फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   वर्षों से साफ नहीं हुए नाले, कहां जा रहा सफाई का पैसा

वर्षों से साफ नहीं हुए नाले, कहां जा रहा सफाई का पैसा

Thu, 26 Jul 2018 12:29 AM IST
Updated Thu, 26 Jul 2018 12:29 AM IST
विज्ञापन
वर्षों से साफ नहीं हुए नाले, कहां जा रहा सफाई का पैसा
सहारनपुर। नगर निगम प्रत्येक वर्ष बरसात से पहले शहर के नालों और नालियों की सफाई कराने का दावा करता है, जिस पर प्रत्येक वर्ष 50 से 60 लाख रुपये का खर्च दिखाया जाता है। नालों और नालियों की सफाई की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम बुधवार को शहर के कई क्षेत्रों में गई। कई नाले ऐसे दिखे, जिनकी वर्षों से सफाई ही नहीं हुई।
विज्ञापन

नगर निगम में चार बड़े नालों के साथ ही 120 से अधिक छोटे नाले हैं। बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या न हो, साथ ही मच्छर आदि पैदा न हों। इसके लिए नालों की सफाई के लिए प्रत्येक वर्ष 50 से 60 लाख रुपये का बजट रखा जाता है। निगम अधिकारियों की मानें तो नगर निगम प्रत्येक वर्ष नालों की सफाई कराता है। चार बड़े नालों की सफाई मशीनों के द्वारा तथा शेष नालों की सफाई मजदूर लगाकर की जाती है। हालांकि हकीकत इससे अलग है। अमर उजाला की टीम बुधवार को सबसे पहले चिलकाना रोड पर पहुंची। यहां मुन्नालाल कॉलेज के सामने से होकर गुजरने वाले बड़े नाले की हालत नालों की सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही थी। नाला पॉलिथीन और कचरे से भरा नजर आया। नाले में भरे कचरे की हालत ऐसी है, कि कोई भी व्यक्ति नाले में उतरकर ऊपर खड़ा हो सकता है। स्थानीय निवासी मुसर्रफ, साजिद और वसीम अहमद ने बताया कि उन्हें ढंग से याद नहीं है कि नाले की सफाई कब हुई थी। उन्होंने नगर निगम पर क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया। आरोप लगाया कि क्षेत्र की सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है। दिन भर कचरा सड़कों पर फैला रहता है। पुराना कलसिया रोड पर कई कॉलोनियां हैं, मगर पक्का नाला नहीं है। सड़क किनारे कच्चे नाले में पॉलिथीन और कचरा भरे होने की वजह से जलभराव रहता है। मातागढ़ में टंकी की साइड बना छोटा नाला जगह-जगह से ध्वस्त है, जिसकी ईंटें टूटकर नाले में ही भरी हैं। दालमंडी पुल पर नदी के दूसरी साइड में बना छोटा नाला पॉलिथीन से भरा हुआ है। सफाई न होने की वजह से हल्की सी बारिश में जलभराव हो जाता है। मंडी समिति रोड के साथ-साथ बने नाले की सफाई लंबे समय से नहीं हुई है। इसकी वजह से इसमें कचरा जमा है, जिसकी वजह से दुर्गंध रहती है। जैन कॉलेज रोड के दोनों ओर बने छोटे नालों की जिला पंचायत के सामने कभी सफाई नहीं हुई है। पुलिस लाइन के गेट के सामने एक नाले में पॉलिथीन और कचरा जमा है। इस प्रकार तमाम नालों की हालत खराब है।
विज्ञापन

-------------------------------------
नालों की सफाई के ठेके निरस्त
इस बार नालों की सफाई के लिए दिए गए ठेकों में गड़बड़ी होने की शिकायत कमिश्नर से की गई थी। जिसकी वजह से कमिश्नर ने ठेकों को निरस्त करने के निर्देश नगर निगम को दिए थे। कमिश्नर के निर्देश पर नालों की सफाई से जुड़े दस ठेकों को निरस्त किया गया था। यही वजह है कि इस बार बरसात से पहले नालों की सफाई नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-------------------------------------
नाले और नालियों की सफाई प्रत्येक वर्ष कराई जाती है, जिस पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किया जाता है। पिछले तीन साल में नालों की सफाई हुई या नहीं इसका मुझे मालूम नहीं है, मगर इस बार नालों की सफाई के ठेके निरस्त कर दिए जाने की वजह से नालों की सफाई नहीं हो सकी है।
डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed