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मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करें तो दूसरे क्यों नहीं?: मदनी

Fri, 26 Jan 2018 12:58 AM IST
Updated Fri, 26 Jan 2018 12:58 AM IST
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मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करें तो दूसरे क्यों नहीं?: मदनी
देवबंद (सहारनपुर)। फिल्म पद्मावत के नाम पर देशभर में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद हो रहे प्रदर्शनों पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी का कहना है कि बाबरी मस्जिद समेत मुस्लिमों के दूसरे धार्मिक मसलों पर मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान किया, जबकि दूसरे लोग कोर्ट के आदेशों की अवमानना कर रहे हैं और सरकारें चुपचाप तमाशा देख रही हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने की जिम्मेदारी सिर्फ मुसलमानों की रह गई है।
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बृहस्पतिवार को पूर्व राज्यसभा सांसद व जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने बातचीत में कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद का मुद्दा हो ट्रिपल तलाक या फिर धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर का मामला। सभी मामलों में देश की सर्वोच्च न्यायालय ने जो आदेश दिया उसे मुल्क में रहने वाले मुसलमानों ने सम्मानजनक माना और किसी तरह का कोई विरोध नहीं किया। उन्होंने फिल्म पद्मावत का नाम लिए बिना कहा कि हम किसी का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मुल्क के जो हालात देखने को मिल रहे हैं वे चिंताजनक है। कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं और सरकारें तमाशबीन बनी हुई है। मदनी ने सवाल उठाया क्या सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करने की जिम्मेदारी केवल मुसलमानों की रह गई है। दूसरे लोगों के लिए कोर्ट के आदेश कोई मायने नहीं रखते। जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष मोहम्मद मदनी और जिलाध्यक्ष मौलाना इब्राहीम कासमी ने कहा कि एक तबका सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न करके उसकी धज्जियां उड़ा रहा है। जबकि कोर्ट ने कानून व्यवस्था बनाने के लिए राज्यों सरकारों को आदेश दिए थे। लेकिन उपद्रवियों के सामने राज्य सरकारें बौनी साबित हो रही है। इससे साफ है कि राज्य सरकारों का रवैया मुसलमानों के लिए अलग और दूसरे लोगों के लिए अलग है।
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