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पूर्वी यमुना नहर की पटरी टूटने से फसल बरबाद
Updated Sun, 28 Jan 2018 11:49 PM IST
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नानौता (सहारनपुर)। गांव कुआंखेड़ा में पूर्वी यमुना नहर की पटरी टूटने से किसानों की करीब 200 बीघा जमीन में खड़ी गेहूं, सब्जी व गन्ने की फसल खराब हो गई। पीड़ित किसानों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है।
क्षेत्र के गांव कुआंखेडा से पूर्वी यमुना नहर व गंग नहर होकर गुजरती है। जहां दोनों नहरों का संगम स्थल भी बना हुआ है। इन नहरों के पानी से ही क्षेत्र के किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार रविवार की सुबह करीब किसी शरारती युवक ने संगम स्थल पर सिंचाई विभाग द्वारा लगाए गए लोहे के फट्टों को गिरा दिया गया, जिससे पहले पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में भर गया, इसके बाद नहर की पटरी भी टूट गई। इससे नहर के किनारे स्थित खेत स्वामी प्रमोद राणा, जसवीर सिंह, जगपाल सिंह, रतिराम, शेरसिंह, राजेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, देवसुमन चौहान, संजय सिंह आदि किसानों की करीब 200 बीघा से अधिक फसलें पानी अधिक भरने से नष्ट हो गई। पीड़ित किसानों के अनुसार पटरी टूटने की सूचना सिंचाई विभाग के पतरोल व जेई को दिए जाने के काफी देर बाद पानी को बंद किया गया। ग्रामीणों ने खराब हुई फसलों के मुआवजे की मांग प्रशासन से की है। इतना ही नहीं किसानों ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि नहर की पटरी टूटने से हुए नुकसान की भरपाई यदि न की गई तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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क्षेत्र के गांव कुआंखेडा से पूर्वी यमुना नहर व गंग नहर होकर गुजरती है। जहां दोनों नहरों का संगम स्थल भी बना हुआ है। इन नहरों के पानी से ही क्षेत्र के किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार रविवार की सुबह करीब किसी शरारती युवक ने संगम स्थल पर सिंचाई विभाग द्वारा लगाए गए लोहे के फट्टों को गिरा दिया गया, जिससे पहले पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में भर गया, इसके बाद नहर की पटरी भी टूट गई। इससे नहर के किनारे स्थित खेत स्वामी प्रमोद राणा, जसवीर सिंह, जगपाल सिंह, रतिराम, शेरसिंह, राजेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, देवसुमन चौहान, संजय सिंह आदि किसानों की करीब 200 बीघा से अधिक फसलें पानी अधिक भरने से नष्ट हो गई। पीड़ित किसानों के अनुसार पटरी टूटने की सूचना सिंचाई विभाग के पतरोल व जेई को दिए जाने के काफी देर बाद पानी को बंद किया गया। ग्रामीणों ने खराब हुई फसलों के मुआवजे की मांग प्रशासन से की है। इतना ही नहीं किसानों ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि नहर की पटरी टूटने से हुए नुकसान की भरपाई यदि न की गई तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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