{"_id":"5ce5960cbdec22076b5efdca","slug":"155855007915-saharanpur-news74","type":"story","status":"publish","title_hn":"आध्यात्मिकता व्यक्तित्व के विकास की कुंजी है - आत्मानुभवी महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आध्यात्मिकता व्यक्तित्व के विकास की कुंजी है - आत्मानुभवी महाराज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आध्यात्मिकता व्यक्तित्व के विकास की कुंजी है - आत्मानुभवी महाराज
सरसावा (सहारनपुर)। आत्मानुभवी महाराज ने कहा है कि आध्यात्मिकता व्यक्तित्व के विकास की कुंजी है। आध्यात्मिकता से बौद्धिक विकास होता है। धार्मिकता से प्रकाशित होकर मनुष्य अपने परिवार ही नहीं समाज और राष्ट्र को भी प्रकाशित करता है।
आत्मानुभवी महाराज बुधवार को टीचर कालोनी के महादेव मंदिर में दूसरे दिन भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षित युवा और बुद्धिजीवी वर्ग भी धर्म के विपरीत आचरण कर वैचारिक प्रदूषण से ग्रसित होता जा रहा है। जबकि अध्यात्मिक ज्ञान से मनुष्य का मानसिक शुद्धिकरण होता है। इससे वैचारिक उत्थान संभव है। इसलिए वर्तमान में आध्यात्मिक ज्ञान के पठन-पाठन और प्रचार, प्रसार की नितांत आवश्यकता है। इससे मनुष्य प्रज्ञावान बनता है और सत्यनिष्ठा से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। तभी दानवीय शक्तियां धराशायी हो सकतीं हैं। आत्मानुभवि महाराज ने कहा कि धार्मिक गतिविधियों से ही समुचित मानव जाति की आत्मा को जगाया जा सकता है। क्योंकि भारत की सोई हुई आत्मा को जागरूक करना मनुष्य की सर्वोच्च जरूरत है।
कथा से पूर्व यजमान जयनारायण गोयल ने कथा वाचक आत्मानुभवि महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया। सभासद संजय शर्मा, दिनेश गुप्ता, क्षितिज शर्मा, अश्विनी दीक्षित, रजनी शर्मा, गोल्डी शर्मा, चंद्रभान शर्मा, सीमा, रीतू, संगीता समेत अनेक भक्तों ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरसावा (सहारनपुर)। आत्मानुभवी महाराज ने कहा है कि आध्यात्मिकता व्यक्तित्व के विकास की कुंजी है। आध्यात्मिकता से बौद्धिक विकास होता है। धार्मिकता से प्रकाशित होकर मनुष्य अपने परिवार ही नहीं समाज और राष्ट्र को भी प्रकाशित करता है।
आत्मानुभवी महाराज बुधवार को टीचर कालोनी के महादेव मंदिर में दूसरे दिन भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षित युवा और बुद्धिजीवी वर्ग भी धर्म के विपरीत आचरण कर वैचारिक प्रदूषण से ग्रसित होता जा रहा है। जबकि अध्यात्मिक ज्ञान से मनुष्य का मानसिक शुद्धिकरण होता है। इससे वैचारिक उत्थान संभव है। इसलिए वर्तमान में आध्यात्मिक ज्ञान के पठन-पाठन और प्रचार, प्रसार की नितांत आवश्यकता है। इससे मनुष्य प्रज्ञावान बनता है और सत्यनिष्ठा से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। तभी दानवीय शक्तियां धराशायी हो सकतीं हैं। आत्मानुभवि महाराज ने कहा कि धार्मिक गतिविधियों से ही समुचित मानव जाति की आत्मा को जगाया जा सकता है। क्योंकि भारत की सोई हुई आत्मा को जागरूक करना मनुष्य की सर्वोच्च जरूरत है।
विज्ञापन
कथा से पूर्व यजमान जयनारायण गोयल ने कथा वाचक आत्मानुभवि महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया। सभासद संजय शर्मा, दिनेश गुप्ता, क्षितिज शर्मा, अश्विनी दीक्षित, रजनी शर्मा, गोल्डी शर्मा, चंद्रभान शर्मा, सीमा, रीतू, संगीता समेत अनेक भक्तों ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
विज्ञापन