{"_id":"5ace5ccc4f1c1b853d8b4a64","slug":"121523473612-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिमा मरम्मत को पुलिस ने हायर कर रखे है शिल्पकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिमा मरम्मत को पुलिस ने हायर कर रखे है शिल्पकार
Updated Thu, 12 Apr 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रतिमा टूटे तो याद आते हैं मोहन
सहारनपुर। महापुरुषों और मंदिरों की प्रतिमा और मूर्ति तोड़े जाने की घटनाओं के मद्देनजर पुलिस ने शिल्पकार परिवार को हायर कर रखा हैं। पुलिस क्षतिग्रस्त प्रतिमा अथवा मूर्ति की मरम्मत में इसी परिवार की मदद लेती है। शिल्पकार मोहनलाल की कई पीढ़ियां पुलिस के लिए संकट मोचक बनी हुई हैं। मूर्ति मरम्मत के साथ शिल्पकार परिवार ने पुलिस को समय-समय पर सहारनपुर रेंज के कई जिलों में नई प्रतिमा अथवा मूर्ति भी उपलब्ध कराए हैं।
पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने को एक साथ कई फ्रंट पर काम करती है। पुलिस की बाहरी ड्यूटियां तो छिपी नहीं हैं, मगर शांति व्यवस्था बनाए रखने को कुछ ऐसे काम हैं, जिन्हें पुलिस पर्दे के पीछे से बखूबी करती है। धार्मिक स्थलों और दीवारों पर आपत्तिजनक पोस्टर अथवा नारे लिखकर असामाजिक तत्व माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। इसी के मद्देनजर हर थाना मोबाइल में पेंट, काले रंग आदि की व्यवस्था रहती है, ताकि समय रहते आपत्तिजनक नारों अथवा टिप्पणी को मिटाकर माहौल को संभाला जा सके। इसी तरह महापुरुषों और धार्मिक स्थलों की प्रतिमाओं और मूर्तियों की मरम्मत के साथ नई मूर्तियों की व्यवस्था करने में नवाबगंज के शिल्पकार मोहन लाल के परिवार को पुलिस संकट मोचक के रुप में इस्तेमाल करती रही है। शहर में मंगलवार में माधवपुरम में डा आंबेडकर की मूर्ति क्षतिग्रस्त हुई तो पुलिस ने मोहन लाल के परिवार के तुलसीदास की मदद से प्रतिमा की मरम्मत कराई।
हजारों प्रतिमाएं तैयार कर चुके शिल्पकार मोहन लाल के मुुताबिक उनके दादा नंद लाल के समय से परिवार पुलिस की मदद करता आ रहा है। अब वह और तुलसीदास पुलिस के बुलावे में तमाम काम छोड़कर पुलिस वाहनों से घटनास्थल पर पहुंच जाते है। शब्बीरपुर, जनता रोड, देवबंद, शामली में पुलिस के बुलावे पर महापुरुषों की कई प्रतिमाएं और मूर्तियों की मरम्मत की गई। यही नहीं कई नई प्रतिमाएं और मूर्तियां पुलिस को बेची गई हैं। मरम्मत के बदले पुलिस जो रकम देती है, वह उसे बिना हिचक के स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि पुलिस की मंशा माहौल को शांत करने की रहती हैं। इसलिए वह भी पुलिस-प्रशासन को बिना लालच के सहयोग करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। महापुरुषों और मंदिरों की प्रतिमा और मूर्ति तोड़े जाने की घटनाओं के मद्देनजर पुलिस ने शिल्पकार परिवार को हायर कर रखा हैं। पुलिस क्षतिग्रस्त प्रतिमा अथवा मूर्ति की मरम्मत में इसी परिवार की मदद लेती है। शिल्पकार मोहनलाल की कई पीढ़ियां पुलिस के लिए संकट मोचक बनी हुई हैं। मूर्ति मरम्मत के साथ शिल्पकार परिवार ने पुलिस को समय-समय पर सहारनपुर रेंज के कई जिलों में नई प्रतिमा अथवा मूर्ति भी उपलब्ध कराए हैं।
पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने को एक साथ कई फ्रंट पर काम करती है। पुलिस की बाहरी ड्यूटियां तो छिपी नहीं हैं, मगर शांति व्यवस्था बनाए रखने को कुछ ऐसे काम हैं, जिन्हें पुलिस पर्दे के पीछे से बखूबी करती है। धार्मिक स्थलों और दीवारों पर आपत्तिजनक पोस्टर अथवा नारे लिखकर असामाजिक तत्व माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। इसी के मद्देनजर हर थाना मोबाइल में पेंट, काले रंग आदि की व्यवस्था रहती है, ताकि समय रहते आपत्तिजनक नारों अथवा टिप्पणी को मिटाकर माहौल को संभाला जा सके। इसी तरह महापुरुषों और धार्मिक स्थलों की प्रतिमाओं और मूर्तियों की मरम्मत के साथ नई मूर्तियों की व्यवस्था करने में नवाबगंज के शिल्पकार मोहन लाल के परिवार को पुलिस संकट मोचक के रुप में इस्तेमाल करती रही है। शहर में मंगलवार में माधवपुरम में डा आंबेडकर की मूर्ति क्षतिग्रस्त हुई तो पुलिस ने मोहन लाल के परिवार के तुलसीदास की मदद से प्रतिमा की मरम्मत कराई।
विज्ञापन
हजारों प्रतिमाएं तैयार कर चुके शिल्पकार मोहन लाल के मुुताबिक उनके दादा नंद लाल के समय से परिवार पुलिस की मदद करता आ रहा है। अब वह और तुलसीदास पुलिस के बुलावे में तमाम काम छोड़कर पुलिस वाहनों से घटनास्थल पर पहुंच जाते है। शब्बीरपुर, जनता रोड, देवबंद, शामली में पुलिस के बुलावे पर महापुरुषों की कई प्रतिमाएं और मूर्तियों की मरम्मत की गई। यही नहीं कई नई प्रतिमाएं और मूर्तियां पुलिस को बेची गई हैं। मरम्मत के बदले पुलिस जो रकम देती है, वह उसे बिना हिचक के स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि पुलिस की मंशा माहौल को शांत करने की रहती हैं। इसलिए वह भी पुलिस-प्रशासन को बिना लालच के सहयोग करते हैं।
विज्ञापन