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अध्यात्म के प्रचार से ही भारत विश्व गुरु बन सकता है : सतपाल
Mon, 03 Mar 2025 02:01 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Mon, 03 Mar 2025 02:01 AM IST
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मोदीपुर के ग्लोबल हॉल में मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से एक दिवसीय सद्भावना सम्मेलन में मौजूद
रामपुर। हमारा उद्देश्य समाज को जागरूक करना है। धर्म के मार्ग से भटके लोगों को सही मार्ग की ओर लाना है। सद्गुरु के बिना किसी को सही दिशा नहीं मिल सकती और सही दिशा के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म के प्रचार से ही भारत विश्व गुरु बन सकता है। यह बातें रविवार को सद्भावना सम्मेलन संत व उत्तराखंड सरकार के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने अपने अनुयायियों से कही।
उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि वह जो कर रहे हैं। वह करने से उनको मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी, तो वह इस भ्रम में न रहें। जब तक सही ज्ञान नहीं मिली। सही तरीका नहीं अपनाएंगे। तब तक मोक्ष की प्राप्ति असंभव है। इसलिए कुछ भी करने से पहले ज्ञान होना जरूरी है। ज्ञान की प्राप्ति सत्संग के माध्यम से ही हो सकती है।
मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से रविवार को मोदी फैक्टरी के ग्लोबल हॉल में हुए सद्भावना सम्मेलन में सतपाल महाराज के सत्संग के दौरान अनुयायियों की भीड़ रही। बालिकाओं ने विभिन्न भजनों पर नृत्य प्रस्तुत किया। लोगों ने सत्संग के दौरान अपने-अपने भक्ति भावना से ओतप्रोत भजन भी प्रस्तुत किए। इस दौरान सतपाल महाराज ने लोगों को सत्संग का मतलब समझाया। उन्होंने कहा कि सत्य का संग अर्थात सत्य को जानकर उसका संग करना ही सत्संग है।
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उन्होंने कहा कि अध्यात्म के प्रचार से ही भारत विश्व गुरु बन सकता है। सत्संग के मंच पर संत सतपाल के पास में ही गुरुमाता अमृता भी विराजमान थीं। उन्होंने भी लोगों को सत्य से परिचित कराया। कहा, दरबार से आत्मज्ञान प्राप्त करके हजारों की संख्या में लोगों ने बुरी प्रवृत्तियां और नशाखोरी को छोड़ा है। सत्संग में परिवर्तन करने की क्षमता है और ज्ञान ही शांति और आनंद का मार्ग है। इसको जानने के बाद विश्व में शांति संभव है।
सम्मेलन को महात्मा हरि संतोषानंद व महात्मा सत्यबोधानंद ने भी आध्यात्म की सीख दी। इस दौरान सत्संग पंडाल में हंसवाणी की ओर से भजन-सत्संग डाउनलोड, आध्यात्मिक पुस्तकों के स्टाल भी लगाए गए थे। भाजपा नेता व अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के हिंदी सलाहकार डॉ. चंद्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि सत्संग के मौके पर कृषि राज्य मंत्री बल्देव सिंह औलख, उप्र पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल, महिला आयोग की सदस्य सुनीता सैनी समेत कई अतिथियों ने भी माल्यार्पण कर मुख्य वक्ता का स्वागत किया है। इस अवसर पर राजवीर सिंह, भोगराज, मदन लाल, राम अवतार शर्मा, शेर सिंह, राम किशोर शर्मा, मुरारी लाल, छोटे लाल, द्वारिका प्रसाद ने भी सतपाल महाराज का स्वागत किया। चंद्रपाल सिंह, जगदीश सिंह, मोहन पाल, धीरेंद्र सिंह, जयवीर सिंह व रमेश भाई ने भी अतिथियों का स्वागत किया।
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सतपाल महाराज का सत्संग कहीं पर भी हो, हम जाते हैं। इनके सत्संग हमारे जीवन में बहुत प्रेरणादाई हैं। महाराज से हम और हमारे माता-पिता भी पिछले 10 साल से जुड़े हैं। दोनों बच्चों को भी सत्संग में लाए हैं। - मानसी, मुरादाबाद
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हम लोग महाराज जी से बचपन से जुड़े हैं। दादी-बाबा और माता-पिता भी सतपाल महराज से जुड़े हैं। इनसे कितनी प्रेरणा मिलती है हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं। हमारे ससुराल वाले भी हमें सत्संग में आने से नहीं रोकते हैं। - शिल्पा, गाजियाबाद
