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अब बिलासपुर-मिलक के 35 गांव भी जल संकट में
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर
Updated Mon, 11 Apr 2016 11:27 PM IST
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चमरौवा, सैदनगर, स्वार और शाहबाद ब्लाक तो पहले से ही डार्क जोन में हैं। अब बिलासपुर और मिलक में भी भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। दोनों ब्लाकों के 35 से ज्यादा गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। इन गांवों के उथले नलकूपों ने काम करना बंद कर दिया है। गर्मी में स्थिति और गंभीर हो सकती है। अगर जल्द स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो रामपुर में भी लातूर (महाराष्ट्र) जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जहां पानी की कमी को देखते हुए धारा 144 लागू करनी पड़ी है।
जिले में भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। चमरौवा, सैदनगर, स्वार और शाहबाद पहले ही डार्क घोषित हो चुके हैं। जो ब्लाक बचे थे उन पर भी अब खतरा मंडराने लगा है। लघु सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बिलासपुर और मिलक के करीब 35 गांवों का जल स्तर 30 से 35 फिट नीचे पहुंच गया है। इनमें बिलासपुर के गोदी, खाता, गोकुलनगरी, हयातनगर, बिजली फार्म, मिलक के चैनपुर, भौंरकी, पट्टी बसंतपुर भी शामिल हैं।
मई-जून की गर्मी में स्थिति और खतरनाक हो सकती है। इन गांवों में उथले (कम गहराई वाले) और मध्यम नलकूपों ने काम करना बंद कर दिया है। कई उथले नलकूप फेल हो चुके हैं और कई से पानी कम निकल रहा है। इन गावों में फसलों की सिंचाई के लिए गहरे नलकूप लगाए जा रहे हैं। अवर अभियंता रामऔतार शर्मा ने बताया कि पहले 200 फिट बोरिंग की जाती थी, लेकिन अब 250 से 300 फिट बोरिंग करना पड़ रही है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले दोनों ब्लाकों का वाटर लेबल 12 से 15 फुट था, जो अब खिसकर 30 से 35 फिट पहुंच गया है। भूगर्भ जल विभाग को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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जल संचय का प्लान भी फेल
भूजल स्तर उठाने का प्लान फेल हो गया। भूजल स्तर को ऊपर उठाने के लिए शासन ने मनरेगा से हर गांव में आदर्श तालाब बनाकर उनमें रिचार्ज बोरिंग का फरमान जारी किया था। अभी तक अधिकतर गांवों में तालाबों का निर्माण नहीं हो सका है। तमाम तालाबों पर अवैध कब्जा है। कुछ पर विवाद है। 2015-16 में सिर्फ 26 समग्र गांवों में 17 तालाबों का सुदृढ़ीकरण हो सका है। बड़ी-बड़ी बिल्डिंग में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगने थे।
अभी तक किसी भी सरकारी भवन में सिस्टम नहीं लग सका है। मनरेगा से अब खेतों पर चकबंद (मेड़बंदी) का निर्माण होगा। परियोजना निदेशक लक्ष्मण प्रसाद के मुताबिक पानी की बर्बादी रोकने के लिए मनरेगा से चकबंद का निर्माण कराया जाएगा। सभी बीडीओ को कार्य योजना में चकबंद शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सेटेलाइट से मापा जाएगा भूजल स्तर
