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जमीयत ने उतराखंड हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती-Meerut

Thu, 06 Sep 2018 12:13 AM IST
Updated Thu, 06 Sep 2018 12:13 AM IST
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जमीयत ने उतराखंड हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती-Meerut
देवबंद (सहारनपुर)। फतवों पर रोक संबंधी उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले को जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने एक पंचायती फरमान को फतवा व अखबार में प्रकाशित खबर को आधार बनाया, जो गलत है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत भी है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
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मौलाना महमूद ने याचिका में कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट का निर्णय संविधान की धारा 141 के विपरीत है, जिसमें किसी भी कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ निर्णय का हक नहीं है। उक्त विश्वलोचन मदान केस बनाम भारत सरकार के निर्णय के विपरीत है। संविधान की धारा 26 (बी) में सभी को धार्मिक समस्याओं के स्वयं प्रबंधन का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया गया है कि हाईकोर्ट ने लक्सर (हरिद्वार) में पंचायत के फरमान को फतवा समझने की गलती की है। जिसे लेकर प्रकाशित समाचार से भी यह सिर्फ पंचायती फरमान प्रतीत होता है। फतवा किसी पंचायत से नहीं बल्कि दारुल इफ्ता (फतवा विभाग) या विद्वान मुफ्ती ही देते हैं, जो सिर्फ पूछने वाले के लिए शरई मशविरा और मार्गदर्शन होता है। न तो यह किसी पर बाध्यकारी होता है न ही इसकी कानूनी हैसियत है। विभिन्न नजीरों के जरिए सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर तुरंत रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला अत्यधिक गंभीर विषय है। याद रहे कि 30 अगस्त को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक खबर के आधार पर फतवे और पंचायती फरमान को गैरकानूनी करार देते हुए इन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था।
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