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संत सम्मेलन में दिया जीवन जीने का तत्व ज्ञान
Updated Mon, 19 Feb 2018 12:29 AM IST
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रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। अखिल भारतीय सोहम महा मंडल शाखा सोना अर्जुनपुर के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा और संत सम्मेलन के तीसरे दिन सोहम मंडल के परामाध्यक्ष स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने कहा कि भव सागर से पार उतरने का एक मात्र साधन भगवान का भजन करना है।
स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देने के बाद ही अर्जुन की कर्तव्य और स्वरूप विषयक स्मृति लौट आयी तब अर्जुन का मोह दूर हुआ और वह भगवान श्री कृष्ण की आज्ञानुसार युद्ध करने के लिए तैयार हो गया। इसी प्रकार सांसारिक प्राणी भी महत्ता और ममता के वशीभूत होकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटके हैं। उन सभी मनुष्य को चाहिए कि भगवान का नित्य स्मरण करते हुए अपने कर्तव्य कर्म को करते रहना चाहिए। संत सम्मेलन में स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी निगमानंद, स्वामी परमानंद, स्वामी गोपाल नंद, गौरव स्वरूप आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए। इस मौके पर महेंद्र सिंह, चतर सिंह, हरि राम शर्मा, धूम सिंह, राज सिंह आजाद सिंह आदि मौजूद रहे।
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स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देने के बाद ही अर्जुन की कर्तव्य और स्वरूप विषयक स्मृति लौट आयी तब अर्जुन का मोह दूर हुआ और वह भगवान श्री कृष्ण की आज्ञानुसार युद्ध करने के लिए तैयार हो गया। इसी प्रकार सांसारिक प्राणी भी महत्ता और ममता के वशीभूत होकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटके हैं। उन सभी मनुष्य को चाहिए कि भगवान का नित्य स्मरण करते हुए अपने कर्तव्य कर्म को करते रहना चाहिए। संत सम्मेलन में स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी निगमानंद, स्वामी परमानंद, स्वामी गोपाल नंद, गौरव स्वरूप आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए। इस मौके पर महेंद्र सिंह, चतर सिंह, हरि राम शर्मा, धूम सिंह, राज सिंह आजाद सिंह आदि मौजूद रहे।
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