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Rampur News: मुस्लिम मतों के बिखराव से पार होती है भाजपा की नैया, लामबंदी पड़ती है भारी
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रामपुर। लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट पर मुस्लिम मतों का जब-जब बंटवारा हुआ है तो भाजपा को लाभ मिलता है। हालांकि, इस बार की तरह जब भी मुस्लिम लामबंद होते हैं तो भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ता है। भाजपा को तीन बार आम चुनाव में रामपुर लोकसभा सीट पर जीत मिली है और तीनों बार वजह मुस्लिम मतों का बंटवारा ही रहा है। हालांकि, 2022 में सपा प्रत्याशी से सीधे मुकाबले में भाजपा के घनश्याम लोधी को जीत मिली थी। रामपुर लोकसभा सीट से राजेंद्र सिंह ने पहली बार भाजपा के टिकट पर 1991 में जीत दर्ज की थी। दूसरी बार 1998 में भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी सांसद चुने गए। 2014 में तीसरी बार नैपाल सिंह रामपुर लोकसभा सीट से सांसद बने। तीनों चुनावों की बात करें तो मुस्लिम मतों के बंटवारे ने भाजपा को दिल्ली का रास्ता दिखाया।
रामपुर से 1952 में पहले चुनाव में मौलाना अबुल कलाम आजाद मुस्लिम सांसद बने, जिसके बाद लगातार कांग्रेस से मुस्लिम नेताओं का ही दबदबा रहा। दो बार एस मेहंदी, पांच बार जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां सांसद बने और दो बार उनकी पत्नी बेगम नू बानो सांसद चुनी गईं। सपा ने इस सीट से तीन बार जीत दर्ज की थी, 2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने चौथी बार यहां से जीत हासिल की है। 1977 में भारतीय जनता दल से राजेंद्र सिंह रामपुर के पहले हिंदू सांसद बने थे। 1991 में वह भाजपा के टिकट पर दोबारा सांसद बने थे।
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मुस्लिम मतों का बंटवारा बना संसद जाने का रास्ता
1991 में भाजपा से राजेंद्र सिंह ने 2,13,429 मत हासिल कर 49,809 मतों से कांग्रेस प्रत्याशी जुल्फिकार अली खां को हराया था। इस चुनाव में जुल्फिकार अली खां को 1,63,620 मत हासिल हुए, जबकि जनता दल के प्रत्याशी हाजी सुबहान ने 84,815 मत प्राप्त किए थे। जनता पार्टी के फिरासत अली को 23,219 और हिफाजत अली को 17,237 वोट मिले। चारों मुस्लिम प्रत्याशियों को 2,88,891 मत हासिल हुए। मतों के बंटवारें ने 1991 के चुनाव में भाजपा को जीतने की राह आसान की।
इसके बाद 1998 में भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी ने 2,65,116 मत हासिल कर कांग्रेस प्रत्याशी बेगम नूर बानो को 4,966 मतों से हराया। इस चुनाव में बेगम नूरबानो को 2,60150 मत मिले, जबकि बीएसपी के अब्दुल सलाम को 1,31,441 मत मिले। सपा के शराफत यार खान को 1,15,877 वोट मिले थे। भाजपा छोड़कर तीनों मुस्लिम प्रत्याशियों को 5,07,468 मत मिले थे। इस तरह मुस्लिम मतों का बिखराव भाजपा के लिए फायदेमंद बना था।
वहीं 2014 के चुनाव में भाजपा के नैपाल सिंह ने 3,58,616 मत प्राप्त करके सपा के नसीर अहमद को 23,435 वोटों से हराया था। इस चुनाव में सपा प्रत्याशी को 3,35,181 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के नवाब काजिम अली खां ने 1,56,466 वोट और बीएसपी के अकबर हुसैन ने 81,006 मत हासिल किए थे। तीनों मुस्लिम प्रत्याशियों को 5,72,653 वोट मिले थे। इस बार भी मुस्लिम मतों का बिखराव ही भाजपा की जीत का कारण बना था।
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रामपुर से 1952 में पहले चुनाव में मौलाना अबुल कलाम आजाद मुस्लिम सांसद बने, जिसके बाद लगातार कांग्रेस से मुस्लिम नेताओं का ही दबदबा रहा। दो बार एस मेहंदी, पांच बार जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां सांसद बने और दो बार उनकी पत्नी बेगम नू बानो सांसद चुनी गईं। सपा ने इस सीट से तीन बार जीत दर्ज की थी, 2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने चौथी बार यहां से जीत हासिल की है। 1977 में भारतीय जनता दल से राजेंद्र सिंह रामपुर के पहले हिंदू सांसद बने थे। 1991 में वह भाजपा के टिकट पर दोबारा सांसद बने थे।
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मुस्लिम मतों का बंटवारा बना संसद जाने का रास्ता
1991 में भाजपा से राजेंद्र सिंह ने 2,13,429 मत हासिल कर 49,809 मतों से कांग्रेस प्रत्याशी जुल्फिकार अली खां को हराया था। इस चुनाव में जुल्फिकार अली खां को 1,63,620 मत हासिल हुए, जबकि जनता दल के प्रत्याशी हाजी सुबहान ने 84,815 मत प्राप्त किए थे। जनता पार्टी के फिरासत अली को 23,219 और हिफाजत अली को 17,237 वोट मिले। चारों मुस्लिम प्रत्याशियों को 2,88,891 मत हासिल हुए। मतों के बंटवारें ने 1991 के चुनाव में भाजपा को जीतने की राह आसान की।
इसके बाद 1998 में भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी ने 2,65,116 मत हासिल कर कांग्रेस प्रत्याशी बेगम नूर बानो को 4,966 मतों से हराया। इस चुनाव में बेगम नूरबानो को 2,60150 मत मिले, जबकि बीएसपी के अब्दुल सलाम को 1,31,441 मत मिले। सपा के शराफत यार खान को 1,15,877 वोट मिले थे। भाजपा छोड़कर तीनों मुस्लिम प्रत्याशियों को 5,07,468 मत मिले थे। इस तरह मुस्लिम मतों का बिखराव भाजपा के लिए फायदेमंद बना था।
वहीं 2014 के चुनाव में भाजपा के नैपाल सिंह ने 3,58,616 मत प्राप्त करके सपा के नसीर अहमद को 23,435 वोटों से हराया था। इस चुनाव में सपा प्रत्याशी को 3,35,181 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के नवाब काजिम अली खां ने 1,56,466 वोट और बीएसपी के अकबर हुसैन ने 81,006 मत हासिल किए थे। तीनों मुस्लिम प्रत्याशियों को 5,72,653 वोट मिले थे। इस बार भी मुस्लिम मतों का बिखराव ही भाजपा की जीत का कारण बना था।