भूजल स्तर मापने के लिए पूरे प्रदेश में डिजीटल वाटर लेबल रिकार्डर लगाए जाएंगे। पहले फेस में आगरा को शामिल किया गया है। भूजल स्तर की सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। कहीं स्टाफ की कमी तो कहीं हाईड्रोग्राफ स्टेशन बंद हो चुके हैं। ऐसे में विभाग कर्मचारी फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। लिहाजा शासन ने डिजीटल वाटर लेबल रिकार्डर लगाने का फैसला लिया है। भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि भूजल स्तर की जांच अब सेटेलाइट से होगी।
इसके लिए डिजीटल वाटर लेबल रिकार्डर लगाए जाएंगे। पहले फेस में आगरा को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि जो पीजो मीटर मिट्टी में दब गए हैं, उन्हें बंद कर दिया दूसरे बोरिंग कराए जाएंगे। ब्लाकवार कर्मचारियों से रिपार्ट तलब की गई हैं।
जीमन में दफन हो गए हाईड्रोग्राफ स्टेशन
रामपुर (ब्यूरो)। भूजल स्तर मापने के लिए स्थापित अधिकतर हाईड्रोग्राफ स्टेशन (पीजी मीटर) जमीन में दफन हो गए। कुछ ईंट और पत्थर डालकर बंद कर दिए गए। कई साल से बंद हाईड्रोग्राफ स्टेशन से ही भूजल स्तर मापा जा रहा है। ऐसे में भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। भूजल स्तर मापने की जिम्मेदारी भूगर्भ जल विभाग की है। पुराने वक्त में भूजल स्तर कुएं में इंचीटेप डालकर मापा जाता था।
धीरे-धीरे कुएं पटने लगे तो नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र में ब्लाकवार 70 से ज्यादा हाईड्रोग्राफ स्टेशन लगाए गए। इनमें से अधिकतर हाईड्रोग्राफ स्टेशन पाट दिए गए। कुछ लोग उनके ढक्कन खोलकर लग गए। खुल पीजी मीटर में ईंट और पत्थर डाल दिए। कई साल से पीजी मीटर का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इक्का दुक्का पीजो मीटर ही सही हैं। भूगर्भ जल विभाग कई साल से इन्ही के जरिये भूजल स्तर माप रहा है।
लिहाजा भूगर्भ विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट पर चमरौवा ब्लाक घोषित किए जाने के विरोध में भाकियू ने कई महीने तक आंदोलन किया था। किसानों का कहना था कि चमरौवा ब्लाक का भूजल स्तर दूसरे ब्लाकों की तुलना में ऊपर है। फिर भी चमरौवा ब्लाक को डार्क घोषित कर दिया। प्रशासन ने भी ब्लाक को डार्क जोन से निकालने की रिपोर्ट भेजी थी। सैदनगर को डार्क जोन घोषित किए जाने का विरोध किया गया था।
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जिले में भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। चमरौवा, सैदनगर, स्वार और शाहबाद पहले ही डार्क घोषित हो चुके हैं। जो ब्लाक बचे थे उन पर भी अब खतरा मंडराने लगा है। लघु सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बिलासपुर और मिलक के करीब 35 गांवों का जल स्तर 30 से 35 फिट नीचे पहुंच गया है। इनमें बिलासपुर के गोदी, खाता, गोकुलनगरी, हयातनगर, बिजली फार्म, मिलक के चैनपुर, भौंरकी, पट्टी बसंतपुर भी शामिल हैं।
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मई-जून की गर्मी में स्थिति और खतरनाक हो सकती है। इन गांवों में उथले (कम गहराई वाले) और मध्यम नलकूपों ने काम करना बंद कर दिया है। कई उथले नलकूप फेल हो चुके हैं और कई से पानी कम निकल रहा है। इन गावों में फसलों की सिंचाई के लिए गहरे नलकूप लगाए जा रहे हैं। अवर अभियंता रामऔतार शर्मा ने बताया कि पहले 200 फिट बोरिंग की जाती थी, लेकिन अब 250 से 300 फिट बोरिंग करना पड़ रही है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले दोनों ब्लाकों का वाटर लेबल 12 से 15 फुट था, जो अब खिसकर 30 से 35 फिट पहुंच गया है। भूगर्भ जल विभाग को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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जल संचय का प्लान भी फेल
