रामपुर: कोर्ट का रियासत के अंतिम शासक की 2,600 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर फैसला- सभी पक्षकारों को हर संपत्ति से मिलेगा हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को जिला जज की कोर्ट को रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति बंटवारे को शरीयत के अनुसार कराने के निर्देश दिए थे। इसमें ये संपत्ति कुल 18 पक्षकारों के मध्य बंटनी है।
विस्तार
रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की करीब 2,600 करोड़ से अधिक की संपत्ति के बंटवारे पर जिला जज गौरव कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने फैसला सुना दिया है। ये संपत्ति कुल 18 पक्षकारों के मध्य बंटनी है। कोर्ट की देखरेख में जारी बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान दो पक्षकारों की मौत हो गई, लेकिन, संपत्ति में उनके भी शेयर (अंश) निर्धारित किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को जिला जज की कोर्ट को रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति के बंटवारे को शरीयत के अनुसार कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर सर्वे और एडवोकेट कमिश्नर द्वारा करीब सवा साल की अवधि में चल-अचल संपत्ति का मूल्य निर्धारित कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी गई थी।
कोर्ट ने इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 15 जुलाई 2021 को सभी पक्षकारों के मध्य 143 पन्नों की प्रस्तावित विभाजन योजना को पेश करते हुए आपत्तियां मांगीं थीं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद बंटवारे के संदर्भ में 34 पन्नों में फैसला सुना दिया। बंटवारे की प्रक्रिया पूरी होने में दो साल चार माह से अधिक का समय लगा।
बंटवारे की सूची में खासबाग पैलेस, नवाब का रेलवे स्टेशन व सैलून
संपत्ति के बंटवारे की प्रस्तावित विभाजन योजना में नवाब की सभी संपत्तियों को शामिल किया गया। इनमें खास बाग पैलेस, मंसूरपुर गांव, बेनजीर उर्फ घाटमपुर गांव, शादीनगर पट्टी छोटे गांव, एवान ए रफत खासबाग पैलेस का मुख्य भवन और भवन के सभी फिटिंग्स, फल, टिंबर ट्री, बेनजीर बाग, अलीगंज बेनजीर, किशनपुर अटरिया व पसियापुरा शुमाली, बेनजीर भवन सभी फिक्सचर, फिटिंग्स व फलों के पेड़ सहित, नवाब रेलवे स्टेशन की भूमि, नवाब रेलवे स्टेशन, नवाब रामपुर का सैलून (ट्रेन कोच), शस्त्र, कुंडा, ठोठर, भीतरगांव, मंगोली और शाहबाद की भूमि, शाहबाद किले भवन फिटिंग्स और फिक्सचर, आर्म्स, आयतित कार, फर्नीचर, पेंटिंग्स, एयर कंडीशनिंग प्लांट व अन्य आइटम समेत अन्य कई चल-अचल संपत्ति हैं।
कुछ प्रमुख अचल संपत्ति और सर्वे में उनकी अनुमानित कीमत
- कोठी खासबाग पैलेस और उससे जुड़े 33 भवन की कीमत करीब 2,136.70 लाख रुपये एवं 595.90 लाख रुपये।
- खास बाग का धोबी घाट करीब 260.80 लाख।
- खास बाग के फल वृक्ष करीब 86.51 लाख रुपये।
- खास बाग के टिंबर पेड़ करीब 19.70 लाख रुपये।
- बेनजीर बाग (पूरा भवन फिक्सचर्स व फिटिंग्स के साथ) करीब 22.70 लाख रुपये।
- बेनजीर बाग के फल वृक्षों की कीमत करीब 9.64 लाख रुपये।
- कुंडा फिश पोंड और संबंधित भवनों की कीमत करीब 5.80 लाख रुपये।
- शाहबाद कोठी और संबंधित भवन 156.40 लाख रुपये।
- नवाब स्टेशन और यार्ड 18.50 लाख।
कुछ प्रमुख चल संपत्ति और सर्वे में उनकी अनुमानित कीमत