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हम 13 साल से सत्संग कर रहे हैं। सतपाल महाराज को हमने गुरु बनाया है। वैसे हमारे पति सत्संग नहीं करते हैं लेकिन, हमें सत्संग में आने से रोकते नहीं हैं। - प्रियंका, हल्द्वानी
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सत्संग से आत्मा को शांति मिलती है। महाराज से जुड़े हमें 13 साल हो गए हैं। इनकी प्रेरणा से हमने जीवन जीने की कला सीखी है। ये सत्य है कि सत्संग करने से ही शांति मिलती है। - खुशी, स्वार
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उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि वह जो कर रहे हैं। वह करने से उनको मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी, तो वह इस भ्रम में न रहें। जब तक सही ज्ञान नहीं मिली। सही तरीका नहीं अपनाएंगे। तब तक मोक्ष की प्राप्ति असंभव है। इसलिए कुछ भी करने से पहले ज्ञान होना जरूरी है। ज्ञान की प्राप्ति सत्संग के माध्यम से ही हो सकती है।
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मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से रविवार को मोदी फैक्टरी के ग्लोबल हॉल में हुए सद्भावना सम्मेलन में सतपाल महाराज के सत्संग के दौरान अनुयायियों की भीड़ रही। बालिकाओं ने विभिन्न भजनों पर नृत्य प्रस्तुत किया। लोगों ने सत्संग के दौरान अपने-अपने भक्ति भावना से ओतप्रोत भजन भी प्रस्तुत किए। इस दौरान सतपाल महाराज ने लोगों को सत्संग का मतलब समझाया। उन्होंने कहा कि सत्य का संग अर्थात सत्य को जानकर उसका संग करना ही सत्संग है।
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उन्होंने कहा कि अध्यात्म के प्रचार से ही भारत विश्व गुरु बन सकता है। सत्संग के मंच पर संत सतपाल के पास में ही गुरुमाता अमृता भी विराजमान थीं। उन्होंने भी लोगों को सत्य से परिचित कराया। कहा, दरबार से आत्मज्ञान प्राप्त करके हजारों की संख्या में लोगों ने बुरी प्रवृत्तियां और नशाखोरी को छोड़ा है। सत्संग में परिवर्तन करने की क्षमता है और ज्ञान ही शांति और आनंद का मार्ग है। इसको जानने के बाद विश्व में शांति संभव है।
सम्मेलन को महात्मा हरि संतोषानंद व महात्मा सत्यबोधानंद ने भी आध्यात्म की सीख दी। इस दौरान सत्संग पंडाल में हंसवाणी की ओर से भजन-सत्संग डाउनलोड, आध्यात्मिक पुस्तकों के स्टाल भी लगाए गए थे। भाजपा नेता व अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के हिंदी सलाहकार डॉ. चंद्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि सत्संग के मौके पर कृषि राज्य मंत्री बल्देव सिंह औलख, उप्र पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल, महिला आयोग की सदस्य सुनीता सैनी समेत कई अतिथियों ने भी माल्यार्पण कर मुख्य वक्ता का स्वागत किया है। इस अवसर पर राजवीर सिंह, भोगराज, मदन लाल, राम अवतार शर्मा, शेर सिंह, राम किशोर शर्मा, मुरारी लाल, छोटे लाल, द्वारिका प्रसाद ने भी सतपाल महाराज का स्वागत किया। चंद्रपाल सिंह, जगदीश सिंह, मोहन पाल, धीरेंद्र सिंह, जयवीर सिंह व रमेश भाई ने भी अतिथियों का स्वागत किया।
सतपाल महाराज का सत्संग कहीं पर भी हो, हम जाते हैं। इनके सत्संग हमारे जीवन में बहुत प्रेरणादाई हैं। महाराज से हम और हमारे माता-पिता भी पिछले 10 साल से जुड़े हैं। दोनों बच्चों को भी सत्संग में लाए हैं। - मानसी, मुरादाबाद
हम लोग महाराज जी से बचपन से जुड़े हैं। दादी-बाबा और माता-पिता भी सतपाल महराज से जुड़े हैं। इनसे कितनी प्रेरणा मिलती है हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं। हमारे ससुराल वाले भी हमें सत्संग में आने से नहीं रोकते हैं। - शिल्पा, गाजियाबाद
हम 13 साल से सत्संग कर रहे हैं। सतपाल महाराज को हमने गुरु बनाया है। वैसे हमारे पति सत्संग नहीं करते हैं लेकिन, हमें सत्संग में आने से रोकते नहीं हैं। - प्रियंका, हल्द्वानी
सत्संग से आत्मा को शांति मिलती है। महाराज से जुड़े हमें 13 साल हो गए हैं। इनकी प्रेरणा से हमने जीवन जीने की कला सीखी है। ये सत्य है कि सत्संग करने से ही शांति मिलती है। - खुशी, स्वार