भूजल स्तर उठाने का प्लान फेल हो गया। भूजल स्तर को ऊपर उठाने के लिए शासन ने मनरेगा से हर गांव में आदर्श तालाब बनाकर उनमें रिचार्ज बोरिंग का फरमान जारी किया था। अभी तक अधिकतर गांवों में तालाबों का निर्माण नहीं हो सका है। तमाम तालाबों पर अवैध कब्जा है। कुछ पर विवाद है। 2015-16 में सिर्फ 26 समग्र गांवों में 17 तालाबों का सुदृढ़ीकरण हो सका है। बड़ी-बड़ी बिल्डिंग में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगने थे।
अभी तक किसी भी सरकारी भवन में सिस्टम नहीं लग सका है। मनरेगा से अब खेतों पर चकबंद (मेड़बंदी) का निर्माण होगा। परियोजना निदेशक लक्ष्मण प्रसाद के मुताबिक पानी की बर्बादी रोकने के लिए मनरेगा से चकबंद का निर्माण कराया जाएगा। सभी बीडीओ को कार्य योजना में चकबंद शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सेटेलाइट से मापा जाएगा भूजल स्तर
भूजल स्तर मापने के लिए पूरे प्रदेश में डिजीटल वाटर लेबल रिकार्डर लगाए जाएंगे। पहले फेस में आगरा को शामिल किया गया है। भूजल स्तर की सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। कहीं स्टाफ की कमी तो कहीं हाईड्रोग्राफ स्टेशन बंद हो चुके हैं। ऐसे में विभाग कर्मचारी फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। लिहाजा शासन ने डिजीटल वाटर लेबल रिकार्डर लगाने का फैसला लिया है। भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि भूजल स्तर की जांच अब सेटेलाइट से होगी।
इसके लिए डिजीटल वाटर लेबल रिकार्डर लगाए जाएंगे। पहले फेस में आगरा को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि जो पीजो मीटर मिट्टी में दब गए हैं, उन्हें बंद कर दिया दूसरे बोरिंग कराए जाएंगे। ब्लाकवार कर्मचारियों से रिपार्ट तलब की गई हैं।
जीमन में दफन हो गए हाईड्रोग्राफ स्टेशन
रामपुर (ब्यूरो)। भूजल स्तर मापने के लिए स्थापित अधिकतर हाईड्रोग्राफ स्टेशन (पीजी मीटर) जमीन में दफन हो गए। कुछ ईंट और पत्थर डालकर बंद कर दिए गए। कई साल से बंद हाईड्रोग्राफ स्टेशन से ही भूजल स्तर मापा जा रहा है। ऐसे में भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। भूजल स्तर मापने की जिम्मेदारी भूगर्भ जल विभाग की है। पुराने वक्त में भूजल स्तर कुएं में इंचीटेप डालकर मापा जाता था।
धीरे-धीरे कुएं पटने लगे तो नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र में ब्लाकवार 70 से ज्यादा हाईड्रोग्राफ स्टेशन लगाए गए। इनमें से अधिकतर हाईड्रोग्राफ स्टेशन पाट दिए गए। कुछ लोग उनके ढक्कन खोलकर लग गए। खुल पीजी मीटर में ईंट और पत्थर डाल दिए। कई साल से पीजी मीटर का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इक्का दुक्का पीजो मीटर ही सही हैं। भूगर्भ जल विभाग कई साल से इन्ही के जरिये भूजल स्तर माप रहा है।
लिहाजा भूगर्भ विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट पर चमरौवा ब्लाक घोषित किए जाने के विरोध में भाकियू ने कई महीने तक आंदोलन किया था। किसानों का कहना था कि चमरौवा ब्लाक का भूजल स्तर दूसरे ब्लाकों की तुलना में ऊपर है। फिर भी चमरौवा ब्लाक को डार्क घोषित कर दिया। प्रशासन ने भी ब्लाक को डार्क जोन से निकालने की रिपोर्ट भेजी थी। सैदनगर को डार्क जोन घोषित किए जाने का विरोध किया गया था।