- करीब 107 विभिन्न प्रकार के हथियार, जिनकी कीमत करीब 38.10 लाख रुपये।
- 16 आयतित विंटेज कार, कीमत करीब एक करोड़ 99 लाख 25 हजार।
- 44 कूलिंग एंड हीटिंग कंडीशनिंग प्लांट व संबंधित सामग्री, कीमत करीब दो लाख पचास हजार रुपये।
- नवाब का सैलून एवं संबंधित चीजें, कीमत करीब पांच करोड़ 89 लाख 62 हजार रुपये।
- अलमारी, फुटमेट, कुर्सी, मेज, कारपेट, ड्रेसिंग केबिनेट, पर्दे, पंखे, पेंटिंग्स, बेड आदि अन्य महल, बाथरूम, हॉल आदि में प्रयोग की गईं अंतिम शासक की चल संपत्तियां करीब 4,843.96 लाख रुपये।
काफी खास है खासबाग पैलेस
साल 1930 में बनकर तैयार हुई कोठी खासबाग रामपुर रियासत के अंतिम शासकों की अचल संपत्ति में सबसे महत्वपूर्ण व कीमती है। कोठी खासबाग के बारे में दावा किया जाता है कि देश की पहली वातानुकूलित कोठी है। यूरोपीय-इस्लामी शैली में बनी यह कोठी बेहद खूबसूरत है। इसमें करीब 200 कमरे और कई बडे़ हॉल हैं। इनमें नवाब का ऑफिस, सिनेमाहॉल, संगीत हॉल, स्वीमिंग पूल भी है। सिविल लाइंस क्षेत्र में बनी इस कोठी के चारों ओर बाग है, जिसमें एक लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए थे। कोठी में बेशकीमती पेंटिंग लगी हैं। इनकी कीमत ही 23 करोड़ आंकी गई है।
शस्त्रागार में मिले थे कई देशों के हथियार
संपत्ति के मूल्यांकन के दौरान जब शस्त्रागार खोला गया तो वहां आलमारियों में हजारों की संख्या में हथियार पाए गए थे। इनमें स्कॉटलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन, हालैंड, अमेरिका आदि की बनी पिस्टल, बंदूकें, रायफल व रिवाल्वर शामिल थे। हजारों की संख्या में मिले इन हथियारों में खंजर, भाले, तलवारें व नेजे भी शामिल थे। इनकी वीडियोग्राफी भी कराई गई थी।
लंबी बंदूक म्यूजियम के लिए की गई थी प्रस्तावित
संपत्ति बंटवारे की प्रस्तावित विभाजन योजना में नवाब की एक लंबी बंदूक को म्यूजियम के लिए प्रस्तावित किया गया था। वहीं रामपुर रियासतकाल के हथियारों में से करीब एक दर्जन प्रकार हथियार प्रयोग में न आने और रखरखाव न हो पाने के कारण खराब हो गए हैं। इन हथियारों की अनुमानित कीमत को प्रस्तावित विभाजन योजना में निल दर्शाया गया था।
वेल्डिंग मशीन की मदद से काटा गया था स्ट्रांग रूम
खासबाग पैलेस में स्थित स्ट्रांग रूम को खोलने में सर्वे व मूल्यांकन टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। स्ट्रांग रूम 1980 से बंद पड़ा था। स्ट्रांग रूम का निर्माण लंदन की प्रसिद्ध कंपनी द्वारा किया गया था। स्ट्रांग रूम की चाबियां गुम हो जाने के कारण इसे तोड़ना मजबूरी थी। करीब दो सप्ताह तक तोड़ने में कामयाबी न मिलने पर गैस वेल्डिंग कटर मशीन से काटने का प्रयास हुआ था। कई घंटे बाद भी गैस कटर स्ट्रांग रूम की दीवार को कुल 16 मिलीमीटर ही काट सका था। लगातार कोशिश करने पर सातवीं बार में खोलने में कामयाबी मिल सकी थी। हालांकि स्ट्रांग रूम की कुछ तिजोरियों में ही थोड़ा-बहुत सामान मिला। ज्यादा तिजोरियां खाली ही मिली थीं।
अपना था रेलवे स्टेशन, अपने सैलून
आजादी से पहले रामपुर रियासत के नवाबों का अपना रेलवे स्टेशन हुआ करता था, जहां हर समय दो सैलून (विशेष कोच) तैयार खड़े रहते थे। जब भी नवाब परिवार को दिल्ली, लखनऊ या कहीं और रेलमार्ग से जाना होता था तो वे अपने सैलून में सवार होते थे और सैलून ट्रेन में जोड़ दिए जाते थे।
