन का हर पहलू दर्शनीय और वंदनीय है। एमजेएफ अरविंद पाल कपूर ने कहा कि दादी जी में संपूर्ण मानव जाति के लिए ममता और वात्सल्य कूट कूटकर भरा था। उनके कुशल नेतृत्व में इस कार्य को नई दिशा मिली है। बीके प्रीति एवं बीके कोमल ने राजयोग का अभ्यास कराया। दादी प्रकाशमणि को श्रद्धासुमन समर्पित किए गए। समापन पर सभी ने ब्रह्म जी के भोजन का प्रशाद ग्रहण किया। बीके संजय, बहन नीलम, विजयपाल, मिंटू, संजय, उमंग गर्ग, सचिन, महेंद्र, रमेश थापा, राकेश कुमार, बिजेंद्र सैनी, प्रदीप गर्ग रविकांत गुप्ता, ओमप्रकाश, रामनाथ, जितेंद्र, राहुल आदि रहे।
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गंगोह (सहारनपुर)। ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थानीय शाखा में संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशिक्षिका दादी प्रकाश मणि के दसवें स्मृति दिवस को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाते हुए उनके द्वारा दिखाये गये सद्मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया गया।
केंद्र संचालिका बीके राजयोगिनी बहन संतोष ने कहा कि ब्रह्म बाबा के अव्यक्त होने के 38 वर्षों तक दादी प्रकाशमणि ही विवि की मुख्य प्रशासिका रही। उन्हाेंने ईश्वरीय यज्ञ का कर्मठता एवं कुशलता से संचालन किया। सभी भाई-बहनों की प्यार से पालना की और ईश्वरीय कार्य को विश्वव्यापी बनाया। दादी प्रकाशमणि को माता, मार्गदर्शक और प्रेरक बताते हुए उन्होंने कहा कि दादी जी के जीवन का हर पहलू दर्शनीय और वंदनीय है। एमजेएफ अरविंद पाल कपूर ने कहा कि दादी जी में संपूर्ण मानव जाति के लिए ममता और वात्सल्य कूट कूटकर भरा था। उनके कुशल नेतृत्व में इस कार्य को नई दिशा मिली है। बीके प्रीति एवं बीके कोमल ने राजयोग का अभ्यास कराया। दादी प्रकाशमणि को श्रद्धासुमन समर्पित किए गए। समापन पर सभी ने ब्रह्म जी के भोजन का प्रशाद ग्रहण किया। बीके संजय, बहन नीलम, विजयपाल, मिंटू, संजय, उमंग गर्ग, सचिन, महेंद्र, रमेश थापा, राकेश कुमार, बिजेंद्र सैनी, प्रदीप गर्ग रविकांत गुप्ता, ओमप्रकाश, रामनाथ, जितेंद्र, राहुल आदि रहे।
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