साल 1774 से 1949 तक रामपुर में नवाबों का राज हुआ करता था। रामपुर के नौवें नवाब हामिद अली खां के दौर में जब जिले से रेलवे लाइन गुजरी तो उन्होंने रेलवे स्टेशन के करीब ही अपने लिए अलग स्टेशन बनवाया था। साथ ही मिलक तक रेलवे लाइन भी बिछवाई थी।
संपत्ति बंटवारा प्रक्रिया की प्रस्तावित विभाजन योजना में दो सैलून भी शामिल हैं। मूल्यांकन में इनकी कीमत 11 करोड़ 74 लाख 24 हजार रुपये आंकी गई थी। लेकिन रखरखाव के अभाव में खराब होने से कीमत आधी कर 5 करोड़ 87 लाख 12 हजार रुपये रह गई, जिसे सभी पक्षकारों में विभाजित किया गया है।
सैलून में प्रोजेक्टर से लेकर कैमरे तक की होती थी व्यवस्था
नवाब के सैलून में 33 एमएम सिनेमा प्रोजेक्टर, 16 एमएम सिनेमा प्रोजेक्टर, कैमरे, इंपोर्टेड रेडियो ट्रांजिस्टर, ग्रंडिंग टेप रिकॉर्डर आदि की व्यवस्था भी रहती थी। विभाजन योजना में सैलून के सामान में इनका जिक्र है। इसके अलावा कारचोबगाओ तकिया एवं मसनद, सिल्वर कैनोपी, कट ग्लास, ग्लासेज फॉरशेरी, व्हिस्की, बियर, गोल्डफिंगर बाउल्स, छुरी-कांटे, इंग्लिश क्रॉकरी एवं कटलरी, लार्ज सिल्वर सेंटर पीस, लार्ज सिगरेट एंड सिगार बॉक्स, सिल्वर पानदान, उगालदान, सिल्वर खासदान, सिल्वर कैंटीन सेट, सिल्वर हुक्का, कश्मीरी कारचोबी दोशालन, इंग्लिश गोल्ड सिगरेट केस, इंग्लिश सिल्वर सिगरेट केस, इनेमल सिगरेट बॉक्स, सिल्वर बेड्स, कैमरा, तलवार आदि सामान का जिक्र है।
निल कीमत वाले हथियार व उनकी संख्या
टूटी हुई मजेललोडिंग-सात, खराब रिवॉल्वर-10, एसबीएमएल 20 बोर गन-एक, एसबीएमएल सिर्फ बैरल-एक, एसबी रायफल 303 सिर्फ बैरल-दो, एसबीबोल्ट एक्शन रायफल-एक, एसबीएमएल गन-एक, एसबीएमएल गन 16 बोरबिना मशीन-एक, डीबीएमएल गन 12 बोर आधी-एक, डीबीएमएल 12 बोर- तीन, एमएल 16 बोर-एक, डीबीएमएल12 बोर हैमर-पांच, रायफल डीबी 500 हैमर-एक।
नवाब संपत्ति का इन्होंने किया था सर्वे व मूल्यांकन
रामपुर रियासत के अंतिम शासक की संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया में चल-अचल संपत्ति के सर्वे व मूल्यांकन के कार्य में जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना को संपूर्ण अचल संपत्ति के मूल्यांकन के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया था। उन्होंने राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, कृषि और उद्यान विभाग की मदद से संपूर्ण संपत्ति का मूल्यांकन कर रिपोर्ट तैयार की थी। चल संपत्ति का मूल्यांकन एडवोकेट कमिश्नर सौरभ सक्सेना और मुजम्मिल हुसैन द्वारा किया गया था।
यूं चला संपत्ति बंटवारे का समय चक्र
- नवाब रजा अली खां की संपत्ति के बंटवारे के मुकदमे की शुरुआत 1972 में हुई थी।
- साल 1996 में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें राजशाही परंपरा को सही माना गया।
- हाईकोर्ट के फैसले के बाद नवाब परिवार के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
- सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को रामपुर जिला जज कोर्ट को शरीयत के अनुसार 18 पक्षकारों में संपत्ति बंटवारे के आदेश दिए।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 दिसंबर 2020 तक की मियाद तय की गई थी। कोरोना संक्रमण में सुनवाई प्रक्रिया बाधित रहने से आगे बढ़ा समय।
- एडवोकेट और सर्वे कमिश्नर स्तर के मूल्यांकन में चल-अचल संपत्ति की कीमत 2600 करोड़ से अधिक आंकी गई।